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पानी से पूरी तरह घिर गए दर्जनों गांव
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मधुबन। तहसील क्षेत्र के देवारा में इन दिनों सरयू नदी उफान पर है। शनिवार को हाहा नाला स्थित रेगुलेटर पर नदी का जल स्तर 67.50 मीटर पर पहुंच गया। जो कि एक रिकॉर्ड है। 24 साल पूर्व 1998 में यहां आयी भीषण बाढ़ के समय अधिकतम जलस्तर 67.47 रिकॉर्ड किया गया था। इस साल जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है उसे देख कर लोगों को 1998 में आयी भीषण बाढ़ का मंजर याद आने लगा है।
हाहानाला बंधे पर कई जगह रिसाव की खबर से लोगों की धड़कने बढ़ी हुई हैं। शनिवार को दिन भर सिंचाई विभाग के अधिकारी जगह जगह बंधे में हो रहे रिसाव को रोकने के प्रयास में बालू, मिट्टी आदि के बोरी डलवा रहे हैं। दर्जनों गांवों के बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर जाने से उनका सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन जारी है। कई बाढ़ पीड़ित परिवारों ने हाहानाला बंधे पर ही शरण ले रखी है। जबकि कई परिवार अपने सगे सम्बन्धी एंव रिश्तेदारों के यहां गुजर कर रहे हैं बाढ़ के पानी से घिरे लोग कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पानी से घिरे इन लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। घरों में पानी घुसने पर बहुत से परिवार घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट अलग है। मुख्य मार्गो से इन लोगों का संपर्क टूट चुका है। केवल नाव ही अवागमन का एक मात्र सहारा बचा है। प्रशासन द्वारा आवागमन के लिए लगायी गयी नावें कम पड़ रहीं हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता यूएन पांडेय ने बताया कि बंधे में हो रहे रिसाव को अब लगभग नियंत्रित कर लिया गया है। हाहानाला रेगुलेटर पर नदी का पानी स्थिर है।
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हाहानाला बंधे पर कई जगह रिसाव की खबर से लोगों की धड़कने बढ़ी हुई हैं। शनिवार को दिन भर सिंचाई विभाग के अधिकारी जगह जगह बंधे में हो रहे रिसाव को रोकने के प्रयास में बालू, मिट्टी आदि के बोरी डलवा रहे हैं। दर्जनों गांवों के बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर जाने से उनका सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन जारी है। कई बाढ़ पीड़ित परिवारों ने हाहानाला बंधे पर ही शरण ले रखी है। जबकि कई परिवार अपने सगे सम्बन्धी एंव रिश्तेदारों के यहां गुजर कर रहे हैं बाढ़ के पानी से घिरे लोग कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पानी से घिरे इन लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। घरों में पानी घुसने पर बहुत से परिवार घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट अलग है। मुख्य मार्गो से इन लोगों का संपर्क टूट चुका है। केवल नाव ही अवागमन का एक मात्र सहारा बचा है। प्रशासन द्वारा आवागमन के लिए लगायी गयी नावें कम पड़ रहीं हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता यूएन पांडेय ने बताया कि बंधे में हो रहे रिसाव को अब लगभग नियंत्रित कर लिया गया है। हाहानाला रेगुलेटर पर नदी का पानी स्थिर है।
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