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डाक्टरों को ब्रांडेड दवा पर ही भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Tue, 18 Apr 2017 10:44 PM IST
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अगर सरकार जेनरिक दवाइयों की क्वालिटी कंट्रोल पर निगेहबानी करें तो मरीजों के लिए ये दवाएं लोगों के लिए काफी राहत पहुंचाने का काम करेंगी। वर्तमान में जो जेनरिक दवाइयां उपलब्ध हैं, उनके गुणवत्ता के बारे में बहुत से चिकित्सक आश्वस्त नहीं हैं। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से इन दवाओं का दाम कम हुआ है, लेकिन व्यवस्था को बदस्तूर जारी रखने के लिए सरकार की निगरानी काफी मायने रखेगी। साथ ही साथ इन दवाओं की पहचान भी सुनिश्चित कराना जरूरी है।
पीएमएसए (प्रांतीय चिकित्सक संघ) के अध्यक्ष और जिला अस्पताल में बतौर चर्म रोग विशेषज्ञ तैनात डॉ. एके रंजन ने कहा कि जेनरिक दवाओं के दाम और पहचान सुनिश्चित करा दी जाए तो मरीजों को काफी सहूलियत होगी मिलेगी। नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र यादव कहते हैं कि ब्रांडेड कंपनियों के मेडिसिन और जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता के बारे में ड्रग कंट्रोलर को ही अधिक जानकारी हो सकती है।
चिकित्सक तो स्टैंडर्ड कंपनियों के ब्रांडेड उत्पादों पर ही भरोसा करता है। बोले यदि जेनरिक दवाओं के लागत मूल्य की अपेक्षा ब्रिकी मूल्य नियंत्रित की जाए तो बेशक मरीजों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है, लेकिन चिकित्सक की प्राथमिकता होती है कि उसका मरीज जल्दी स्वस्थ हो। ऐसे में डाक्टर ब्रांडेड दवाओं पर ही भरोसा जताता है। आइएमए के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसएन खत्री कहते हैं कि सरकार यदि ब्रांडेड दवाओं की भांति जेनरिक दवाओं की क्वालिटी कंट्रोल कराने की भरोसेमंद व्यवस्था करे तो चिकित्सक मरीजों को जेनरिक दवाइयां ही लिखेंगे। आइएमए के अध्यक्ष डॉ. एसएन राय का कहना है कि यदि जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता भी ब्रांडेड मेडिसीन उत्पादों जैसी हो तो जेनरिक दवाओं को लिखने में कोई हर्ज नहीं है। हां, यह जरूरी हो कि जेनरिक दवाइयां गुणवत्ता के साथ ही अपेक्षाकृत सस्ती भी हों।
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जिला अस्पताल में इलाज के लिए आईं शिक्षिका कमला यादव कहती हैं कि जेनरिक दवाइयों की गुणवत्ता संदेहास्पद मानी जाती है। आम तौर जेनरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों की अपेक्षा सस्ती तो होती हैं फिर इनका दाम काफी होता है गुणवत्ता के साथ इनके मूल्य में भी कमी की जानी चाहिए। अधिवक्ता शिव नारायण राय कहते हैं कि सरकार को ब्रांडेड अथवा जेनरिक दवाओं के मूल्य पर नियंत्रण होना चाहिए।
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पीएमएसए (प्रांतीय चिकित्सक संघ) के अध्यक्ष और जिला अस्पताल में बतौर चर्म रोग विशेषज्ञ तैनात डॉ. एके रंजन ने कहा कि जेनरिक दवाओं के दाम और पहचान सुनिश्चित करा दी जाए तो मरीजों को काफी सहूलियत होगी मिलेगी। नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र यादव कहते हैं कि ब्रांडेड कंपनियों के मेडिसिन और जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता के बारे में ड्रग कंट्रोलर को ही अधिक जानकारी हो सकती है।
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चिकित्सक तो स्टैंडर्ड कंपनियों के ब्रांडेड उत्पादों पर ही भरोसा करता है। बोले यदि जेनरिक दवाओं के लागत मूल्य की अपेक्षा ब्रिकी मूल्य नियंत्रित की जाए तो बेशक मरीजों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है, लेकिन चिकित्सक की प्राथमिकता होती है कि उसका मरीज जल्दी स्वस्थ हो। ऐसे में डाक्टर ब्रांडेड दवाओं पर ही भरोसा जताता है। आइएमए के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसएन खत्री कहते हैं कि सरकार यदि ब्रांडेड दवाओं की भांति जेनरिक दवाओं की क्वालिटी कंट्रोल कराने की भरोसेमंद व्यवस्था करे तो चिकित्सक मरीजों को जेनरिक दवाइयां ही लिखेंगे। आइएमए के अध्यक्ष डॉ. एसएन राय का कहना है कि यदि जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता भी ब्रांडेड मेडिसीन उत्पादों जैसी हो तो जेनरिक दवाओं को लिखने में कोई हर्ज नहीं है। हां, यह जरूरी हो कि जेनरिक दवाइयां गुणवत्ता के साथ ही अपेक्षाकृत सस्ती भी हों।
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जिला अस्पताल में इलाज के लिए आईं शिक्षिका कमला यादव कहती हैं कि जेनरिक दवाइयों की गुणवत्ता संदेहास्पद मानी जाती है। आम तौर जेनरिक दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों की अपेक्षा सस्ती तो होती हैं फिर इनका दाम काफी होता है गुणवत्ता के साथ इनके मूल्य में भी कमी की जानी चाहिए। अधिवक्ता शिव नारायण राय कहते हैं कि सरकार को ब्रांडेड अथवा जेनरिक दवाओं के मूल्य पर नियंत्रण होना चाहिए।