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बजट पर चर्चाः महिलाएं बोलीं, हर वर्ग को राहत देने वाला हो बजट
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नगर के सहादतपुरा स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित बजट संवाद में मौजूद महिलाएं।
- फोटो : MAU
मऊ। अमर उजाला की ओर से शनिवार को शहर के एक रेस्टोरेंट में बजट पर संवाद का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न वर्ग की महिलाओं ने हिस्सा लेकर कहा कि कोरोना संक्रमण से मध्यम वर्ग ज्यादा प्रभावित हुआ है। इसको देखते हुए वित्त मंत्री ऐसा बजट पेश करें, जिससे हर वर्ग को राहत मिले। महंगाई पर लगाम लगाते हुए कार और होम लोन की तरह एजूकेशन लोन पर भी ब्याज का निर्धारण करें।
बजट में महिलाओं को विशेष रियायत दी जाए। साथ ही, एलोपैथ की तरह आयुर्वेद और होम्योपैथ विधा पर ध्यान दिया जाए। सरकार बजट में एलोपैथ को तरजीह देती है, लेकिन अन्य विधाओं की अनदेखी होती है। सरकार की उपेक्षा के कारण ही होम्योपैथ और आयुर्वेद पद्धति बदहाल है। - डा. नम्रता श्रीवास्तव, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल।
कोरोना संक्रमण काल में शिक्षा व्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। स्कूल बंद होने सेे पढ़ाई बाधित हुई है। तंगी के कारण बहुत से अभिभावक फीस नहीं दे सके। ऐसे में स्कूल भी संचालित हों और अभिभावकों पर भी ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए बजट में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे सरकारी की तरह प्राइवेट स्कूलों को भी अनुदान दिया जा सके। जिससे शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट सके। - रिचा सिंह, गृहिणी।
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सरकार एजूकेशन लोन पर ध्यान दे। आज होम लोन, कार लोन सस्ता है, लेकिन एजूकेशन लोन महंगा है। कोरोना संक्रमण काल में नौकरियों में भी कमी आई है। छात्र पढ़-लिखकर बेकार बैठे हैं। उन पर एजूकेशन लोन चुकाने का दबाव है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को ब्याज मुक्त करें, इससे तीन फायदे होंगे, बाहर से कच्चा तेल कम मंगाना पड़ेगा। पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। दुर्घटना की आशंका कम होगी। - स्नेहल गुजराती, गृहिणी।
कोरोना संक्रमण देखते हुए सरकार को इस बार स्कूलों की फीस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। ताकि हर वर्ग आसानी से फीस भरकर बच्चे को बेहतर शिक्षा दिला सकें। री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से धन उगाही न की जाए। एजुकेशन लोन सस्ता हो। - रंजना जालान, सदस्य मारवाड़ी युवा मंच।
सरकार ऐसा बजट पेश करे ताकि कोरोना पस्त हर वर्ग राहत महसूस कर सके। कोरोना काल में हर वर्ग परेशान रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों ने ज्यादा परेशानी उठाई है। वित्त मंत्री इस बजट में मध्यम वर्ग का ध्यान रखें। - अंजुला द्विवेदी, गृहिणी।
बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार को विधवा, वृद्धा पेंशन की धनराशि बढ़ानी चाहिए। बाहर पढ़ने या फिर नौकरी करने के लिए जाने वाली बेटियों की सुरक्षा के लिए खास प्रबंध सरकार करे। - ज्योति खंडेलवाल, बुटिक संचालिका।
इस समय मध्यम वर्गीय परिवार हर तरफ से मारा जा रहा है, कोरोना संक्रमण काल में इस वर्ग के परिवारों को ज्यादा दिक्कत हुई, जबकि समय से टैक्स जमा करने के साथ हर काम यही वर्ग करता है। ऐसे में बजट में सरकार को इस वर्ग का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ जी सकें।- नेहा कपूर, गृहिणी
कोरोना संक्रमण काल में छोटे व्यापारी ज्यादा परेशान हुए। सरकार ने गरीबों को बहुत कुछ दिया, तो धनवान पर कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन मध्यम वर्ग को हर तरफ से निराशा हाथ लगी। जबकि यही तबका ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करता है। इस बार बजट में सरकार इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे। - मधु राय, कवयित्री।
जीवन जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है। सरकार आवश्यक सामान के दामों पर लगाम लगाए। ताकि हर वर्ग बेहतर जीवन जी सके। इसके लिए आवश्यक है कि कालाबाजारी रोकी जाए, आवश्यक वस्तुओं के भंडारण पर लगाम लगाई जाए। -विजया शर्मा गृहिणी।
कोरोना संक्रमण काल में व्यवस्था बेपटरी हो गई है। सरकार ऐसा बजट पेश करे, जिससे हर वर्ग को राहत मिले। पेट्रो मूल्य की बढ़ती कीमत पर लगाम लगाने से ही यह दिक्कत दूर हो सकती है। बजट में इसका ध्यान रखा जाए। -अंजू सक्सेरिया, बुटिक संचालक।
बजट में अधिवक्ता वर्ग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि किसी बजट में इस वर्ग के लिए सरकार कोई व्यवस्था नहीं करती है। जबकि इस कोरोना काल में अधिवक्ता भी काफी परेशान रहे हैं। ऐसे में बजट में इस वर्ग के लिए पेंशन की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। - दुर्गावती मिश्रा, गृहिणी।
सरकार सौंदर्य प्रसाधन पर टैक्स कम करे। क्योंकि पिछले बजट में कास्मेटिक के सामान पर सरकार ने ज्यादा टैक्स लगाया था। इस बजट में टैक्स कम किया जाए। -सुप्रिया खंडेलवाल, गृहिणी।
महिलाओं की पहचान रसोईघर से होती है, चाहे महिला नौकरीपेशा हो या कारोबारी। उनके रसोईघर की व्यवस्था जितनी अच्छी होती है, उतनी ही उनकी तारीफ होती है। ऐसे में इस बजट में सरकार रसोईघर के सामान की कीमत कम करे। - नीता राखौलिया, गृहिणी।
इस बजट में रसोई गैस की सब्सिडी पर ध्यान दिया जाए। जो लोग टैक्स देते हैं, उनकी सुरक्षा के लिए सरकार प्रबंध करे, ताकि वे भी भयमुक्त जीवन जी सकें।- ललिता अग्रवाल, गृहिणी।
सरकार ऐसा बजट पेश करे, जिसमें हर वर्ग की खुशहाली हो। कोरोना के चलते सभी वर्ग परेशान है। इसमें बहुत लोगों की नौकरी चली गई तो बड़ी संख्या में लोगों का व्यापार चौपट हुआ है। ऐसे में सरकार का यह बजट मायने रखेगा। अच्छा बजट होगा तो एक बार फिर व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। - नूपुर अग्रवाल, समाज सेविका।
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बजट में महिलाओं को विशेष रियायत दी जाए। साथ ही, एलोपैथ की तरह आयुर्वेद और होम्योपैथ विधा पर ध्यान दिया जाए। सरकार बजट में एलोपैथ को तरजीह देती है, लेकिन अन्य विधाओं की अनदेखी होती है। सरकार की उपेक्षा के कारण ही होम्योपैथ और आयुर्वेद पद्धति बदहाल है। - डा. नम्रता श्रीवास्तव, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल।
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कोरोना संक्रमण काल में शिक्षा व्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। स्कूल बंद होने सेे पढ़ाई बाधित हुई है। तंगी के कारण बहुत से अभिभावक फीस नहीं दे सके। ऐसे में स्कूल भी संचालित हों और अभिभावकों पर भी ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए बजट में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे सरकारी की तरह प्राइवेट स्कूलों को भी अनुदान दिया जा सके। जिससे शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट सके। - रिचा सिंह, गृहिणी।
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सरकार एजूकेशन लोन पर ध्यान दे। आज होम लोन, कार लोन सस्ता है, लेकिन एजूकेशन लोन महंगा है। कोरोना संक्रमण काल में नौकरियों में भी कमी आई है। छात्र पढ़-लिखकर बेकार बैठे हैं। उन पर एजूकेशन लोन चुकाने का दबाव है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को ब्याज मुक्त करें, इससे तीन फायदे होंगे, बाहर से कच्चा तेल कम मंगाना पड़ेगा। पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। दुर्घटना की आशंका कम होगी। - स्नेहल गुजराती, गृहिणी।
कोरोना संक्रमण देखते हुए सरकार को इस बार स्कूलों की फीस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। ताकि हर वर्ग आसानी से फीस भरकर बच्चे को बेहतर शिक्षा दिला सकें। री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से धन उगाही न की जाए। एजुकेशन लोन सस्ता हो। - रंजना जालान, सदस्य मारवाड़ी युवा मंच।
सरकार ऐसा बजट पेश करे ताकि कोरोना पस्त हर वर्ग राहत महसूस कर सके। कोरोना काल में हर वर्ग परेशान रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों ने ज्यादा परेशानी उठाई है। वित्त मंत्री इस बजट में मध्यम वर्ग का ध्यान रखें। - अंजुला द्विवेदी, गृहिणी।
बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार को विधवा, वृद्धा पेंशन की धनराशि बढ़ानी चाहिए। बाहर पढ़ने या फिर नौकरी करने के लिए जाने वाली बेटियों की सुरक्षा के लिए खास प्रबंध सरकार करे। - ज्योति खंडेलवाल, बुटिक संचालिका।
इस समय मध्यम वर्गीय परिवार हर तरफ से मारा जा रहा है, कोरोना संक्रमण काल में इस वर्ग के परिवारों को ज्यादा दिक्कत हुई, जबकि समय से टैक्स जमा करने के साथ हर काम यही वर्ग करता है। ऐसे में बजट में सरकार को इस वर्ग का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे सम्मान के साथ जी सकें।- नेहा कपूर, गृहिणी
कोरोना संक्रमण काल में छोटे व्यापारी ज्यादा परेशान हुए। सरकार ने गरीबों को बहुत कुछ दिया, तो धनवान पर कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन मध्यम वर्ग को हर तरफ से निराशा हाथ लगी। जबकि यही तबका ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करता है। इस बार बजट में सरकार इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे। - मधु राय, कवयित्री।
जीवन जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है। सरकार आवश्यक सामान के दामों पर लगाम लगाए। ताकि हर वर्ग बेहतर जीवन जी सके। इसके लिए आवश्यक है कि कालाबाजारी रोकी जाए, आवश्यक वस्तुओं के भंडारण पर लगाम लगाई जाए। -विजया शर्मा गृहिणी।
कोरोना संक्रमण काल में व्यवस्था बेपटरी हो गई है। सरकार ऐसा बजट पेश करे, जिससे हर वर्ग को राहत मिले। पेट्रो मूल्य की बढ़ती कीमत पर लगाम लगाने से ही यह दिक्कत दूर हो सकती है। बजट में इसका ध्यान रखा जाए। -अंजू सक्सेरिया, बुटिक संचालक।
बजट में अधिवक्ता वर्ग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि किसी बजट में इस वर्ग के लिए सरकार कोई व्यवस्था नहीं करती है। जबकि इस कोरोना काल में अधिवक्ता भी काफी परेशान रहे हैं। ऐसे में बजट में इस वर्ग के लिए पेंशन की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। - दुर्गावती मिश्रा, गृहिणी।
सरकार सौंदर्य प्रसाधन पर टैक्स कम करे। क्योंकि पिछले बजट में कास्मेटिक के सामान पर सरकार ने ज्यादा टैक्स लगाया था। इस बजट में टैक्स कम किया जाए। -सुप्रिया खंडेलवाल, गृहिणी।
महिलाओं की पहचान रसोईघर से होती है, चाहे महिला नौकरीपेशा हो या कारोबारी। उनके रसोईघर की व्यवस्था जितनी अच्छी होती है, उतनी ही उनकी तारीफ होती है। ऐसे में इस बजट में सरकार रसोईघर के सामान की कीमत कम करे। - नीता राखौलिया, गृहिणी।
इस बजट में रसोई गैस की सब्सिडी पर ध्यान दिया जाए। जो लोग टैक्स देते हैं, उनकी सुरक्षा के लिए सरकार प्रबंध करे, ताकि वे भी भयमुक्त जीवन जी सकें।- ललिता अग्रवाल, गृहिणी।
सरकार ऐसा बजट पेश करे, जिसमें हर वर्ग की खुशहाली हो। कोरोना के चलते सभी वर्ग परेशान है। इसमें बहुत लोगों की नौकरी चली गई तो बड़ी संख्या में लोगों का व्यापार चौपट हुआ है। ऐसे में सरकार का यह बजट मायने रखेगा। अच्छा बजट होगा तो एक बार फिर व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। - नूपुर अग्रवाल, समाज सेविका।