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नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने की भवानी शैलपुत्री की पूजा

Sat, 17 Oct 2020 11:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 11:24 PM IST
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Devotees worship Bhavani Shailputri on the first day of Navratri
नवरात्रि के प्रथम दिन नगर के शीतला माता धाम पर दर्शन के लिए लगी कतार। - फोटो : MAU
मऊ। नवरात्र के पहले दिन जहां श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप भवानी शैलपुत्री की आराधना किए। इससे लगने वाले जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। वही नवरात्र शुरू होते ही बाजारों में चहल-पहल शुरू हो गई। अधिकांश लोगों ने नवरात्र में पहले दिन व्रत रखकर मां का पूजन अर्चन किया। इस दौरान शीतला धाम से लेकर अन्य दुुर्गा मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया था।
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पूजन और दर्शन के चक्कर में मंदिरों पर उमड़ी भारी भीड़ से सोशल डिस्टेेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ी। हालांकि मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों के पूजन की व्यवस्था की गई थी। कोरोना संक्रमण काल में अनुमान से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मां का दर्शन किए। लोगों के उत्साह से उम्मीद है कि नौ दिनों तक होने वाली मां दुर्गा की पूजा धूमधाम से संपन्न होगी। पहले दिन खास तौर से जिला मुख्यालय स्थित शीतला धाम के साथ वनदेवी धाम पर भक्तों की भारी भीड़ थी। पर्व के मद्देनजर नगर के सभी बाजारों में चहल पहल रही।
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नवरात्र का पहला दिन होने के चलते मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन अर्चन करने के साथ ही बाजारों में जमकर खरीदारी की। इसके चलते नगर के सहादतपुरा, मुंशीपुरा, रौजा, सिंधी कालोनी, चौक, गोला बाजार सहित विभिन्न बाजारों में सुबह से ही गहमागहमी रही। उल्लेखनीय है कि मां दुर्गा के पहले अवतार शैल पुत्री को प्रकृति की देवी माना जाता है। देवी का यही स्वरूप भक्तों को पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करता है। मान्यता के अनुसार देवी का प्रथम अवतार सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विचारों को प्रभावित करता है। मां दुर्गा के आराधना मात्र से ही मनुष्य के वैचारिक विकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों, पुराणों के मुताबिक हिमालय की पुत्री होने के कारण ही दुर्गा के पहले अवतार का नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रकृति के भावों को स्पष्ट करने के लिए ही देवी के प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैल पुत्री की आराधना की जाती है।
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यह भी मान्यता है कि शैल पुत्री की आराधना अकेले ही नहीं बल्कि भगवान शिव के साथ ही जानी चाहिए। इन्हीं मान्यताओं को देखते हुए श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर शैल पुत्री की पूजा की। इस अवसर पर नगर क्षेत्र के माता पोखरा स्थित शीतला माता धाम, आजमगढ़ मोड़ समीप स्थित दुर्गा मंदिर सहित जिले के कहिनौर गांव स्थित वनदेवी धाम, खुरहट स्थित सीरियापुर की देई मां मंदिर, कोपागंज स्थित दुर्गा मंदिर, मांदी सिपाह में कोयलमर्याद भवानी माई मंदिर, मधुबन क्षेत्र के निधियांव गांव स्थित अष्टभुजी मंदिर समेत जिले के अन्य गांवों में स्थित तमाम देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई।कई मंदिरों पर सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा गया। मंदिरों पर श्रद्धालु कतारबद्ध होकर इलायची, नारियल, दाना सहित मिष्ठान चढ़ाकर दर्शन पूजन कर रहे थे। साथ ही जयकारे भी लगा रहे थे। मंदिरों पर दर्शन पूजन करने वालों ने वहां सजी दुकानों पर जमकर खरीदारी भी की। उधर, नौ दिनों तक व्रत रख कर देवी आराधना करने वाले भक्तों ने शनिवार को अपने घरों में कलश स्थापित कर नौ दिवसीय पूजा का शुभारंभ किया।

दोहरीघाट: नवरात्र के पहले दिन कस्बा सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में स्थापित देवी मंदिरों में लोगों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया। कस्बे के जानकीघाट पर स्थित दुर्गा मंदिर में भोर से पूजन अर्चन करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में स्थित मंदिरों में लोगों ने व्रत रखकर पारंपरिक तौर से मां दुर्गा की पूजा की। क्षेत्र के वनदेवी धाम पर दूरदराज से श्रद्धालुओं का सुबह से ही पूजन अर्चन करने के लिए तांता लगा रहा।
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