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Mau News: प्राचीन गुरादारी मठ के पाताल गंगा सरोवर में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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करहां। गोविंद दशमी के पावन पर्व पर स्थानीय प्राचीन गुरादारी मठ के पाताल गंगा सरोवर में रविवार को श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। सरोवर की परिक्रमा कर प्राचीन सनातनी पीठ गुरादारी के सिद्ध संत बाबा घनश्याम दास की समाधि पर पुष्प अर्पित कर पूजन-अर्चन किया। साथ ही मत्था टेककर मन्नत मांगी। प्राचीन सरोवर में स्नान करने के लिए दूर दराज सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालुओं का तड़के से ही रेला लगा रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सरोवर की परिक्रमा करते हुए प्राचीन सनातनी पीठ गुरादारी के सिद्ध संत बाबा घनश्याम दास की समाधि पर पुष्प अर्पित कर पूजन-अर्चन किया। परंपरा के अनुसार भक्तों ने अपने खेतों की पहली फसल बाबा घनश्याम दास की समाधि पर अर्पित की।
मठ के पुजारी रामदास ने बताया कि मान्यता है कि जो श्रद्धालु अत्यधिक दूरी की वजह से सिद्ध संत गोविंद शाह की समाधि तक नहीं पहुंच पाता, वह उनके शिष्य बाबा घनश्याम दास की समाधि पर दर्शन कर समान पुण्य का भागी बन जाता है। घनश्याम दास बाबा की समाधि पर हर वर्ष भव्य मेला लगता है। मेले का आयोजन देर शाम तक चलता रहा। गोविंद दशमी का पर्व इस वर्ष भी आस्था, भक्ति और लोक परंपराओं से सराबोर रहा। पूरे दिन गुरादारी मठ परिसर का वातावरण भक्तिमय रहा। वक्त बारी-बारी से बाबा घनश्याम साहब का जयकारा लगाते रहे।
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मठ के पुजारी रामदास ने बताया कि मान्यता है कि जो श्रद्धालु अत्यधिक दूरी की वजह से सिद्ध संत गोविंद शाह की समाधि तक नहीं पहुंच पाता, वह उनके शिष्य बाबा घनश्याम दास की समाधि पर दर्शन कर समान पुण्य का भागी बन जाता है। घनश्याम दास बाबा की समाधि पर हर वर्ष भव्य मेला लगता है। मेले का आयोजन देर शाम तक चलता रहा। गोविंद दशमी का पर्व इस वर्ष भी आस्था, भक्ति और लोक परंपराओं से सराबोर रहा। पूरे दिन गुरादारी मठ परिसर का वातावरण भक्तिमय रहा। वक्त बारी-बारी से बाबा घनश्याम साहब का जयकारा लगाते रहे।
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