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Mau News: मेडिकल स्टोर, पैथालॉजी और स्वास्थ्य इकाई से ली जाएगी टीबी के मरीज का ब्यौरा

Sun, 03 Dec 2023 10:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 Dec 2023 10:39 PM IST
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Details of TB patients will be collected from medical store, pathology and health units.
मऊ। केंद्र सरकार के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत अभी 23 दिसंबर से पांच दिसंबर तक जनपद के अनेक हिस्सों में सक्रिय टीबी मरीज खोज अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद आगामी सात से 14 दिसंबर तक मरीजों के नोटिफिकेशन के लिए मेडिकल स्टोर, पैथालॉजी व स्वास्थ्य इकाई से दवा लेने, जांच कराने या उपचार कराने वाले टीबी मरीजों का पूरा ब्यौरा लिया जाएगा।
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मरीज की पहचान होने के बाद विभाग की ओर से उसका निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत पंजीकरण सरकार की ओर से टीबी मरीजों को दी जाने वाली सभी सुविधा दी जाएगी। विभाग की ओर से इसके लिए सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।
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टीबी से मुक्ति के लिए अब केंद्र सरकार की ओर से हर मरीज को चिहिृत कर उससे होने वाले संक्रमण पर रोक के साथ मरीज को पूरा रोग से पूरा कोर्स कराने की कवायद की गई है ताकि कहीं पर टीबी मरीज उपचार होने पर उनका सही तरीके से पूरा उपचार किया जा सके। विभाग का कहना है टीबी के मरीज का पूरा उपचार नहीं होने से टीबी का रूप बदल जाता है, जो मरीज के साथ उसके संपर्क में आने वाले के लिए भी घातक होता है।
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एमडीआर टीबी मरीजों के लिए घातक
मऊ। क्षय यानी टीबी के रोगी का जब बीच में इलाज छूट जाता है तो वह एक दिन एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) की स्थिति में पहुंच जाता है। यह टीबी की अगली स्टेज है। ऐसे रोगियों को शुरुआत में ज्यादा तकलीफ नहीं होती लेकिन जब बीमारी लास्ट स्टेज में पहुंचती है तो वे अति गंभीर कुपोषित हो जाते हैं। उनके शरीर में ताकत नहीं रहती है।
जिला पीपीएम समन्वयक जयदेश यादव ने बताया कि जिले में इस समय 2230 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से 176 एमडीआर टीबी के रोगी हैं। जबकि जनवरी 2023 से अब तक कुल 3792 टीबी रोगी नोटिफाई किये जा चुके हैं। वर्ष 2019 से अभी तक निक्षय पोषण योजना में क्षय रोगियों को करीब 3.28 करोड़ रुपए का भुगतान डीबीटी के द्वारा किया जा चुका है।

टीबी के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में फेफड़ों में संक्रमण
मऊ। टीबी के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में फेफड़ों में संक्रमण होता है। यदि प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो लिम्फोसाइट्स में टीबी बैक्टीरिया नहीं हो सकता है और यह तेजी से फैलता है। टीबी संक्रमण चार चरणों में होता है। प्रारंभिक मैक्रोफेज प्रतिक्रिया, विकास चरण, प्रतिरक्षा नियंत्रण चरण और फेफड़े के गुहिकायन चरण। ये चार चरण लगभग एक महीने में होते हैं। मेडिकल की भाषा में इन्हें पल्मोनरी टीबी और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। पल्मोनरी टीबी में ट्यूबरकुलोसिस के बैक्टीरिया फेफड़ों को प्रभावित करते हैं।


टीबी के खात्मे के लिए सात से 14 दिसंबर तक जिन स्थानों पर टीबी के मरीज जाकर दवा लेने के साथ उपचार और जांच कराते हैं, वहां पर भी स्वास्थ्य कर्मी जाकर मरीजों का पूरा विवरण दर्ज करेंगे। इससे मरीज को टीबी रोग से बचाव का पूरा कोर्स दिया जा सके। - डा. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी

धामपुर में एक दूसरे को मिठाई खिलाकर भाजपा की जीत का जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता स्तोत्र संवाद।

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