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आम बजट से मायूस दिखे हर वर्ग के लोग

Thu, 01 Feb 2018 11:47 PM IST
mau news
mau news Updated Thu, 01 Feb 2018 11:47 PM IST
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Desperate people of every section
बजट के प्रसारण को देखते लोग।
मऊ। केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को पेश किए गए बजट में जिले के रेलवे को गति न मिलने तथा आम बजट में राहत न दिए गए जाने से हर वर्ग के लोग मायूस दिखे। साथ ही लोगों को निराशा हाथ लगी। वित्त मंत्री से कर छूट का दायरा बढ़ाए जाने की आस लगाए हुए थे, लेकिन कोई राहत नहीं दी गई। सरकार की तरफ से कृषि तथा शिक्षा के क्षेत्र में बजट का प्रावधान करने का लोगों ने स्वागत तो किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से क्रियान्वयन करने पर जोर दिया है।
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 गुरुवार को पेश किए गए रेल और आम बजट को लेकर लोग सुबह से लोग टीवी पर नजर गड़ाए हुए थे। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट के बाद व्यापारी, नौकरीपेशा, गृहिणी, उद्यमी सहित विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों के चेहरे पर निराशा के भाव दिखने लगे थे। इस संबंध में शिक्षक नेता कृष्णानंद राय का कहना था कि इनकम टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए नौकरी पेशा लोगों को बड़ी राहत देने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं करके मध्यम वर्ग को निराश किया है। हालांकि सीनियर सिटीजन के लिए डिपोजिट पर छूट 10 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। डाक्टर पीएल गुप्ता ने बताया कि जिले में शिलान्यास किए जाने के बाद भी निर्माण को गति देने के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। इससे जिले के रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा नहीं बढ़ेगी। दवा व्यापारी नरेंद्र बरनवाल ने कहा कि आम बजट से महंगाई में इजाफा होगा।कस्टम ड्यूटी में इजाफा कर दिया, जिससे मोबाइल, टीवी, फ्रीज जैसे मध्यम वर्गीय घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं महंगी हो जाएगी। इसी तरह किसान नेता राकेश सिंह का कहना है कि किसानों के फसल लागत का डेढ़ गुना दाम मिलने से किसानों की आय दुगुनी तो होगी, लेकिन किसानों को तभी लाभ मिलेगा जब जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कराया जाएगा। व्यापपारी विनोद ने सरकार ने हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने और आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का लक्ष्य रखना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसका लाभ तभी लोगों को मिलेगा जब सरकारी मशीनरी को चुस्त करना होगा। उद्यमी सुशील कुमार अग्रवाल का कहना है कि लघु उद्योगों को राहत नहीं मिली है। लघु उद्योगों के लिए बजट का प्रावधान तो किया गया है लेकिन बजट के ब्यौरे को सार्वजनिक किया जाए।
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