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Mau News: सरयू के किनारे तरबूज, नाशपाती की कर रहे खेती
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दोहरीघाट। जिले की सरयू नदी ने जहां कइयों का आशियाना छीन लिया है। वहीं वर्तमान में वह कई किसानों को आर्थिक सम्बल देने में काम आ रही है। नदी के तीरे यानी रेत पर इन दिनों 70 किसान तरबूज, नाशपाती, खीरा, ककड़ी के साथ सब्जियों की खेती कर रहे हैं।
यहां से निकलने वाली सारी चीजें आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया व मऊ जनपद की मंडियों में पहुंच रही हैं। किसान रामप्रसाद,रमेश साहनी बताते है कि गर्मी के मौसम में सरयू नदी का दायरा कम हो जाता है, इसकी वजह से पश्चिम के क्षेत्र में रेता छोड़ रखी है।
जहां मैं और मेरे जैसे कई किसान भाई फरवरी और मार्च माह से ही नदी के रेता में नेनुआ, कोहड़ा, लौकी, करैला, परवर, भिंडी, सरपुतिया,ककड़ी, तरबूज, खरबूज व खीरा बोना शुरू कर देते हैं। करीब एक माह में यह पैदावार शुरू हो जाती है।
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बताया कि रेत पर खेती करना बहुत मेहनत का काम होता है। कड़ी धूप में नदी से पानी घड़े में भरभर कर सब्जियों में डालते हैं। बताया कि पिछली बार नदी ने कम रेता छोड़ा था, लेकिन इस बार नदी ने बहुत ज्यादा रेत छोड़ा है।
यह किसानों के लिए बरदान साबित हो रहा है। बताया कि रेत पर खेती करना ही हमारी आजीविका है। इस बार करीब दो से तीन लाख रुपये इस सीजन में कमाई होने अनुमान है।
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यहां से निकलने वाली सारी चीजें आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया व मऊ जनपद की मंडियों में पहुंच रही हैं। किसान रामप्रसाद,रमेश साहनी बताते है कि गर्मी के मौसम में सरयू नदी का दायरा कम हो जाता है, इसकी वजह से पश्चिम के क्षेत्र में रेता छोड़ रखी है।
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जहां मैं और मेरे जैसे कई किसान भाई फरवरी और मार्च माह से ही नदी के रेता में नेनुआ, कोहड़ा, लौकी, करैला, परवर, भिंडी, सरपुतिया,ककड़ी, तरबूज, खरबूज व खीरा बोना शुरू कर देते हैं। करीब एक माह में यह पैदावार शुरू हो जाती है।
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बताया कि रेत पर खेती करना बहुत मेहनत का काम होता है। कड़ी धूप में नदी से पानी घड़े में भरभर कर सब्जियों में डालते हैं। बताया कि पिछली बार नदी ने कम रेता छोड़ा था, लेकिन इस बार नदी ने बहुत ज्यादा रेत छोड़ा है।
यह किसानों के लिए बरदान साबित हो रहा है। बताया कि रेत पर खेती करना ही हमारी आजीविका है। इस बार करीब दो से तीन लाख रुपये इस सीजन में कमाई होने अनुमान है।