{"_id":"5bb9032a867a55685a2b4c34","slug":"151538851626-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुहवामोड़ विजयगढ़ कांड के विवेचक बदले गए","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मुहवामोड़ विजयगढ़ कांड के विवेचक बदले गए
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हलधरपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के मुहवा मोड़ विजय गढ़ में 27 सितंबर को निजी बस के धक्के से स्कूली बच्चों के घायल होने के बाद हुए बवाल पथराव, आगजनी, तोड़-फोड़ की घटना में दर्ज तीन मुकदमों के विवेचक बदल दिए गए हैं। इन मुुकदमों की विवेचना पहले उप निरीक्षक मनोज सिंह को सौंपी गई थी। लेकिन अब इन मुकदमों की विवेचना पुलिस चौकी प्रभारी सच्चिदानंद यादव को सौंप दी गई है।
उक्त बवाल में हलधरपुर थानाध्यक्ष सहित 100 डायल और पुलिस की एक बाइक को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था। इस प्रकरण में तीन मुकदमों में 24 नामजद सहित 900 अज्ञात उपद्रवियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पहले एसआई मनोज सिंह को विवेचना करने का दायित्व दिया गया था। इन मामलों में पुलिस की ओर से अब तक उपद्रव के मुुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। बवाल के दस दिन बाद तक केवल पांच नामजद आरोपियों सुनील राम पुत्र भोला, अभिषेक पुत्र मदन, अमरजीत पुत्र दुखन, अंकुश पुत्र भोला और नदुल पुत्र चंद्रमा की गिरफ्तारी पुलिस कर पाई है। उधर इन मुुकदमों में अज्ञात आरोपियों के नाम निकालने के लिए भी पुलिस पर दबाव बनाया जाने लगा। पुलिस पर अज्ञात उपद्रवियों के प्रति नरमी बरतने के भी आरोप लगने लगे थे। हालांकि एएसपी एसके श्रीवास्तव ने ऐसे आरोपों को गलत बताया था। इस बीच अचानक इन मुकदमों के विवेचक को बदल दिया गया। जानकारों का कहना है कि विभाग की किरकिरी से बचने के लिए विवेचक को बदल दिया गया है। हालांकि इस बाबत थानाध्यक्ष का तर्क है कि चूंकि घटना के दिन सभी उपनिरीक्षक घटना स्थल पर मौजूद थे, केवल उप निरीक्षक सच्चिदानंद यादव पहले से ही अवकाश पर थे और विभागीय नियमों के अनुसार घटना स्थल पर पहले से ही मौजूद पुलिस अधिकारी को विवेचक नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए उप निरीक्षक को अवकाश से लौटने के बाद विवेचना की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
विज्ञापन
उक्त बवाल में हलधरपुर थानाध्यक्ष सहित 100 डायल और पुलिस की एक बाइक को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था। इस प्रकरण में तीन मुकदमों में 24 नामजद सहित 900 अज्ञात उपद्रवियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पहले एसआई मनोज सिंह को विवेचना करने का दायित्व दिया गया था। इन मामलों में पुलिस की ओर से अब तक उपद्रव के मुुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। बवाल के दस दिन बाद तक केवल पांच नामजद आरोपियों सुनील राम पुत्र भोला, अभिषेक पुत्र मदन, अमरजीत पुत्र दुखन, अंकुश पुत्र भोला और नदुल पुत्र चंद्रमा की गिरफ्तारी पुलिस कर पाई है। उधर इन मुुकदमों में अज्ञात आरोपियों के नाम निकालने के लिए भी पुलिस पर दबाव बनाया जाने लगा। पुलिस पर अज्ञात उपद्रवियों के प्रति नरमी बरतने के भी आरोप लगने लगे थे। हालांकि एएसपी एसके श्रीवास्तव ने ऐसे आरोपों को गलत बताया था। इस बीच अचानक इन मुकदमों के विवेचक को बदल दिया गया। जानकारों का कहना है कि विभाग की किरकिरी से बचने के लिए विवेचक को बदल दिया गया है। हालांकि इस बाबत थानाध्यक्ष का तर्क है कि चूंकि घटना के दिन सभी उपनिरीक्षक घटना स्थल पर मौजूद थे, केवल उप निरीक्षक सच्चिदानंद यादव पहले से ही अवकाश पर थे और विभागीय नियमों के अनुसार घटना स्थल पर पहले से ही मौजूद पुलिस अधिकारी को विवेचक नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए उप निरीक्षक को अवकाश से लौटने के बाद विवेचना की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
विज्ञापन