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दहेज प्रताड़ना के 23 वर्ष पुराने मामले में पति सहित चार को दो-दो वर्ष की 0सजा
Updated Tue, 23 Oct 2018 10:00 PM IST
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मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लेेकेश नागर ने दहेज के लिए प्रताडित करने के 23 वर्ष पुराने मामले में आरोपी पति सहित पांच लोगों को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद पति सहित चार को दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही दो-दो हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही अर्थदंड जमा होने पर चार हजार रुपया पीडिता को देने का आदेश दिया। फैसला सुनाने के दौरान एक आरोपी इम्तियाज अहमद कोर्ट में उपस्थित नहीं था। उसे भी दोषी पाते हुए उसके विरुद्घ वारंट जारी करने का आदेश दिया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र के सिकड़ी कोल गांव का है।
मामले के अनुसार मधुबन थाना क्षेत्र के दुबारी गांव निवासी सायरा बानो पत्नी मुमताज पुत्र मुनीर अहमद ने एक परिवाद सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया। वादिनी का कथन था कि उसकी शादी सिकड़ीकोल गांव निवासी मुमताज अहमद पुत्र रफीउद्दीन के साथ 20 मई 1995 को हुई थी। शादी के बाद से ही उसके पति मुमताज अहमद, सास हमीदन , ससुर रफीउद्दीन और इम्तेयाज तथा सायरा पत्नी जहरुद्दीन दहेज में एक लाख रुपया और स्कूटर की मांग करने लगे। इसे लेकर मारपीटकर उसे घर से निकाल दिया। सीजेएम कोर्ट में परिवादिनी की ओर से चार गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष से एक गवाह झूरी सिंह को पेश कर तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा साक्ष्यों को अवलोकन करने के बाद आरोपीगण मुमताज अहमद, रफीउद्दीन, इम्तेयाज, हमीदन, सायरा को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का दोषी पाया। फैसला सुनाए जाते समय इम्तेयाज कोर्ट में उपस्थित नहीं था। उसके विरुद्व वारंट जारी करने का आदेश दिया। वहीं मुमताज अहमद, रफीउद्दीन, हमीदन, सायरा को प्रताड़ना केे मामले में दो- दो वर्ष की सजा के साथ ही 15-15 सौ रुपया अर्थदंड तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के मामले में एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही पांच-पांच सौ रुपया अर्थदंड निर्धारित किया।
मामले के अनुसार मधुबन थाना क्षेत्र के दुबारी गांव निवासी सायरा बानो पत्नी मुमताज पुत्र मुनीर अहमद ने एक परिवाद सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया। वादिनी का कथन था कि उसकी शादी सिकड़ीकोल गांव निवासी मुमताज अहमद पुत्र रफीउद्दीन के साथ 20 मई 1995 को हुई थी। शादी के बाद से ही उसके पति मुमताज अहमद, सास हमीदन , ससुर रफीउद्दीन और इम्तेयाज तथा सायरा पत्नी जहरुद्दीन दहेज में एक लाख रुपया और स्कूटर की मांग करने लगे। इसे लेकर मारपीटकर उसे घर से निकाल दिया। सीजेएम कोर्ट में परिवादिनी की ओर से चार गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष से एक गवाह झूरी सिंह को पेश कर तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा साक्ष्यों को अवलोकन करने के बाद आरोपीगण मुमताज अहमद, रफीउद्दीन, इम्तेयाज, हमीदन, सायरा को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का दोषी पाया। फैसला सुनाए जाते समय इम्तेयाज कोर्ट में उपस्थित नहीं था। उसके विरुद्व वारंट जारी करने का आदेश दिया। वहीं मुमताज अहमद, रफीउद्दीन, हमीदन, सायरा को प्रताड़ना केे मामले में दो- दो वर्ष की सजा के साथ ही 15-15 सौ रुपया अर्थदंड तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के मामले में एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही पांच-पांच सौ रुपया अर्थदंड निर्धारित किया।
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