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Mau News: दो महीने से मानदेय न मिलने पर कार्य बहिष्कार, धरने पर बैठे संविदा डॉक्टर और कर्मचारी

Fri, 22 May 2026 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 12:17 AM IST
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Contract doctors and employees staged a strike after not receiving their salaries for two months.
दो माह का बकाया वेतन की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार कर सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन करते संविदा च
दो माह से बकाया मानदेय नहीं मिलने से नाराज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार करते हुए सीएमओ कार्यालय पर टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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उधर, इस कार्य बहिष्कार में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, 10 सीएचसी और 40 पीएचसी पर तैनात 70 संविदा डॉक्टरों के साथ 1200 संविदा स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर चले गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं।
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महिला अस्पताल की ओपीडी केवल एक स्थायी चिकित्सक के भरोसे संचालित होती दिखी। वहीं जिला अस्पताल और छह सीएचसी पर एनसीडी क्लीनिक पूरी तरह बंद रहे।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर आयोजित तीन दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार के तहत कर्मचारी सीएमओ परिसर में एकत्र हुए और प्रदर्शन किया।
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संगठन के अध्यक्ष डॉ. शैलजाकांत पांडेय ने कहा कि दो माह से मानदेय का भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि जल्द बकाया भुगतान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी पहले ही दी गई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया।
संगठन के महामंत्री आशुतोष राय ने कहा कि दो माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, बावजूद इसके कर्मचारी लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
कई कर्मचारी बाहर रहकर नौकरी कर रहे हैं और कर्ज लेकर घर का किराया तथा अन्य जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कार्य बहिष्कार मजबूरी में करना पड़ा। इसके लिए एक सप्ताह पहले सीएमओ को ज्ञापन सौंपा गया था और सांकेतिक प्रदर्शन कर चेतावनी भी दी गई थी।
प्रदर्शन में अश्वनी सिंह, अंजनी त्रिपाठी, संत कुमार, अश्वनी राय, हिमांशू उपाध्याय, मधु राय, नीलम, डॉ. आशमा मुनीर, डॉ. प्रज्ञा सिंह आदि मौजूद रहीं।
ओपीडी से लेकर कई स्वास्थ्य सेवाएं रहीं प्रभावित
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के मानदेय न मिलने पर कार्य बहिष्कार का असर जिले के 23 सरकारी अस्पतालों पर देखने को मिला। जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक पूरी तरह बंद रहा। वहीं लैब, ओपीडी, पीडियाट्रिक आईसीयू, ब्लड बैंक और टीबी क्लीनिक की सेवाएं भी प्रभावित रहीं। इसके अलावा 18 ब्लॉकों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े 18 डॉक्टरों की टीमें भी हड़ताल में शामिल रहीं, जिससे कार्यक्रम प्रभावित हुआ। महिला अस्पताल में संविदा महिला चिकित्सकों के हड़ताल में शामिल होने के कारण अस्पताल की ओपीडी एकमात्र स्थायी चिकित्सक के भरोसे चलती दिखी। इसका असर यह रहा कि कई मरीज डॉक्टरों के चेंबर खाली मिलने पर लौट गए।

48 घंटे में दूसरी बार परेशान हुए मरीज और तीमारदार
जिले में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन मरीज और तीमारदार परेशान रहे। बुधवार को जिले के 1200 से अधिक दवा व्यापारियों ने विरोध स्वरूप दुकानें बंद रखी थीं, जिससे मरीजों को दवाएं लेने में परेशानी हुई। वहीं बृहस्पतिवार को संविदा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से मरीजों की दिक्कतें और बढ़ गईं।
मरीज बोले, वैकल्पिक व्यवस्था करें
आंदोलन उनका अधिकार है, लेकिन जिम्मेदारों को स्थिति को देखते हुए मरीजों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। मैं सुबह से अपनी गर्भवती बहू की जांच के लिए परेशान रही। -चंपा देवी, देवकली विशुनपुर


मैं इलाज के लिए धूप से बचने के चलते सुबह 8 बजे ही महिला अस्पताल पहुंच गई। डॉक्टरों की देरी की आशंका में पहले एक घंटे इंतजार किया, लेकिन 10 बजे के बाद पूरा चेंबर खाली दिखा। जानकारी लेने पर हड़ताल का पता चला। बाद में एक डॉक्टर आने पर जांच हुई। -बबीता, अलीनगर
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