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जिले के आधे गांवों में नहीं बने सामुदायिक शौचालय

Wed, 25 Aug 2021 11:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 11:38 PM IST
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Community toilets not built in half the villages of the district
मऊ। सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाले स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। जिले के लगभग आधे से अधिक गांवों में सामुदायिक शौचालय बने ही नहीं हैं। जो बने हैं, उनका भी उपयोग नहीं हो रहा है। अधिकांश तो ऐसे हैं जो उपयोग करने योग्य हैं ही नहीं। कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं है। कहीं दरवाजे नहीं हैं, कहीं पानी की सप्लाई नहीं है।
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सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान ग्रामीण के तहत गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं हो रहा है। इन शौचालयों का संचालन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से होना है, कई गांव में समूह सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए आगे नहीं आ रहे है।जिले में कुल सभी 671 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाने जाने हैं। सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पर प्रदेश सरकार का काफी जोर है। पिछली ग्राम पंचायतों के कार्यकाल में भी प्रशासन का इस पर काफी जोर रहा। इनका कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद भी एडीओ पंचायत के देखरेख में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कार्य चलता रहा।
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नई पंचायतों के गठन हो जाने के बाद भी इनके निर्माण पर सरकार का काफी जोर है लेकिन इसके बावजूए सभी गांवों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक लगभग चार सौ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूर्ण होने की कगार पर है। इनमें से महज 328 शौचालयों को हैंड ओवर किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक जो हैंड ओवर कर दिए गए हैं। उनमें भी कई कमियां हैं और वे अभी उपयोग करने योग्य नहीं हैं। अभी 343 गांवों में सामुदायिक शौचालय पूर्णत: अपूर्ण हैं।
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गांवों में बनने वाले सामुदायिक शौचालय तीन श्रेणियों के हैं। छह सीटों वाले शौचालयों की लगात 7.50 लाख है जबकि पांच सीटों वाले शौचालयों की लागत 5.51 लाख रखी गई है। इसके अलावा दो सीटों वाले शौचालय भी बनने हैं जिनकी लागत 3.85 लाख रखी गई है। डीपीआरओ घनश्यान सागर ने बताया कि जो शौचालय पूर्ण हो गए हैं उनके उपयोग के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन कर उन्हें जिम्मेदारी दी गई हैं। कुछ उपयोग किए जा रहे हैं, जो बाकी बचे हैं उनका भी निर्माण कार्य चल रहा है।
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