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बंद हो गई शादी अनुदान योजना
mau news
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:01 AM IST
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प्रतिकात्मक तस्वीर
- फोटो : WondersList
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मऊ। गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी के लिए दशकों से चलाई जा रही शादी अनुदान योजना को प्रदेश सरकार ने बंद कर दिया है। सामान्य वर्ग के गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी अनुदान के लिए तो 85 करोड़ का बजट भी आ गया है। लेकिन अब सरकार ने इस योजना पर ही रोक लगा दी है। इस आशय का शासन का आदेश यहां 11 जुलाई को प्राप्त हो गया था। अब कहा गया है कि गरीब अभिभावकों द्वारा अब ऑनलाइन आवेदन न तो स्वीकार किए जाएंगे और न ही सत्यापन अधिकारियों द्वारा सत्यापित ही किए जाएंगे।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने शासन काल में गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी में सहायता के लिए दस हजार रुपयों का अनुदान देने की योजना चलाई। आगे आने वाली अन्य दलों की सरकारों ने इसे जारी रखा। पिछली अखिलेश यादव की सपा सरकार ने शादी अनुदान की इस राशि को दूना बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया। इस सरकार में इस योजना की सारी प्रकिया ऑनलाइन कर दिया और आवेदनों के सत्यापन से लेकर स्वीकृति तक की समय समय तय कर दिया। सरकार बदलने के बाद भी इस योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया जारी रही। इस योजना के लाभार्थियों के लिए अलग अलग विभागों को जिममेदारी दी गई थी। सामान्य और अनुसूचित जाति जन जाति के अभ्यर्थियों को समाज कल्याण विभाग में आवेदनकरना होता था। इनके लिए बजट समाज कल्याण विभाग में आता था। जबकि ओबीसी के लिए जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी तथा अल्पसंख्यक वर्ग के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय को बजट मिला था और यही विभाग इन अभ्यर्थियों के आवेदन सत्यापन और स्वीकृति से लेकर अनुदान लाभार्थियों के खातों में भेजवाने की व्यवस्था करते थे। नई सरकार के गठन के गठन के बाद भी आवेदक आवेदन करते रहे। सामान्य वर्ग के 813 और एससी एसटी वर्ग के 1363 आवेदकों ने आवेदन किए थे । इनमें कुल 47 आवेदन सत्यापित भी कर दिए गए हैं। ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के भी 657 आवेदकों ने अनुदान के लिए आवेदन कर रखे हैं। लेकिन अब 11 जुलाई को जारी शासन के आदेश के बाद गरीब अभिभावकों की उम्म।ीदों पर पानी फिर गया है।
कोट
शासन ने शादी अनुदान योजना को बंद करने का आदेश जारी किया है। अभी इस योजना के बाबत नई गाइड नहीं आई है। नई गाइड लाइन आने के बाद ही कुछ पता चल सकेगा। अब संभवत: गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की सामूहिक शादियां सरकारअपने खर्चे से कराएगी लेकिन अभी इसबाबत कोई शासनादेश नहीं आया है। मुक्तेश्वर चौबे , जिला समाज कल्याण अधिकारी मऊ
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प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने शासन काल में गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की शादी में सहायता के लिए दस हजार रुपयों का अनुदान देने की योजना चलाई। आगे आने वाली अन्य दलों की सरकारों ने इसे जारी रखा। पिछली अखिलेश यादव की सपा सरकार ने शादी अनुदान की इस राशि को दूना बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया। इस सरकार में इस योजना की सारी प्रकिया ऑनलाइन कर दिया और आवेदनों के सत्यापन से लेकर स्वीकृति तक की समय समय तय कर दिया। सरकार बदलने के बाद भी इस योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया जारी रही। इस योजना के लाभार्थियों के लिए अलग अलग विभागों को जिममेदारी दी गई थी। सामान्य और अनुसूचित जाति जन जाति के अभ्यर्थियों को समाज कल्याण विभाग में आवेदनकरना होता था। इनके लिए बजट समाज कल्याण विभाग में आता था। जबकि ओबीसी के लिए जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी तथा अल्पसंख्यक वर्ग के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय को बजट मिला था और यही विभाग इन अभ्यर्थियों के आवेदन सत्यापन और स्वीकृति से लेकर अनुदान लाभार्थियों के खातों में भेजवाने की व्यवस्था करते थे। नई सरकार के गठन के गठन के बाद भी आवेदक आवेदन करते रहे। सामान्य वर्ग के 813 और एससी एसटी वर्ग के 1363 आवेदकों ने आवेदन किए थे । इनमें कुल 47 आवेदन सत्यापित भी कर दिए गए हैं। ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के भी 657 आवेदकों ने अनुदान के लिए आवेदन कर रखे हैं। लेकिन अब 11 जुलाई को जारी शासन के आदेश के बाद गरीब अभिभावकों की उम्म।ीदों पर पानी फिर गया है।
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कोट
शासन ने शादी अनुदान योजना को बंद करने का आदेश जारी किया है। अभी इस योजना के बाबत नई गाइड नहीं आई है। नई गाइड लाइन आने के बाद ही कुछ पता चल सकेगा। अब संभवत: गरीब अभिभावकों की पुत्रियों की सामूहिक शादियां सरकारअपने खर्चे से कराएगी लेकिन अभी इसबाबत कोई शासनादेश नहीं आया है। मुक्तेश्वर चौबे , जिला समाज कल्याण अधिकारी मऊ
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