{"_id":"584d8f9c4f1c1b763a2c384c","slug":"chilled-in-mau","type":"story","status":"publish","title_hn":"शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:10 PM IST
विज्ञापन
सर्दी का मौसम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में बर्फीली हवाओं के चलने से रविवार को ठंड शीतलहर में तब्दील हो गई। हाड़ कंपाने वाली ठंड से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। रविवार को छुट्टी का दिन होने और सुबह से धुंध छाए रहने के कारण लोग देर तक घरों में दुबके रहे। दिन भर धूप न निकलने से लोग ठिठुरते नजर आए। भीषण ठंड पड़ने के बाद बाद भी जिले के ग्रामीण इलाकों के सार्वजनिक स्थलों पर जिला प्रशासन की ओर से अलाव जलाने की सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। ठंड से निजात पाने के लिए लोग जगह-जगह खुद की व्यवस्था से अलाव जलाते देखे गए। रविवार को न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा।
हाड़ कपाऊं ठंड पडने का सिलसिला जारी रहने से पारा लुढ़कने का क्रम बरकरार है। रविवार की सुबह धुंध छाया रहा। लोग अपने घरों से देर से निकले। सड़कों पर इक्का दुक्का सवारी वाहन चलते देखे गए। दिन भर भगवान भाष्कर का दर्शन नहीं हो सका। शीतलहर के प्रकोप से लोग ठिठुरते रहे। नगर सहित जिले के प्रमुख कस्बा, बाजार, चट्टियों पर हमेशा चहल पहल रहने की जगह शाम होते ही सन्नाटा पसर जा रहा है। ठंड के खौफ से पटरी दूकानदार भी शाम पांच बजते ही अपनी दूकान समेटकर घरों की ओर रवाना हो जा रहे हैं। शाम के समय सवारी वाहनों का संचालन कम होने से लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायतों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख बाजारों तथा नगर पंचायतों में रैन बसेरों का संचालन नहीं किया जा सका है और न ही अलाव की व्यवस्था की जा सकी है।
हालत यह है कि दूर दराज से बाजार आने वाले लोगों को सवारी वाहन न मिलने के चलते लोगों को टैक्सी स्टैंडों पर ही भीषण ठंड के मौसम में रात गुजारनी पड़ रही है। जबकि जिला प्रशासन की ओर से सभी तहसीलों को 50-50 हजार रुपया अलाव के लिए बजट जारी कर दिया गया है। बावजूद सब कुछ कागज पर चल रहा है। स्वयंसेवी संस्थाएं भी उदासीन नजर आ रही हैं। उधर ठंड के बढ़ जाने से दूकानों तथा फुटपाथ पर लगे स्टालों पर गर्म कपड़ों को खरीदने के लिए भीड़ लगी रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाड़ कपाऊं ठंड पडने का सिलसिला जारी रहने से पारा लुढ़कने का क्रम बरकरार है। रविवार की सुबह धुंध छाया रहा। लोग अपने घरों से देर से निकले। सड़कों पर इक्का दुक्का सवारी वाहन चलते देखे गए। दिन भर भगवान भाष्कर का दर्शन नहीं हो सका। शीतलहर के प्रकोप से लोग ठिठुरते रहे। नगर सहित जिले के प्रमुख कस्बा, बाजार, चट्टियों पर हमेशा चहल पहल रहने की जगह शाम होते ही सन्नाटा पसर जा रहा है। ठंड के खौफ से पटरी दूकानदार भी शाम पांच बजते ही अपनी दूकान समेटकर घरों की ओर रवाना हो जा रहे हैं। शाम के समय सवारी वाहनों का संचालन कम होने से लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायतों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख बाजारों तथा नगर पंचायतों में रैन बसेरों का संचालन नहीं किया जा सका है और न ही अलाव की व्यवस्था की जा सकी है।
विज्ञापन
हालत यह है कि दूर दराज से बाजार आने वाले लोगों को सवारी वाहन न मिलने के चलते लोगों को टैक्सी स्टैंडों पर ही भीषण ठंड के मौसम में रात गुजारनी पड़ रही है। जबकि जिला प्रशासन की ओर से सभी तहसीलों को 50-50 हजार रुपया अलाव के लिए बजट जारी कर दिया गया है। बावजूद सब कुछ कागज पर चल रहा है। स्वयंसेवी संस्थाएं भी उदासीन नजर आ रही हैं। उधर ठंड के बढ़ जाने से दूकानों तथा फुटपाथ पर लगे स्टालों पर गर्म कपड़ों को खरीदने के लिए भीड़ लगी रही।
विज्ञापन