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Mau News: मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों की आंखें हो रहीं कमजोर

Thu, 03 Oct 2024 11:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 11:07 PM IST
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Children's eyes are getting weak due to spending too much time on mobile
मऊ। कोरोना संक्रमण काल के बाद से मोबाइल का चलन बढ़ गया है। इसके पीछे ऑनलाइन क्लास, कोचिंग के साथ मौबाइ पर बढ़ा स्क्रीन टाइम है, जाे अब युवाओं के साथ बच्चों की आंखें को कमजोर कर रहा है। स्थिति यह है कि नेत्र चिकित्सकों के यहां पहुंचने वाले दस मरीजों में दो से तीन मरीज मायोपिया नाम की बीमारी मिल रही है।
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डाक्टरों का कहना है कि ऑनलाइन स्टडी के कारण बच्चों को फोन की ऐसी लत लगी है कि उन्होंने आउटडोर एक्टिविटी करीब बंद 0कर दी है। इसका उनकी आंखों पर दिख रहा है। डॉक्टर बताते हैं कि मोवाइल अधिक देर तक और पास से देखने के कारण करीब 60 प्रतिशत तक बच्चों में मायोपिया और एस्टिगमैटिज्म की समस्या है।
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जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. बीपी सिन्हा ने बताया कि उनके यहां पहुंचने वाले दस मरीजों में दो मरीज मायोपिया बीमार से ग्रसित है, जो कि 18 वर्ष से कम हैं। मायोपिया आंखों से संबंधित बीमारी है, जिसमें रोगी की आंख की आई वॉल का आकार बढ़ जाता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं। ओपीडी में आने वाले परिजनों की एक ही शिकायत होती है कि वच्चा स्कूल से आने के वाद तुरंत फोन लेकर बैठ जाता है।
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बताया कि इस समस्या को देखते ही रूल आफ 20 का प्रयोग डाक्टरों द्वारा किया जा रहा है। इसके तहत बीस मिनट मोबाइल चलाने के बाद बीस सेकेंड का ब्रेक, बीस फीट की दूरी देखना है। जिससे मोबाइल से होनी बीमारी से काफी हद तक बचाव सकता है। वहीं निजी चिकित्सक डॉ. एनके सिंह ने बताया कि एस्टिगमैटिज्म ( दृष्टिवैषम्य ) एक प्रकार का अपवर्तक त्रुटि है जो किसी व्यक्ति के कॉर्निया के आकार में अनियमितताओं के कारण होता है। इस स्थिति में, आंख के रेटिना पर रोशनी को समान रूप से केंद्रित करने में विफल हो जाती है जिससे धुंधलापन या विकृत दृष्टि पैदा होती है । यह जन्म के समय मौजूद हो सकता है या जीवन में धीरे-धीरे विकसित हो सकता है। इसके कुछ लक्षण हैं जैसे आंखों में खिंचाव होना, सिर दर्द होना, खारिश महसूस करना और आंखों में जलन का होना। बताया कि एस्टिगमैटिज्म आमतौर पर कॉर्निया के अनियमित आकार के कारण होता है ।
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