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Mau News: घोसी में कर्बला के शहीदों की याद में निकला चेहल्लुम का ताजिया जुलूस
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घोसी में कर्बला के शहीदों की याद में मातम करते शिया समुदाय के लोग ।संवाद
घोसी नगर के बड़ागांव बाजार में बुधवार रात कर्बला के शहीदों की याद में चेहलुम का ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रात करीब आठ बजे इमाम चौक से शुरू होकर भोर में सदर इमामबाड़ा पर संपन्न हुआ। इस दौरान अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और नौहे गूंजते रहे।
जुलूस का शुभारंभ मौलाना शफकत तकी की तकरीर से हुआ। मौलाना तकी ने कर्बला की घटना का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के बलिदान का वर्णन किया। इसे इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया गया।
मौलाना तकी ने अहलेबैत के परिजनों पर हुए अत्याचारों का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उनकी तकरीर सुनकर अज़ादारों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम पेश किया।
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नौहे की गूंज से माहौल हुआ गमगीन
कई अंजुमनों ने दर्दभरे नौहे पेश किए। इनमें अंजुमन तंजीमुल हुसैनी, अंजुमन हुसैनी मिशन और अंजुमन मासूमिया रजिस्टर्ड सहित अन्य अंजुमनें शामिल थीं। इन नौहों के माध्यम से कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।
इस दौरान नौहा पढ़ा गया। अब्बास बावफा का परचम खुला रहेगा। इस नौहे की गूंज से पूरा माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में अजादार और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे, जिन्होंने मातम कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। संवाद
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जुलूस का शुभारंभ मौलाना शफकत तकी की तकरीर से हुआ। मौलाना तकी ने कर्बला की घटना का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के बलिदान का वर्णन किया। इसे इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया गया।
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मौलाना तकी ने अहलेबैत के परिजनों पर हुए अत्याचारों का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उनकी तकरीर सुनकर अज़ादारों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम पेश किया।
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नौहे की गूंज से माहौल हुआ गमगीन
कई अंजुमनों ने दर्दभरे नौहे पेश किए। इनमें अंजुमन तंजीमुल हुसैनी, अंजुमन हुसैनी मिशन और अंजुमन मासूमिया रजिस्टर्ड सहित अन्य अंजुमनें शामिल थीं। इन नौहों के माध्यम से कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।
इस दौरान नौहा पढ़ा गया। अब्बास बावफा का परचम खुला रहेगा। इस नौहे की गूंज से पूरा माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में अजादार और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे, जिन्होंने मातम कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। संवाद