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Mau News: निजी में 75% और सरकारी अस्पतालों में 48% तक सिजेरियन डिलीवरी

Sun, 14 Sep 2025 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Sep 2025 12:56 AM IST
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Caesarean deliveries up to 75% in private and 48% in government hospitals
मऊ। सरकार के लाख प्रयास के बाद भी संस्थागत प्रसव के मामलों में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के रिकाॅर्ड के मुताबिक निजी में 75 फीसदी और सरकारी अस्पतालों में 48 प्रतिशत तक सिजेरियन डिलीवरी हो रही है।
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ज्यादा मुनाफे के लिए निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी अधिक की जा रही है। राहत की बात यह है कि निजी अस्पतालों की तुलना में सामान्य प्रसव सरकारी अस्पताल में अब भी ज्यादा हो रहे हैं। आंकड़ों के हिसाब से शहर के सरकारी अस्पतालों में जहां 33 से 48 प्रतिशत तक सिजेरियन डिलीवरी हो रही है। वहीं निजी अस्पतालों में यह 52 से 65 फीसदी तक बढ़ गया है।
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जिले में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा 52 सरकारी अस्पतालों से केवल जिला महिला अस्पताल के अलावा मुहम्मदाबाद गोहना, फतेहपुर मंडाव और घोसी, दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध है। 80% तक सिजेरियन डिलीवरी निजी नर्सिंग होम में हो रहे हैं। महिला अस्पताल में औसतन लगभग 400 प्रसव में से 55 प्रसव सिजेरियन होते हैं। जबकि जिले भर में हर महीने 3500 से 4000 प्रसव होते हैं।
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जिले भर में लगभग हर महीने 500 से 600 से डिलीवरी सामान्य तरीके से होती है। महिला अस्पताल के आंकड़े पर गौर करें तो हर दसवीं महिला पर सिजेरियन प्रसव का बोझ है।
प्रसव के पूर्व कम से कम चार बार होनी चाहिए जांच : सरकारी गाइडलाइन के अनुसार गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले कम से कम चार बार जांच होनी चाहिए। लेकिन जिले में ऐसा कम हो पा रहा है।
10 प्रतिशत से अधिक महिलाएं प्रसव पूर्व की 4 जांच नहीं करा पाती हैं। चिकित्सक कहते हैं, गर्भावस्था में 4 प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना ही एनीमिया का प्रमुख कारण है। नवजात तो कमजोर होते ही हैं मातृ मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

80 हजार तक खर्च: बड़े निजी अस्पताल में सिजेरियन का चार्ज 50 हजार से अधिक जाता है। अगर नवजात की तबियत बिगड़ी तो चार्ज 80 हजार तक पहुंचता है। वहीं बिना पंजीयन के अस्पताल 30 से 35 हजार में सिजेरियन कराते हैं। सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव 5 हजार से कम में होता है।
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