मऊ। जिले में कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ी बाधा आ सकती है। जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। कोरोना महामारी फैलने की वजह से जिले में रक्त इकट्ठा करने के लिए रक्तदान शिविरों का आयोजन बंद हो गया है। इसके साथ ही अधिक दिन तक रक्त का स्टोरेज नहीं हो पाने की वजह से ब्लड बैंक खाली हो रहे हैं। लॉकडाउन में न तो ब्लड डोनेशन अभियान चल रहा और न ही कोई डोनेट करने पहुंच रहा। ऐसी स्थिति में ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी की बात सामने आ रही। वर्तमान में केवल चार यूनिट ब्लड ही बचा है। इससे किसी आपात स्थिति में निपटने में समस्या आ सकती है। अब इसे विभागी उदासीनता कहें या फिर कोरोना महामारी का असर की, जिले में एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक बरवक्त खाली हो गया है। हॉल यह है कि मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराने के लिए किसी भी ग्रुप के पर्याप्त ब्लड नहीं हैं। ऐसे में लोग मरीजों के परिजन निजी ब्लड बैंक से ब्लड लेने को मजबूर हो रहे हैं। दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए जल्द ही इसके निदान के लिए सोशल डिस्टेसिंग के साथ ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन करने की बात कही जा रही है। ब्लड बैंक में रक्त न होने से थैलीसीमिया के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ब्लड बैंक में थैलीसीमिया के पांच मरीजों को रक्त मुहैैया कराया जाता है। लॉकडाउन से पहले प्रतिमाह से 70 यूनिट से अधिक रक्त रहता था। कम यूनिट रक्त होने के चलते गर्भवती महिला, कैंसर, प्लास्टिकएनीमिया, लवारिश मरीज, कैदी, को भी काफी परेशानी हो रही है। दरअसल इन्हें नि:शुक्ल ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि कोरोना वायरस तथा लॉकडाउन के चलते डोनेशन न होने से समस्या है। संगठनों की मदद से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए डोनेशन शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिससे ब्लड बैंक में हुई ब्लड की कमी दूर की जा सके।