{"_id":"57ffc77f4f1c1bc67b28fd1e","slug":"bharatmilap","type":"story","status":"publish","title_hn":"परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपा सिंधु उर लाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपा सिंधु उर लाए
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:12 PM IST
विज्ञापन
नगर क्षेत्र के शाही कटरा के मैदान में आयोजित भरत मिलाप में मिलाप के बाद राम,लक्ष्मण,भरत,शत्रुघन,सीता और हनुमान।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर क्षेत्र में शाही कटरा मस्जिद के परिसर में गुरुवार की भोर में परंपरागत तरीके से राम-रहीम के बाद राम और भरत का मिलाप हुआ। इस कार्यक्रम के संपन्न होते ही एक बार फिर से 600 वर्ष से अधिक पुरानी सौहार्द की परंपरा नगर में कायम रही। भरत मिलाप सकुशल संपन्न होने पर प्रशासन ने दोनों समुुदायों को बधाई दी।
भरत मिलाप का कार्यक्रम बुधवार की रात से शुरू हो गया था। 14 वर्ष के वनवास को पूरा करने के बाद प्रभु श्री राम माता सीता और लखन लाल के संग वापस अयोध्या को चले। इस दौरान उनका रथ रात नौ बजे से शीतला धाम से शाहीकटरा के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में प्रभु के स्वागत को पूरी जनता उमड़ पड़ी।
इस कारण पुष्पक विमान के अयोध्या पहुंचने में दे होने लगी। तभी प्रभु श्री राम को याद आया कि यदि भोर से पहले वो अयोध्या नहीं पहुंचे तो उनके भाई भरत अपने संकल्प के अनुसार प्राण त्याग देंगे। इस पर प्रभु ने अपने दूत के रूप में भक्त हनुमान को अयोध्या भेजा। ताकि वो भरत को संदेश दे दें कि वो वापस आ रहे हैं।
विज्ञापन
क्योंकि हनुमान ही ऐसे थे जो पवन के वेग से अयोध्या पहुंच सकते थे। पौ फटने वाला था, हनुमान अयोध्या पहुंचे, इस दौरान भरत का विलाप सुनकर वो विह्वल हो गए। साथ ही उन्होंने प्रभु के आने का संदेश भरत को दिया। इस दौरान भरत हनुमान का संवाद बहुत ही मोहक रहा। जैसे ही भरत को पता चला कि संदेश वाहक राम का दूत है, वो उससे लिपटकर रोने लगते है।
इसी बीच प्रभु का विमान पहुंचता है। फिर भरत के साथ शत्रुघ्न और लक्ष्मण का मिलन होता है। चारों भाई के मिलते ही उमड़ी भीड़ उनके पूजन-अर्चन में जुट गई। इसके बाद आरती के साथ स्वागत आदि का कार्यक्रम शुरू हुआ। इस समय सुबह के सात बज चुके थे।
वहीं घोसी के कस्बा बाजार में चल रही रामलीला के 13वें दिन भरत मिलाप का आयोजन किया गया। राम और भरत के मिलाप के दृश्य देेखकर लोग भाव विह्वल हो गए। जयश्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। अमिला में श्री ठाकुरद्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में भरत मिलाप की लीला हुई
विज्ञापन
भरत मिलाप का कार्यक्रम बुधवार की रात से शुरू हो गया था। 14 वर्ष के वनवास को पूरा करने के बाद प्रभु श्री राम माता सीता और लखन लाल के संग वापस अयोध्या को चले। इस दौरान उनका रथ रात नौ बजे से शीतला धाम से शाहीकटरा के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में प्रभु के स्वागत को पूरी जनता उमड़ पड़ी।
विज्ञापन
इस कारण पुष्पक विमान के अयोध्या पहुंचने में दे होने लगी। तभी प्रभु श्री राम को याद आया कि यदि भोर से पहले वो अयोध्या नहीं पहुंचे तो उनके भाई भरत अपने संकल्प के अनुसार प्राण त्याग देंगे। इस पर प्रभु ने अपने दूत के रूप में भक्त हनुमान को अयोध्या भेजा। ताकि वो भरत को संदेश दे दें कि वो वापस आ रहे हैं।
विज्ञापन
क्योंकि हनुमान ही ऐसे थे जो पवन के वेग से अयोध्या पहुंच सकते थे। पौ फटने वाला था, हनुमान अयोध्या पहुंचे, इस दौरान भरत का विलाप सुनकर वो विह्वल हो गए। साथ ही उन्होंने प्रभु के आने का संदेश भरत को दिया। इस दौरान भरत हनुमान का संवाद बहुत ही मोहक रहा। जैसे ही भरत को पता चला कि संदेश वाहक राम का दूत है, वो उससे लिपटकर रोने लगते है।
इसी बीच प्रभु का विमान पहुंचता है। फिर भरत के साथ शत्रुघ्न और लक्ष्मण का मिलन होता है। चारों भाई के मिलते ही उमड़ी भीड़ उनके पूजन-अर्चन में जुट गई। इसके बाद आरती के साथ स्वागत आदि का कार्यक्रम शुरू हुआ। इस समय सुबह के सात बज चुके थे।
वहीं घोसी के कस्बा बाजार में चल रही रामलीला के 13वें दिन भरत मिलाप का आयोजन किया गया। राम और भरत के मिलाप के दृश्य देेखकर लोग भाव विह्वल हो गए। जयश्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। अमिला में श्री ठाकुरद्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में भरत मिलाप की लीला हुई