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औपचारिकताएं पूरी करने में ही बीत जाएंगी शादी
ब्यूरो,अमर उजाला,मऊ
Updated Wed, 23 Nov 2016 10:36 PM IST
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शादी वाले परिवारों को ढाई लाख रुपये के भुगतान की केंद्र सरकार की घोषणा के सात दिनों के बाद मंगलवार को बैंकों को रिजर्व बैंक आफ इंडिया का आदेश मिला। आरबीआई के आदेश में दी गई कठिन शर्तों को शादी वाले सभी परिवार आसानी से पूरी नहीं कर पाएंगे। कई शर्तें तो ऐसी हैं कि उन्हें पूरी करते करते शादी की तिथि बीत जाएगी। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी रुपये न होने की बात सुनकर बैंकों से बैरंग लौटना पड़ रहा है।
आरबीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देश में उल्लिखित है कि शादी के लिए ढाई लाख रुपये अपने बैंक एकाउंट से एक मुश्त पाने के लिए शादी वाले परिवार यानी दूल्हे या दुल्हन का स्वयं का अथवा उनके पिता, मां या में से किसी एक का बैंक खाता होना अनिवार्य है। छपा हुआ शादी कार्ड होना चाहिए। जहां पर शादी होनी है उस शादी घर की बुकिंग, कैटरर और टेंट की बुकिंग की रसीद, शादी की पुष्टि के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान की रसीद दिखाना जरूरी है। इसके साथ यह भी जुड़ा है कि नोटबंदी की घोषणा यानी आठ नवंबर से पहले बैंक में पर्याप्त बैलेंस होना अनिवार्य है। शादी में प्रयुक्त होने वाले हर सामान की रसीद पहले ही कैसे लोग ले सकते हैं।
विवाह में खर्च होने वाले दो लाख पचास हजार के का पूरा ब्यौरा रसीद के साथ देना होगा। इसके अतिरिक्त आवेदक को हलफनामा देना होगा कि उसका पूरे देश में कहीं भी किसी अन्य बैंक में खाता नहीं है। इस बाबत पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल कहते हैं कि बहुत से ऐसे सामान होते हैं जो शादी के समय तक खरीदे जाते हैं।
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शादी वाले परिवार के लोग अपनी तैयारी में समय लगाएं कि कागजात तैयार करने में। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निम्न आय वर्ग अथवा मध्यम आय वाले सभी परिवार शादीघर में ही अपने बेटे बेटियों के विवाह करते हैं। इसी प्रकार किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि हर किसान मैरेज हाल में ही शादी नहीं करता और न ही कैटरर उसके यहां बुक किए जाते हैं।
शादी विवाह में ढाई लाख रुपये खर्च होना वर्तमान महंगाई के दौर में कोई बड़ी बात नहीं है, जिसके लिए इतनी बंदिशें लगाई गई हैं जो अव्यवहारिक हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति कहते हैं कि एक तो नोटबंदी ही अनुचित समय और बिना पर्याप्त तैयारी के की गई है और दूसरे आरबीआई की शर्तें पूरी तरह अव्यवहारिक हैं।
शादी के लिए ढाई लाख की रकम अपने बैंक खाते से निकालने वाले लोग कालाधन रखने वाले नहीं हो सकते। अधिवक्ता शिवनारायण राय कहते हैं कि इतनी सारी औपचारिकताएं पूरी करने में ही काफी नजदीक की शादी वाली तिथियां ही बीत जाएंगी। उनका कहना है कि इतनी कठिन शर्तों में कुछ व्यवहारिकता लाते हुए ढील दी जानी चाहिए।
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आरबीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देश में उल्लिखित है कि शादी के लिए ढाई लाख रुपये अपने बैंक एकाउंट से एक मुश्त पाने के लिए शादी वाले परिवार यानी दूल्हे या दुल्हन का स्वयं का अथवा उनके पिता, मां या में से किसी एक का बैंक खाता होना अनिवार्य है। छपा हुआ शादी कार्ड होना चाहिए। जहां पर शादी होनी है उस शादी घर की बुकिंग, कैटरर और टेंट की बुकिंग की रसीद, शादी की पुष्टि के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान की रसीद दिखाना जरूरी है। इसके साथ यह भी जुड़ा है कि नोटबंदी की घोषणा यानी आठ नवंबर से पहले बैंक में पर्याप्त बैलेंस होना अनिवार्य है। शादी में प्रयुक्त होने वाले हर सामान की रसीद पहले ही कैसे लोग ले सकते हैं।
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विवाह में खर्च होने वाले दो लाख पचास हजार के का पूरा ब्यौरा रसीद के साथ देना होगा। इसके अतिरिक्त आवेदक को हलफनामा देना होगा कि उसका पूरे देश में कहीं भी किसी अन्य बैंक में खाता नहीं है। इस बाबत पूर्व पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल कहते हैं कि बहुत से ऐसे सामान होते हैं जो शादी के समय तक खरीदे जाते हैं।
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शादी वाले परिवार के लोग अपनी तैयारी में समय लगाएं कि कागजात तैयार करने में। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निम्न आय वर्ग अथवा मध्यम आय वाले सभी परिवार शादीघर में ही अपने बेटे बेटियों के विवाह करते हैं। इसी प्रकार किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि हर किसान मैरेज हाल में ही शादी नहीं करता और न ही कैटरर उसके यहां बुक किए जाते हैं।
शादी विवाह में ढाई लाख रुपये खर्च होना वर्तमान महंगाई के दौर में कोई बड़ी बात नहीं है, जिसके लिए इतनी बंदिशें लगाई गई हैं जो अव्यवहारिक हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति कहते हैं कि एक तो नोटबंदी ही अनुचित समय और बिना पर्याप्त तैयारी के की गई है और दूसरे आरबीआई की शर्तें पूरी तरह अव्यवहारिक हैं।
शादी के लिए ढाई लाख की रकम अपने बैंक खाते से निकालने वाले लोग कालाधन रखने वाले नहीं हो सकते। अधिवक्ता शिवनारायण राय कहते हैं कि इतनी सारी औपचारिकताएं पूरी करने में ही काफी नजदीक की शादी वाली तिथियां ही बीत जाएंगी। उनका कहना है कि इतनी कठिन शर्तों में कुछ व्यवहारिकता लाते हुए ढील दी जानी चाहिए।