घोसी। नगर के कस्बाबाजार निवासी अल्लामा बदरुल कादरी मिस्बाही जो कि हालैंड के हेग शहर में 1978 से रहकर इस्लामिक एकेडमिक स्थापित कर इस्लाम की शिक्षा दे रहे थे। बुधवार की रात उनके मृत शरीर के घोसी स्थित आवास पर आने के बाद उनके अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों का तांता बृहस्पतिवार की सुबह तक लगा रहा। हजारों चाहने वालों के बीच उनकी मृत शरीर को कस्बा बाजार मालिकटोला स्थित उनके द्वारा स्थापित मदरसा रिजीविया बदरुल उलूम में बृहस्पतिवार को मुस्लिम धार्मिक रीतिरिवाज के अनुसार सुपुर्दे खाक किया गया। जनाजे नमाज उनके पुत्र और उत्तराधिकारी हसनैन बद्र क़ादरी द्वारा पढ़ा गया।
लेखक और कवि अल्लामा बदरुल कादरी का जन्म 1950 में घोसी नगर के कस्बाबाजार मालिकटोला में हुआ था। इनके पिता स्व. हाफिज मोहम्मद रहमान और माता स्व. जाहिरा कादरी थे। आप की प्रारंभिक शिक्षा घोसी नगर स्थित मदरसा खैरिया फैजे आम में हुई थी। बाद की शिक्षा मुबारकपुर स्थित प्रसिद्ध मदरसा अशरफिया में हुआ था।1978 में हालैंड के हेग शहर में जाकर इस्लामिक एकेडमिक स्थापित कर इस्लाम धर्म की शिक्षा के प्रचार प्रसार में लग गए। आपने कस्बाबाजार में मदरसा रिजीविया बदरुल उलूम की स्थापना किया। इनके द्वारा100से अधिक पुस्तकें लिखी गई। जिनमे से बज्मे औलिया, हयात और कारनामे, मुसलमान और हिंदुस्तान, आदि प्रमुख रही। आप अंतिम बार अक्तूबर 2017 में घोसी कस्बाबाजार आए थे।