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Mau News: डाटा मिसमैच होने से आवेदन में निरस्त हो जा रहे आयुष्मान कार्ड
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आयुष्मान कार्ड के आवेदन में छोटी सी गलती से कार्ड निरस्त हो जा रहे है। ऐसे में कार्ड बनवाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कार्ड के आवेदन में त्रुटि पाए जाने पर जनपद स्तर पर सुधार का कोई प्रावधान नहीं है। राज्य स्तर पर चयनित एजेंसी को ही कार्ड के आवेदन को स्वीकार करने व निरस्त करने का अधिकार है।
आयुष्मान कार्ड के आवेदन के दौरान आधार कार्ड और पात्रता सूची में नाम का उसके स्पेलिंग में अंतर होने से पात्रों के कार्ड नहीं बन पा रहे है। एक बार आवेदन निरस्त होने पर लाभार्थी कई प्रक्रियाओं के गुजरने के बाद भी महीनों भटकने के लिए विवश हैं। एक बाद आवेदन करने के बाद जब वह निरस्त हो जाता है, इसके बाद दूसरा आवेदन नहीं हो पाता है। लंबे समय से इसको लेकर शासन स्तर से सुधार के लिए कोई पहल नहीं की गई है। वहीं दूसरी तरफ लोग आयुष्मान कार्ड में संशोधन कराने से हिचकते हैं, कारण है कि वह आधार कार्ड कई अन्य जगहों पर लगा रहता है।
दरअसल किसी भी कार्ड धारक को इलाज कराने के लिए सबसे पहले राशन कार्ड देना होता है, जब अस्पताल कार्ड के पात्रता की जांच करता है कार्ड धारक को वह दस्तावेज भी देना होता है, जिसके आधार पर उसका कार्ड बना होता है।
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डाटा डुप्लीकेट होना भी परेशानी
नाम का मिसमैच होने के बाद दूसरी समस्या डाटा के डुप्लीकेट होने का भी है। शासन की तरफ से अभी तक जितनी पात्रता का निर्धारण किया गया है। उसमें पात्रों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। पात्रता की एक श्रेणी में कार्ड बनने के बाद भी दूसरी श्रेणी में उसका कार्ड नहीं बनना दर्शा रहा है। हालांकि ऐसे लोगों को उपचार मिलने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन जनपद में ऐसे लोगों को पात्रता होने के बाद भी कार्ड नहीं बन पाना दर्शा रहा है। आंकड़ों के अनुसार जनपद में डाटा डुप्लीकेट होने वालों की संख्या करीब एक लाख है।
आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य - 7.82 लाख
अभी तक बने- 6.83 लाख
कितने को मिला लाभ- 52 हजार
उपचार में खर्च धनराशि - 50.09 करोड़
जुलाई में मिला लाभ- 1071 मरीज
योजना से जुड़े निजी अस्पताल - 28
योजना से जुड़े सरकारी अस्पताल - 26
पात्रता सूची के दस्तावेज और आधार कार्ड में नाम मिसमैच होने से आवेदन में परेशानी हो रही है। इसके लिए शासन से तय एजेंसी को पत्र लिखा गया है। कोई जवाब मिलने के बाद ऐसे सभी पात्रों का आवेदन करा कार्ड बनाने की कोशिश की जाएगी।-डॉ. राहुल सिंह, सीएमओ
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आयुष्मान कार्ड के आवेदन के दौरान आधार कार्ड और पात्रता सूची में नाम का उसके स्पेलिंग में अंतर होने से पात्रों के कार्ड नहीं बन पा रहे है। एक बार आवेदन निरस्त होने पर लाभार्थी कई प्रक्रियाओं के गुजरने के बाद भी महीनों भटकने के लिए विवश हैं। एक बाद आवेदन करने के बाद जब वह निरस्त हो जाता है, इसके बाद दूसरा आवेदन नहीं हो पाता है। लंबे समय से इसको लेकर शासन स्तर से सुधार के लिए कोई पहल नहीं की गई है। वहीं दूसरी तरफ लोग आयुष्मान कार्ड में संशोधन कराने से हिचकते हैं, कारण है कि वह आधार कार्ड कई अन्य जगहों पर लगा रहता है।
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दरअसल किसी भी कार्ड धारक को इलाज कराने के लिए सबसे पहले राशन कार्ड देना होता है, जब अस्पताल कार्ड के पात्रता की जांच करता है कार्ड धारक को वह दस्तावेज भी देना होता है, जिसके आधार पर उसका कार्ड बना होता है।
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डाटा डुप्लीकेट होना भी परेशानी
नाम का मिसमैच होने के बाद दूसरी समस्या डाटा के डुप्लीकेट होने का भी है। शासन की तरफ से अभी तक जितनी पात्रता का निर्धारण किया गया है। उसमें पात्रों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। पात्रता की एक श्रेणी में कार्ड बनने के बाद भी दूसरी श्रेणी में उसका कार्ड नहीं बनना दर्शा रहा है। हालांकि ऐसे लोगों को उपचार मिलने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन जनपद में ऐसे लोगों को पात्रता होने के बाद भी कार्ड नहीं बन पाना दर्शा रहा है। आंकड़ों के अनुसार जनपद में डाटा डुप्लीकेट होने वालों की संख्या करीब एक लाख है।
आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य - 7.82 लाख
अभी तक बने- 6.83 लाख
कितने को मिला लाभ- 52 हजार
उपचार में खर्च धनराशि - 50.09 करोड़
जुलाई में मिला लाभ- 1071 मरीज
योजना से जुड़े निजी अस्पताल - 28
योजना से जुड़े सरकारी अस्पताल - 26
पात्रता सूची के दस्तावेज और आधार कार्ड में नाम मिसमैच होने से आवेदन में परेशानी हो रही है। इसके लिए शासन से तय एजेंसी को पत्र लिखा गया है। कोई जवाब मिलने के बाद ऐसे सभी पात्रों का आवेदन करा कार्ड बनाने की कोशिश की जाएगी।-डॉ. राहुल सिंह, सीएमओ