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जर्जर भवन में संचालित हो रहे आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पताल
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मऊ। कोरोना संक्रमण काल में आयुर्वेद की तरफ लोगों का रुझान बढ़ रहा है। जिले के आयुर्वेदिक तथा युनानी अस्पतालों में ओपीडी 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। लेकिन इन अस्पतालों की दशा संसाधनों के मामले में दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। जिले के आठ सरकारी भवन जिसमें अस्पताल संचालित हो रहा है, वो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी अंदर जाने से कतराते हैं। जिले के इन 35 अस्पतालों में सृजित पदों के सापेक्ष न तो डॉक्टर तैनात हैं और न ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। अधिकांश अस्पताल तो किराए के भवन और ग्रामपंचायतों की अनुकंपा पर मिले भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
जिले के करीब 25 लाख की आबादी पर जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में आयुर्वेद के29 तथा यूनानी के छह अस्पताल हैं। कोरोना संक्रमण काल में आयुर्वेद की तरफ लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। पहले जहां आयुर्वेदिक अस्पतालों में 30 मरीजों की ओपीडी होती थी। अब 50 प्रतिशत बढ़ गई है। यानि जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में तीन हजार मरीज प्रतिदिन इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद इन अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है। हालत यह है कि जर्जर भवन में अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें कसारा, अमिला, कमलसागर, डुमरांव, गोकुलपुरा सहित आठ अस्पताल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। सबसे बदतर हालत तो अमिला तथा कसारा में संचालित अस्पताल भवन का है। यहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी किसी अनहोनी घटना के डर से भवन के बजाए बाहर परिसर में मरीज को देखते हैं। जर्जर भवनों में अस्पताल संचालित होने से मरीज भी यहां इलाज कराने से कन्नी काटते हैं। इसके अलावा इन अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी भी बड़ी समस्या है। 29 आयुर्वेद अस्पतालों में 31 चिकित्सकों के सापेक्ष केवल 15चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि छह यूूनानी चिकित्सक के सापेक्ष तीन चिकित्सक है। यानि तीन यूनानी चिकित्सक बिना चिकित्सक तथा कई आयुर्वेद अस्पताल चिकित्सक विहिन है। यहीं नहीं इन अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी है।
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किराए के भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल
मऊ। आयुर्वेद के 29 अस्पताल में केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवनमें संचालित हो रहा है, बाकी किराए के भवन में।इसका उदाहरण नगर के पुरानीतहसील स्थित जिला आयुर्वेदिक चिकित्सालय से समझा जा सकता है।इस अस्पताल में दो के सापेक्ष एक चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। मीटिंग में जाने या अवकाश लेने की स्थिति में फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन होता है। संसाधनों के अभाव मेें मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है।
प्रचार प्रसार हो तो बढ़ेगी ओपीडी
मऊ। संक्रमण काल में लोगों में आयुर्वेद को लेकर काफी विश्वास बढ़ा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन विभाग की तरफ से आयुर्वेद विधा का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार कराया जाए तो आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में ओपीडी मेें भारी वृद्धि हो सकती है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. जयराम यादव का कहना था कि संक्रमण के रोकथाम में आयुर्वेद को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा है। आयुर्वेद अस्पतालों में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक मरीज उपचार कराने पहुंच रहे है। पहले से यह संख्या करीब 50 फीसदी से ज्यादा है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद रिक्त हो गए हैं। जर्जर भवनों को चिंहित कर उसकी सूची शासन को भेजी जा चुकी है।
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जिले के करीब 25 लाख की आबादी पर जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में आयुर्वेद के29 तथा यूनानी के छह अस्पताल हैं। कोरोना संक्रमण काल में आयुर्वेद की तरफ लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। पहले जहां आयुर्वेदिक अस्पतालों में 30 मरीजों की ओपीडी होती थी। अब 50 प्रतिशत बढ़ गई है। यानि जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में तीन हजार मरीज प्रतिदिन इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद इन अस्पतालों में संसाधनों का अभाव है। हालत यह है कि जर्जर भवन में अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
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केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें कसारा, अमिला, कमलसागर, डुमरांव, गोकुलपुरा सहित आठ अस्पताल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। सबसे बदतर हालत तो अमिला तथा कसारा में संचालित अस्पताल भवन का है। यहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी किसी अनहोनी घटना के डर से भवन के बजाए बाहर परिसर में मरीज को देखते हैं। जर्जर भवनों में अस्पताल संचालित होने से मरीज भी यहां इलाज कराने से कन्नी काटते हैं। इसके अलावा इन अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी भी बड़ी समस्या है। 29 आयुर्वेद अस्पतालों में 31 चिकित्सकों के सापेक्ष केवल 15चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि छह यूूनानी चिकित्सक के सापेक्ष तीन चिकित्सक है। यानि तीन यूनानी चिकित्सक बिना चिकित्सक तथा कई आयुर्वेद अस्पताल चिकित्सक विहिन है। यहीं नहीं इन अस्पतालों में संसाधनों की भारी कमी है।
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किराए के भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल
मऊ। आयुर्वेद के 29 अस्पताल में केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवनमें संचालित हो रहा है, बाकी किराए के भवन में।इसका उदाहरण नगर के पुरानीतहसील स्थित जिला आयुर्वेदिक चिकित्सालय से समझा जा सकता है।इस अस्पताल में दो के सापेक्ष एक चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। मीटिंग में जाने या अवकाश लेने की स्थिति में फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन होता है। संसाधनों के अभाव मेें मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है।
प्रचार प्रसार हो तो बढ़ेगी ओपीडी
मऊ। संक्रमण काल में लोगों में आयुर्वेद को लेकर काफी विश्वास बढ़ा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन विभाग की तरफ से आयुर्वेद विधा का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार कराया जाए तो आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में ओपीडी मेें भारी वृद्धि हो सकती है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. जयराम यादव का कहना था कि संक्रमण के रोकथाम में आयुर्वेद को लेकर लोगों में विश्वास बढ़ा है। आयुर्वेद अस्पतालों में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक मरीज उपचार कराने पहुंच रहे है। पहले से यह संख्या करीब 50 फीसदी से ज्यादा है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद रिक्त हो गए हैं। जर्जर भवनों को चिंहित कर उसकी सूची शासन को भेजी जा चुकी है।