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शाम होते ही दीपों की जगमहागट से सज गया घर के साथ शहर और क्षेत्र

Sat, 14 Nov 2020 07:56 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Nov 2020 07:56 PM IST
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As soon as evening, the city and the area along with the house was decorated with the glow of the lamp
दीपावली पर नगर के गाजीपुर तिराहा पर प्रतिष्ठान के बाहर दीया सजाते कर्मचारी। - फोटो : MAU
मऊ। दीपावली पर्व के अवसर पर शनिवार को लोग घरों में गणेश-लक्ष्मी पूजन की तैयारी में जुटे रहें, इस दौरान खासतौर से महिलाएं सुबह से ही घरों की सफाई में लगीं रहीं। परंपरा और क्षेत्र के रिति रिवाज को पूरा करने में महिलाओं का समय बीता, इस दौरान शाम होते ही दीपों की रोशनी से लोगों का घर, शहर और पूरा क्षेत्र नहाया दिखा। बड़े-बड़े भवनों पर दीपक की बजाय झालरों की सजावट घरों की शोभा बढ़ा रहे थे।
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में गृहिणियां दीपावली के दिन अपने-रीति रिवाजों के अनुसार घरों की दहलीज से मंदिर और तिजोरी तक लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी में जुटी रहीं, तब शाम को हुई महालक्ष्मी की पूजा। कहीं गेरु की पृष्ठभूमि में चावल की पीठी से छोटे-छोटे पांव छपे तो कहीं सीधे फर्श पर र्रूई से लक्ष्मीजी का मार्ग सुशोभित किया गया। मान्यता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी जी घरों में आकर विराजती हैं। घर के बाहर स्वास्तिक के चिह्न बनाने की भी परंपरा है। इसी मान्यता के तहत दीपावली के अवसर पर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में पटाखों की धमक, आतिशबाजी की चमक और बाजार की खरीदारी की होड़ के बीच गृहिणियां लक्ष्मी जी के स्वागत की रस्में भी बराबर निभाती रहीं। कई स्थानों पर तो अच्छी रंगोली बनाने की होड़ लगी रही।
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बढुआगोदाम बाजार निवासी सुनीता सिंह का कहना था कि दीपावली पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है। हर साल दीपावली पर घर में रंगोली सजाती हूं। इसका एक अलग ही विशेष अहसास है। दीपावली के त्योहार पर जहां घरों की साफ सफाई करके घर में बने मंदिर को मां की पूजा के लिए सजाया जाता है। वहीं मां के स्वागत के लिए वह हर साल विशेष रूप से रंगोली बनाती हूं। यह रंगोली दीपावली पर घर में आने वाले मेहमानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनती है। खरीदारी करने रौजा बाजार आईं मंजू देवी का कहना था कि शादी से पहले बचपन से ही घर में रंगोली बनाती आई हूं। कई वर्ष से हाथ जोड़े महिलाओं की तस्वीर और दीप की रंगोली बना रही हूं। कहा कि दीपावली ही ऐसा त्योहार है, जब रंगोली सही मायने में आकर्षित लगती है।
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अपने अपने तरीके से लोगों ने की गणेश-लक्ष्मी की पूजा
मऊ। दीपावली पर्व पर हर घरों में लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है, इस दौरान लोगों ने अपने अपने तरीके और सामर्थय के हिसाब से पूजा किया। इसमें लोग अपने सामर्थ के अनुसार घरों की सजावट आदि किए। किसी ने सिर्फ लड्डू चढ़ाकर पूूजा किया। तो किसी ने पूजा स्थल पर केले के पेड़ आदि लगाकर सजावट किया था। धनतेरस पर खरीदे गए सामनों को पूजा स्थल पर रखकर पूजा की गई।
देव स्थलों पर भी किया गया दीप दान
मऊ। दीपावली के अवसर पर लोगों ने अपने घरों में दीपक जलाने के बाद देव स्थलों पर भी दीप जलाया। इस दौरान शीतला धाम, पुराना हनुमान मंदिर, दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर, कैलाशपुरी मंदिर, आजमगढ़ मोड़ स्थित दुर्गा माता मंदिर, काली मंदिर सहित अन्य मंदिर दीपो से नहा उठे।

काली जी का फोटो रख किया स्थापना
मऊ। कोरोना संक्रमण के चलते दीपावली के अवसर पर प्रतिमा स्थापित नहीं की गई। लेकिन परंपरा को पूरा करने के लिए सहादतपुरा मुहल्ले में पूजा समिति ने काली जी की फोटो रखकर स्थापना किया। इस दौरान पूजा समिति के लोगों का कहना था, कि कोरोना संक्रमणकाल के चलते प्रतिमा स्थापित नहीं किए। लेकिन फोटो इस लिए रखा गया, कि परंपरा न टूटे। पूजा समिति के लोगों ने बकायदा टेंट का पंडाल सजाकर उसमें काली जी की प्रतिमा स्थापित किया था।
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