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दर्जन भर पुरवे में पानी के घेरे में
mau news
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:03 AM IST
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दोहरीघाट में बढ़ता घाघरा नदी का जलस्तर।
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दोहरीघाट /दुबारी। घाघरा का जल स्तर स्थिर रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने का क्रम जारी है। नवली बंधे के समीप तथा शवदाह घाट के पास कटान तेज हो गई है। नदी के उग्र तेवर से तटवर्ती इलाकों सहित कस्बे के धार्मिक धरोहरों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। कटान पीड़ितों की लाख गुहार के बाद भी बोल्डर गिराने की जहमत तक नहीं उठाई जा सकी है। उधर मधुबन तहसील के देवारा के दर्जन पुरवे पानी के घेरे में आ जाने से बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। लेकिन प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
घाघरा द्वारा बार-बार कहर ढाने के बावजूद प्रशासन मामले को हल्के में ले रहा है। घाघरा का जलस्तर गुरुवार को स्थित रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने का क्रम जारी है। नदी खतरे के निशान े 20 सेमी ऊपर बह रही है।जिससे तटवर्ती इलाकों के लोग नदी के रुख को लेकर दहशत में जी रहे हैं। नवली गांव के रिंग बंधे से सौ मीटर बने स्पर के समीप कटान तेज हो रही थी। गुुुुरुवार को करीब पांच बिस्वा उपजाऊं भूमि नदी की धारा में विलीन हो गया। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो गुुुरुवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। बुधवार को 70.10 मीटर रहा। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है। मधुबन के हाहा नाला पर नदी का जलस्तर गुरुवार को 65.63मीटर रहा। बुधवार को 65.60मीटर रहा। जबकि खतरा का निशान 66.31मीटर है।
चिऊटीडाड़ रिंग बंधे पर नदी ने अपना दबाव वनाना शुरू कर दिया है। इधर बन्धे के नीचे की सैकड़ों एकड़ फसल चिऊटीडाड़ से लेकर रामपुर धनौली के समीप की बाढ के पानी में डूब गई है। किसानों को फसल नष्ट होने की चिंता सताने लगी है। मधुबन तहसील के देवारा इलाकों में घाघरा जलस्तर ज्यों-ज्यो बढता जा रहा है त्यो-त्यो बाढपीड़ितों की परेशानी बढती ही जा रही है।दर्जनों पुरवा पानी के घेरे में आने से इलाका जलमग्न हो गया है। कहीं पशु चारा लाने की समस्या तो कही गांव से निकलना मुश्किल हो गया है। चक्की मुसाडोही, चौहानपुर, परसिया का पुरवा भटोली, बरोहा, गजियापुर छावनी, भगत का पुरा, विशुन का पुरा खैरा, बइरकंटा, बिंटोलिया, नईबस्ती जरलहवा सहित विभिन्न इलाकों में चारे का संकट बढ़ गया है। लेकिन अभी तक प्रशासन की तरु से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।राधाकृष्ण मंदिर के पास पुलिया टूटने से संपर्क मार्ग डूब गए हैं। प्राथमिक विद्यालय खैरा का संपर्क मार्ग टूटने से बच्चों को विद्यालय जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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घाघरा द्वारा बार-बार कहर ढाने के बावजूद प्रशासन मामले को हल्के में ले रहा है। घाघरा का जलस्तर गुरुवार को स्थित रहने के बाद भी नदी के कहर बरपाने का क्रम जारी है। नदी खतरे के निशान े 20 सेमी ऊपर बह रही है।जिससे तटवर्ती इलाकों के लोग नदी के रुख को लेकर दहशत में जी रहे हैं। नवली गांव के रिंग बंधे से सौ मीटर बने स्पर के समीप कटान तेज हो रही थी। गुुुुरुवार को करीब पांच बिस्वा उपजाऊं भूमि नदी की धारा में विलीन हो गया। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो गुुुरुवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। बुधवार को 70.10 मीटर रहा। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है। मधुबन के हाहा नाला पर नदी का जलस्तर गुरुवार को 65.63मीटर रहा। बुधवार को 65.60मीटर रहा। जबकि खतरा का निशान 66.31मीटर है।
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चिऊटीडाड़ रिंग बंधे पर नदी ने अपना दबाव वनाना शुरू कर दिया है। इधर बन्धे के नीचे की सैकड़ों एकड़ फसल चिऊटीडाड़ से लेकर रामपुर धनौली के समीप की बाढ के पानी में डूब गई है। किसानों को फसल नष्ट होने की चिंता सताने लगी है। मधुबन तहसील के देवारा इलाकों में घाघरा जलस्तर ज्यों-ज्यो बढता जा रहा है त्यो-त्यो बाढपीड़ितों की परेशानी बढती ही जा रही है।दर्जनों पुरवा पानी के घेरे में आने से इलाका जलमग्न हो गया है। कहीं पशु चारा लाने की समस्या तो कही गांव से निकलना मुश्किल हो गया है। चक्की मुसाडोही, चौहानपुर, परसिया का पुरवा भटोली, बरोहा, गजियापुर छावनी, भगत का पुरा, विशुन का पुरा खैरा, बइरकंटा, बिंटोलिया, नईबस्ती जरलहवा सहित विभिन्न इलाकों में चारे का संकट बढ़ गया है। लेकिन अभी तक प्रशासन की तरु से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।राधाकृष्ण मंदिर के पास पुलिया टूटने से संपर्क मार्ग डूब गए हैं। प्राथमिक विद्यालय खैरा का संपर्क मार्ग टूटने से बच्चों को विद्यालय जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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