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अतिक्रमण की जद में हैं जिले के आंगनबाड़ी केंद्र
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रतनपुरा के सिधवल में जर्जर पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र।संवाद
- फोटो : MAU
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ब्लाक क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों में लाखों की लागत से बने आंगनबाड़ी केंद्र शोपीस बनकर रह गए हैं। विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैए के चलते कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर दबंगों का वर्षो से कब्जा है। कहीं केंद्रों पर भूसा और धान रखे हैं तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में भूसा और धान रखे जा रहे हैं। केंद्रों पर अतिक्रमण के चलते गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में 245 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। केवल खुद के 79 भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिन गांवों में आंगनबाड़ी के भवन नहीं है वहां के प्राथमिक विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर दबंगों का कब्जा रहने के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कागज पर चल रहा है। गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का लाभ कागज पर ही दिया जा रहा है।
रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के तमसा नदी के तट पर स्थित ठैचा ग्राम पंचायत में बना आंगनबाड़ी केंद्र अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। सरकार द्वारा लाखों की लागत से भवन तो बनवा दिया गया है लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते कैंपस में लोगों द्वारा उपला पाथा जाता है। यही नहीं दबंगों द्वारा केंद्र में धान रखा गया है।
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सिधवल ग्राम पंचायत में दलित बस्ती के पास आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हाल में है। जहां बच्चे नहीं आते हैं। दलित बस्ती के लोगों ने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों को अवगत कराया उसके बावजूद नए भवन का निर्माण न होने से यहां के बच्चे एवं महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्राम पंचायत के पीपरसाथ ग्राम पंचायत में लाखों की लागत से बने आंगनबाड़ी केंद्र पर दबंगों का कब्जा है। इसके चलते केंद्र के भवन में भूसा रखा गया है। पशु भी बांधे जाते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आते ही नहीं है। क्षेत्र के नगवा, खरका, बीबीपुर सहित विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों से संबद्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहा भी कार्यकर्ता कभी कभार ही विद्यालय जाती हैं। प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी पानमती ने बताया जल्द ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जांच में शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में 245 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। केवल खुद के 79 भवन में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिन गांवों में आंगनबाड़ी के भवन नहीं है वहां के प्राथमिक विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर दबंगों का कब्जा रहने के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कागज पर चल रहा है। गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का लाभ कागज पर ही दिया जा रहा है।
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रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के तमसा नदी के तट पर स्थित ठैचा ग्राम पंचायत में बना आंगनबाड़ी केंद्र अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। सरकार द्वारा लाखों की लागत से भवन तो बनवा दिया गया है लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते कैंपस में लोगों द्वारा उपला पाथा जाता है। यही नहीं दबंगों द्वारा केंद्र में धान रखा गया है।
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सिधवल ग्राम पंचायत में दलित बस्ती के पास आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हाल में है। जहां बच्चे नहीं आते हैं। दलित बस्ती के लोगों ने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों को अवगत कराया उसके बावजूद नए भवन का निर्माण न होने से यहां के बच्चे एवं महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्राम पंचायत के पीपरसाथ ग्राम पंचायत में लाखों की लागत से बने आंगनबाड़ी केंद्र पर दबंगों का कब्जा है। इसके चलते केंद्र के भवन में भूसा रखा गया है। पशु भी बांधे जाते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आते ही नहीं है। क्षेत्र के नगवा, खरका, बीबीपुर सहित विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों से संबद्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहा भी कार्यकर्ता कभी कभार ही विद्यालय जाती हैं। प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी पानमती ने बताया जल्द ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जांच में शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।