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भाषण के आक्रामक अंदाज के कायल रहे जनपदवासी

Tue, 17 Nov 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ Updated Tue, 17 Nov 2015 11:26 PM IST
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Aggressive style of speech are convincing
जिले के लोगों को इंदिरा गांधी के भाषण का आक्रामक अंदाज आज भी याद है। सत्ता से बाहर होने के बाद उनका दो बार जिले में आना हुआ। एक तो मध्यावधि चुनाव के वक्त 1980 में, दूसरा 1978 में। सत्ता में रहते हुए भी वे दो बार यहां आईं।
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 25 जून 1975 को देश में आपात काल लागू हुआ। हर ओर कांग्रेस विरोधी लहर थी। इंदिरा और कांग्रेस विरोधी लहर का नतीजा रहा कि 1977 में हुए लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।
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स्वयं इंदिराजी भी रायबरेली से चुनाव हार गईं। केंद्र में जनता पार्टी सरकार का गठन हुआ। दो प्रधानमंत्रियों मोरारजी देशाई तथा चौधरी चरण सिंह के कार्यकाल वाली यह सरकार ढाई साल बाद ही गिर गई। 1980 में मध्यावधि चुनाव हुुआ। इंदिरा गांधी के लिए यह पक्ष में रहा कि ढाई साल केंद्र सरकार चलान वाली जनता पार्टी खंडित हो गई थी।
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 इस समयावधि में जनता के मानस पटल से आपातकाल का खौफ लगभग खत्म हो चुका था। एक प्रकार से इंदिरा लहर चल रही थी। आजमगढ़ जिले के घोसी लोकसभा क्षेत्र से कल्पनाथ राय कांग्रेस के उम्मीदवार थे। इंदिराजी पूर्वांचल के अपने सभी उम्मीदवारों के प्रचार में पूरे जीजान से जुटी हुई थीं।


 वे जनसभाओं में चार पांच घंटे लेट से पंहुचती थी फिर भी पब्लिक टस से मस नहीं होती थी। मऊ के पुराने कांग्रेसी रामजपित पांडेय बताते हैं कि कस्बे के सोनीधापा मैदान में इंदिराजी का भाषण था। सर्दियों के समय उन्हें शाम पांच बजे आना था, लेकिन वे आईं दूसरी सुबह को करीब चार बजे।


 लेकिन उन्हें सुनने को बेताब जनता टस से मस नहीं हुई। हजारों की भीड़ इंदिरा गांधी जिंदाबाद का नारा लगाते हुए रात काट दी। वे बताते हैं कि बिना किसी औपचारिकता के वे सीधे मंच पर पहुंची और जनता से संवाद में जुट गईं। पांडेय ने बताया कि इंदिराजी बहुत देर तक भाषण नहीं दीं। उन्होंने मंच पर अपने उम्मीदवार कल्पनाथ राय को बुलाया और जनता से उन्हें जिताने की अपील की। हालांकि यह चुनाव कल्पनाथ राय 4100 वोटों से हार गए थे।


इसके पहले इंदिराजी 1978 में भी इस जिले के मधुबन क्षेत्र में आईं थी। आजमगढ़ से मोहिसना किदवई उप चुनाव लड़ रही थीं। वे देवरिया से देवरहवा बाबा के दर्शन कर लौटते वक्त मधुबन के डुमरी में जनसभा में पहुंची और संबोधित किया। कांग्रेस नेता राष्ट्रकुंवर बताते हैं कि सुबह करीब नौ बजे जब वे पहुंची। और महंगाई-भ्रष्टाचार पर मोरारजी सरकार पर निशाना साधा।



इसके पहले भी दो बार वे जिले में आईं थी जब प्रधानमंत्री थीं। गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर सरयू नदी पर बने पुल का उद्घाटन करने वे 1972 में यहां आई थी। दोहरीघाट के पुराने लोग इस पुल को इंदिरा गांधी की निशानी के रूप में आज भी इस देखते हैं। जानकार बताते हैं कि इंदिरा जी ने ही बुनकरों को समृद्ध तथा खुशहाल बनाने की दृष्टि से 1974 में स्टेट स्पेनिंग मिल का शिलान्यास किया था। 
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