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कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं, वादकारियों और मुंसियो और स्टैंप विक्रेताओ का प्रवेश स्थगित
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मऊ। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर मंगलवार को जिला जज शंकरलाल ने कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं, वादकारियों और मुंसियों और स्टैंप विक्रेताओं का प्रवेश अग्रिम आदेश तक स्थगित किया है। साथ ही जमानत प्रार्थना पत्रों और आवश्यक प्रकृति के मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किए जाने का आदेश दिया है।
इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव ने बताया कि जिन न्यायालयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई होगी, उसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 1, अन्य विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट संख्या एक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या दो, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चार शामिल है। इसके अलावा मजिस्ट्रेट न्यायालयों में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर डिविजन, अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी, सिविल जज जूनियर डिविजन सदर, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अलावा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रिमांड की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सत्र न्यायालय से संबंधित प्रकरण में नए जमानत प्रार्थना पत्र एवं विशेष क्षेत्राधिकार से संबंधित न्यायालयों में जमानत प्रार्थना पत्र का कार्य जनपद न्यायाधीश द्वारा संपादित किया जाएगा। वहीं धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत बयान रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देशानुसार प्रत्येक कार्य दिवस पर अग्रिम आदेश तक संपादित किया जाएगा। न्यायिक अधिकारियों और अभियोजन पक्ष अदालती कार्यवाही के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ सकेंगे। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक कार्य पूर्वाह्न 10:30 बजे से अपराह्न 2:30 बजे तक अग्रिम आदेश तक होगा। जमानत प्रार्थना पत्र ईमेल के माध्यम से दाखिल कर सकेंगे।
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इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव ने बताया कि जिन न्यायालयों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई होगी, उसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 1, अन्य विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट संख्या एक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या दो, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या चार शामिल है। इसके अलावा मजिस्ट्रेट न्यायालयों में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर डिविजन, अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी, सिविल जज जूनियर डिविजन सदर, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अलावा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रिमांड की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सत्र न्यायालय से संबंधित प्रकरण में नए जमानत प्रार्थना पत्र एवं विशेष क्षेत्राधिकार से संबंधित न्यायालयों में जमानत प्रार्थना पत्र का कार्य जनपद न्यायाधीश द्वारा संपादित किया जाएगा। वहीं धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत बयान रिमांड मजिस्ट्रेट द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देशानुसार प्रत्येक कार्य दिवस पर अग्रिम आदेश तक संपादित किया जाएगा। न्यायिक अधिकारियों और अभियोजन पक्ष अदालती कार्यवाही के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ सकेंगे। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार न्यायिक कार्य पूर्वाह्न 10:30 बजे से अपराह्न 2:30 बजे तक अग्रिम आदेश तक होगा। जमानत प्रार्थना पत्र ईमेल के माध्यम से दाखिल कर सकेंगे।
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