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गबन के मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने का लगाया आरोप
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बढुआ गोदाम। परदहां ब्लाक के अहिलाद गांव में मनरेगा योजना के तहत पोखरियों की खोदाई और इंटरलाकिंग कार्य में बिना काम कराएं 16 लाख रुपये का भुगतान कराने के मामले में जिला प्रशासन ने परदहां प्रभारी एडीओ पंचायत, सचिव और पूर्व प्रधान के विरुद्ध सरायलखंसी थाने में केस दर्ज है। जबकि शिकायतकर्ता एडवोकेट ब्रह्मानंद पांडेय ने पोखरी खुदाई कार्य में मूल्यांकन करने वाले मनरेगा के जेई और डोंगल से भुगतान करने वाले तत्कालीन खंड विकास अधिकारी और लेखाकार को बचाने का आरोप जिला प्रशासन पर लगाया है।
अहिलाद गांव में वित्तीय वर्ष 2019-20 में पोखरियों की खोदाई और इंटरलॉकिंग के कार्य में बिना काम कराएं 16 लाख रुपये का भुगतान मामलेे में शिकायतकर्ता एडवोकेट ब्रह्मानंद पांडेय ने तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने का मांग की थी। जिस पर डीएम के आदेश पर जांच हुई थी। इस मामले में की गई शिकायत पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई में विलंब होता देख, शिकायत ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर कराई गई त्रिस्तरीय जांच के बाद घपला उजागर हुआ।
जांच समिति में शामिल जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता जल निगम ने पूरे प्रकरण की जांच की। इसमें यह तथ्य सामने आया कि फोरलेन के लिए निकाली गई खेतों की मिट्टी से जो गड्ढा बन गया था, उन तीन गड्ढों को पोखरियों की खोदाई दिखा दी गई थी। जबकि एक व्यक्ति के व्यक्तिगत लाभ के लिए कराई गई इंटरलॉकिंग को ग्राम पंचायत की ओर से कराया जाना दिखाकर 16 लाख से अधिक की रकम निकाल ले गई थी।
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जांच समिति की रिपोर्ट में इस घपले में प्रभारी एडीओ पंचायत, सेक्रेटरी राजेश तिवारी, सेक्रेटरी अनुपमा सिंह और पूर्व प्रधान धनंजय सिंह की भूमिका सामने आई। जबकि शिकायतकर्ता ने जांच टीम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जांच टीम द्वारा इस मामले में कार्ययोजना बनाने वाले मनरेगा जेई और डोंगल से पेमेंट करने वाले खंड विकास अधिकारी और अकाउंटेंट कैसे निर्दोष हो सकते हैं। जबकि इस गबन में उनका भी बराबर का सहयोग है जांच टीम द्वारा इनको भी आरोपी बनाया जाना चाहिए।
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अहिलाद गांव में वित्तीय वर्ष 2019-20 में पोखरियों की खोदाई और इंटरलॉकिंग के कार्य में बिना काम कराएं 16 लाख रुपये का भुगतान मामलेे में शिकायतकर्ता एडवोकेट ब्रह्मानंद पांडेय ने तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने का मांग की थी। जिस पर डीएम के आदेश पर जांच हुई थी। इस मामले में की गई शिकायत पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई में विलंब होता देख, शिकायत ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर कराई गई त्रिस्तरीय जांच के बाद घपला उजागर हुआ।
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जांच समिति में शामिल जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता जल निगम ने पूरे प्रकरण की जांच की। इसमें यह तथ्य सामने आया कि फोरलेन के लिए निकाली गई खेतों की मिट्टी से जो गड्ढा बन गया था, उन तीन गड्ढों को पोखरियों की खोदाई दिखा दी गई थी। जबकि एक व्यक्ति के व्यक्तिगत लाभ के लिए कराई गई इंटरलॉकिंग को ग्राम पंचायत की ओर से कराया जाना दिखाकर 16 लाख से अधिक की रकम निकाल ले गई थी।
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जांच समिति की रिपोर्ट में इस घपले में प्रभारी एडीओ पंचायत, सेक्रेटरी राजेश तिवारी, सेक्रेटरी अनुपमा सिंह और पूर्व प्रधान धनंजय सिंह की भूमिका सामने आई। जबकि शिकायतकर्ता ने जांच टीम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जांच टीम द्वारा इस मामले में कार्ययोजना बनाने वाले मनरेगा जेई और डोंगल से पेमेंट करने वाले खंड विकास अधिकारी और अकाउंटेंट कैसे निर्दोष हो सकते हैं। जबकि इस गबन में उनका भी बराबर का सहयोग है जांच टीम द्वारा इनको भी आरोपी बनाया जाना चाहिए।