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हादसे के शिकार हुए दोनों युवक
mau news
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:48 PM IST
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मृत वसीम अकरम नगर क्षेत्र के बुलाकीपुरा में स्थित मकान के बाहर शोक प्रकट करने के लिए जुटी भीड़।
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मऊ। सऊदी के नजरान में हादसे का शिकार हुए जिले के बुलाकी पुरा निवासी वसीम अकरम और कुर्थीजाफर पुर के वसीम अहमद अपने परिवार की माली हालत को सुधारने के लिए घरबार छोड़े थे। लेकिन एक झटके में दोनों की मौत होने से उनके घर की दशा और भी खराब हो गई। मृत युवकों के और भाई सऊदी है। परिवार के सदस्य उन पर छोड़े है कि वो ही तय करें कि क्या लाश लानी है या नहीं।
शहर कोतवाली क्षेत्र के बुलाकीपुरा मुहल्ला निवासी फैय्याज के सात संतानों में वसीम अकरम तीसरे नंबर पर था। वसीम से बड़ा भाई मो. खालिद पहले से ही सऊदी रह रहा था। दो वर्ष पूर्व सेटिंग करने के बाद उसने वसीम को वहां एक कंपनी में काम करने के लिए बुला लिया। वसीम नजरान शहर में मौजूद कंपनी बतौर चपरासी काम करता था। हादसे में वसीम अकरम की मौत की सूचना परिवार के लोगों को खालिद के जरिए मिली थी। बताते चले मृतक के पिता फैय्याज बुनकर है। परिवार किराए के मकान में रहकर किराए का लूम चलाता है। परिवार की दुर्दशा देख उसका भाई खालिद, वसीम अपने साथ सऊदी ले गया था। पिता फैय्याज ने नम आंखों से बताया कि उसके किसी संतान की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार की भलाई के नाते घरबार छोड़ सऊदी गया, वसीम दो वर्ष के अंतराल में घर नहीं आया था। उसके छोटे भाई बहन दरख्शा बीए तृतीय वर्ष में, मो. अनस बी.काम का तथा सबसे छोटा भाई मो. ताबिश इंटर का छात्र है। कमोवेश यही हाल कोपागंज थाने के कुर्थीजाफरपुर गांव निवासी वसीम अहमद के परिवार का है। उसके पिता अजीजुर्रमान 24 चार वर्ष पूर्व सऊदी गया था। वसीम अहमद आठ भाई बहनों में सबसे बड़ा था। बुनकरी से परिवार को निजात दिलाने के लिए वसीम ने अपने छोटे भाईयों फहीम और मुर्सलिम भी सऊदी बुला लिया था। लेकिन उसे क्या पता था कि हादसे का शिकार होकर वह घर की दशा नहीं सुधार पाएगा। बताते चले वसीम के साथ-साथ उसके किसी भी भाई बहन की अभी शादी नहीं हुई है। मृत युवकों के पिता ने बताया कि सऊदी रहने वाले उनके बेटे तय करेंगे की लाश कब कैसे लानी है, या वहीं पर सुपुर्देखाक कर देना है। दूसरी तरफ नौजवान पुत्रों को खोने के गम में दोनों की मां का बुरा हाल है। वसीम अकरम की मां नाजरा खातून तथ वसीम अहमद की मां नूरजहां को लोग संभालने में जुटें है। जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र ने बताया कि अभी अंबेसी के द्वारा कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन लोकल स्तर से उनको पूरी सूचना मिली है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के बुलाकीपुरा मुहल्ला निवासी फैय्याज के सात संतानों में वसीम अकरम तीसरे नंबर पर था। वसीम से बड़ा भाई मो. खालिद पहले से ही सऊदी रह रहा था। दो वर्ष पूर्व सेटिंग करने के बाद उसने वसीम को वहां एक कंपनी में काम करने के लिए बुला लिया। वसीम नजरान शहर में मौजूद कंपनी बतौर चपरासी काम करता था। हादसे में वसीम अकरम की मौत की सूचना परिवार के लोगों को खालिद के जरिए मिली थी। बताते चले मृतक के पिता फैय्याज बुनकर है। परिवार किराए के मकान में रहकर किराए का लूम चलाता है। परिवार की दुर्दशा देख उसका भाई खालिद, वसीम अपने साथ सऊदी ले गया था। पिता फैय्याज ने नम आंखों से बताया कि उसके किसी संतान की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार की भलाई के नाते घरबार छोड़ सऊदी गया, वसीम दो वर्ष के अंतराल में घर नहीं आया था। उसके छोटे भाई बहन दरख्शा बीए तृतीय वर्ष में, मो. अनस बी.काम का तथा सबसे छोटा भाई मो. ताबिश इंटर का छात्र है। कमोवेश यही हाल कोपागंज थाने के कुर्थीजाफरपुर गांव निवासी वसीम अहमद के परिवार का है। उसके पिता अजीजुर्रमान 24 चार वर्ष पूर्व सऊदी गया था। वसीम अहमद आठ भाई बहनों में सबसे बड़ा था। बुनकरी से परिवार को निजात दिलाने के लिए वसीम ने अपने छोटे भाईयों फहीम और मुर्सलिम भी सऊदी बुला लिया था। लेकिन उसे क्या पता था कि हादसे का शिकार होकर वह घर की दशा नहीं सुधार पाएगा। बताते चले वसीम के साथ-साथ उसके किसी भी भाई बहन की अभी शादी नहीं हुई है। मृत युवकों के पिता ने बताया कि सऊदी रहने वाले उनके बेटे तय करेंगे की लाश कब कैसे लानी है, या वहीं पर सुपुर्देखाक कर देना है। दूसरी तरफ नौजवान पुत्रों को खोने के गम में दोनों की मां का बुरा हाल है। वसीम अकरम की मां नाजरा खातून तथ वसीम अहमद की मां नूरजहां को लोग संभालने में जुटें है। जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र ने बताया कि अभी अंबेसी के द्वारा कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन लोकल स्तर से उनको पूरी सूचना मिली है।
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