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Mau News: छह बेड का आइसोलेशन वार्ड पहले से तैयार, स्वाइन फ्लू की जांच के लिए जिला अस्पताल में किट नहीं
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जिला अस्पताल में संभावित स्वाइन फ्लू को लेकर बनाया गया आइसोलशन वार्ड।संवाद
एक सप्ताह पहले बना आइसोलेशन वार्ड, अब 500 किट का भेजा गया डिमांड, 24 से 48 घंटे में जांच शुरू होने का दावा
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। जिला अस्पताल प्रशासन ने संदिग्ध मरीजों के इलाज के लिए एक सप्ताह पहले छह बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिया है, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच के लिए किट उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में सर्दी, खांसी, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे फ्लू के लक्षणों वाले मरीज रोज पहुंच रहे हैं। ऐसे में जांच सुविधा नहीं होने से मरीजों की समय पर पहचान और उपचार को लेकर चिंता बनी हुई है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जांच किट के लिए 500 किट की मांग भेजी जा चुकी है और अगले 24 से 48 घंटे में जांच शुरू कर दी जाएगी। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनकी ओपीडी में रोज करीब 50 वायरल संक्रमण के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कुछ मरीजों में प्लेटलेट कम होने के साथ निमोनिया की समस्या भी सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि करीब 30 प्रतिशत नए मरीज जुकाम, खांसी, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द जैसी शिकायतों के साथ आ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी एक सप्ताह पहले करीब 800 से बढ़कर अब लगभग एक हजार पहुंच गई है। इनमें करीब 40 प्रतिशत मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। इसके बावजूद पिछले एक सप्ताह में जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हो सकी है। जांच किट उपलब्ध नहीं होने को इसका कारण बताया जा रहा है। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू जांच के लिए 500 किट की मांग भेजी गई है। किट मिलते ही 24 से 48 घंटे के भीतर जांच शुरू कर दी जाएगी।
डेंगू की जांच में बलिया का युवक पॉजिटिव
जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की सुविधा उपलब्ध है। मंगलवार को जांच के दौरान बलिया जिले का एक युवक डेंगू पॉजिटिव मिला। बताया गया कि युवक मऊ शहर के एक निजी चिकित्सक से इलाज करा रहा था। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि डेंगू के संभावित मरीजों के लिए जिला अस्पताल में अलग वार्ड बनाया गया है।
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जांच में देरी से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
स्वाइन फ्लू की जांच में देरी होने पर संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और उन्हें अलग रखने में परेशानी हो सकती है। इससे संक्रमण के सामुदायिक प्रसार का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में फिलहाल स्वाइन फ्लू और डेंगू का कोई मरीज भर्ती नहीं है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
डॉ. अनिल कुमार के अनुसार अचानक तेज बुखार के साथ शरीर में अधिक दर्द, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सिरदर्द जैसे लक्षण फ्लू की ओर संकेत कर सकते हैं। कुछ मरीजों में पेट दर्द, दस्त या उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू की सटीक पुष्टि डॉक्टर की सलाह पर कराए जाने वाले प्रयोगशाला परीक्षण, जैसे आरटी-पीसीआर या नासोफैरिंजियल स्वैब टेस्ट, से ही होती है।
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प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। जिला अस्पताल प्रशासन ने संदिग्ध मरीजों के इलाज के लिए एक सप्ताह पहले छह बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिया है, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच के लिए किट उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में सर्दी, खांसी, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे फ्लू के लक्षणों वाले मरीज रोज पहुंच रहे हैं। ऐसे में जांच सुविधा नहीं होने से मरीजों की समय पर पहचान और उपचार को लेकर चिंता बनी हुई है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जांच किट के लिए 500 किट की मांग भेजी जा चुकी है और अगले 24 से 48 घंटे में जांच शुरू कर दी जाएगी। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनकी ओपीडी में रोज करीब 50 वायरल संक्रमण के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कुछ मरीजों में प्लेटलेट कम होने के साथ निमोनिया की समस्या भी सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि करीब 30 प्रतिशत नए मरीज जुकाम, खांसी, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द जैसी शिकायतों के साथ आ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी एक सप्ताह पहले करीब 800 से बढ़कर अब लगभग एक हजार पहुंच गई है। इनमें करीब 40 प्रतिशत मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। इसके बावजूद पिछले एक सप्ताह में जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हो सकी है। जांच किट उपलब्ध नहीं होने को इसका कारण बताया जा रहा है। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू जांच के लिए 500 किट की मांग भेजी गई है। किट मिलते ही 24 से 48 घंटे के भीतर जांच शुरू कर दी जाएगी।
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डेंगू की जांच में बलिया का युवक पॉजिटिव
जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की सुविधा उपलब्ध है। मंगलवार को जांच के दौरान बलिया जिले का एक युवक डेंगू पॉजिटिव मिला। बताया गया कि युवक मऊ शहर के एक निजी चिकित्सक से इलाज करा रहा था। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि डेंगू के संभावित मरीजों के लिए जिला अस्पताल में अलग वार्ड बनाया गया है।
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जांच में देरी से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
स्वाइन फ्लू की जांच में देरी होने पर संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और उन्हें अलग रखने में परेशानी हो सकती है। इससे संक्रमण के सामुदायिक प्रसार का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में फिलहाल स्वाइन फ्लू और डेंगू का कोई मरीज भर्ती नहीं है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
डॉ. अनिल कुमार के अनुसार अचानक तेज बुखार के साथ शरीर में अधिक दर्द, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सिरदर्द जैसे लक्षण फ्लू की ओर संकेत कर सकते हैं। कुछ मरीजों में पेट दर्द, दस्त या उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू की सटीक पुष्टि डॉक्टर की सलाह पर कराए जाने वाले प्रयोगशाला परीक्षण, जैसे आरटी-पीसीआर या नासोफैरिंजियल स्वैब टेस्ट, से ही होती है।