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एक ऐसा अस्पताल जहां सप्ताह में दो दिन मिलते हैं चिकित्सक
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अमिला। बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के अमिला कस्बा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के अमिला कस्बा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। यहां सप्ताह में दो दिनही चिकित्सक का रोस्टर निर्धारित किया गया है। इससे मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है।
नगर पंचायत अमिला कस्बा में लगभग छह दशक पूर्व बना नगर पंचायत स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। अस्पताल में तैनात चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी कार्य करने के दौरान दहशत में जी रहे हैं। अस्पताल मेंएक चिकित्सक, एक वार्ड आया, एक चपरासी, एक फार्मासिस्ट का पद सृजित किया गया है। यहां चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। एक चिकित्सक को दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है। अन्य दिनों फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। इस संबंध में राकेश कुमार का कहना था कि अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती को लेकर कई बार विभागीय आला अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसी क्रम में प्रेमचंद, अशोक, आशीष कुमार का कहना है कि अस्पताल का भवन जर्जर हाल होने से इलाज कराए जाने को लेकर कतराते हैं। यहां बुनियादी सुविधाएं बहाल तक नहीं की जा सकी है। अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
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नगर पंचायत अमिला कस्बा में लगभग छह दशक पूर्व बना नगर पंचायत स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। अस्पताल में तैनात चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी कार्य करने के दौरान दहशत में जी रहे हैं। अस्पताल मेंएक चिकित्सक, एक वार्ड आया, एक चपरासी, एक फार्मासिस्ट का पद सृजित किया गया है। यहां चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। एक चिकित्सक को दो दिन के लिए संबद्ध किया गया है। अन्य दिनों फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा है। इस संबंध में राकेश कुमार का कहना था कि अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती को लेकर कई बार विभागीय आला अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसी क्रम में प्रेमचंद, अशोक, आशीष कुमार का कहना है कि अस्पताल का भवन जर्जर हाल होने से इलाज कराए जाने को लेकर कतराते हैं। यहां बुनियादी सुविधाएं बहाल तक नहीं की जा सकी है। अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
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