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चुनाव-लगन के चलते फूलों के दाम बढ़े
Mau
Updated Thu, 17 Apr 2014 05:31 AM IST
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मऊ। चुनाव अपने सवाब पर है। लगन भी तेजी पर है। ऐसे में फूल के कारोबारियों की चांदी हो गई है। यूं कहे कि उनके बीसों उंगली घी में है। वैसे तो लगन के मौसम में हमेशा ही फूलों के बाजार में तेजी रहती है लेकिन इस बार चुनाव ने तो व्यापार में चार चांद लगा दिया है। इस कारण फूलों की कीमत में तीन से चार गुना इजाफा हुआ है। कीमत में आई बढ़ोत्तरी ने सभी को चकित कर दिया है। नेता से लेकर आम आदमी तक सभी हैरान है।
शुभ कार्यों के साथ विशेष अवसरों पर फूलों की आवश्यकता पड़ती है। चुनाव के समय नेताओं के स्वागत का सबसे सरल और बेहतर माध्यम फूल ही है। किसी भी वीआईपी या किसी नेता की स्वागत के लिए फूल की माला या बुकें अवश्य भेंट की जाती है। वर्तमान समय में फूलों की माला तैयार करने और जनसभा आदि के लिए बनारस, लखनऊ, कलकत्ता और दिल्ली से फूल मंगाया जा रहा है। फूलों में सबसे ज्यादा खपत गेंदा के फूल की हो रही है। उसके बाद गुलाब के फूल का नंबर आता है। इन दिनों तो नेताओं के जनसभा में गुलाब की मांग ज्यादा है। यही नहीं लगन के मौसम में मंडप से लेकर स्टेज और द्वार, कार आदि सजाने के लिए भी फूल का इस्तेमाल हो रहा है। आए दिन दुकान के पास गाड़ी सजने के लिए खड़ी रहती है। कीमत में जबरदस्त उछाल से फूलों के कारोबारी काफी उत्साहित है। चुनाव आयोग की सख्ती से बैनर, पोस्टर और होर्डिंग वाले भले ही मायूस है। वह रह-रह कर आयोग को कोस रहे हैं। जहां वह पहले बेहतर धंधा करने के लिए चुनाव का इंतजार करते थे। वहीं आयोग के एक फैसले ने उनके सारे मंसूबे पर पानी फेर दिया। वहीं फूलों के कारोबारियों काफी उत्साहित है। उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में उनका कारोबार दिन दूना रात चौगुना पनप रहा है।
कुछ दिन पहले फूलों की माला का रेट 15 से 20 रुपये था लेकिन इन दिनों 30 से 40 रुपये। गुलाब, डहेलिया, जरबेटा और ग्लेडियस के दामों में भी उछाल आया है। आर्किड से तैयार होने वाले बुकें की कीमत तो आसमान छू रहा है। 100 से 200 रुपये का बुकें इन दिनों मार्केट में 500 से 550 रुपये में बिक रहा है।
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कारोबारी त्रिलोकी और राजन ने बताया स्थानीय स्तर पर फूल की खेती नहीं होती है। गेंदा का फूल बनारस से मंगाया जाता है। जबकि आर्किड, गुलाब, डहेलिया और जरबेटा, लखनऊ, दिल्ली और कोलकाता से मंगाते है। आने, जाने समेत अन्य खर्च के चलते उनकी कीमतों में काफी उछाल है। ऐसे में अधिक कीमत पर माला बेचना पड़ रहा है।
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शुभ कार्यों के साथ विशेष अवसरों पर फूलों की आवश्यकता पड़ती है। चुनाव के समय नेताओं के स्वागत का सबसे सरल और बेहतर माध्यम फूल ही है। किसी भी वीआईपी या किसी नेता की स्वागत के लिए फूल की माला या बुकें अवश्य भेंट की जाती है। वर्तमान समय में फूलों की माला तैयार करने और जनसभा आदि के लिए बनारस, लखनऊ, कलकत्ता और दिल्ली से फूल मंगाया जा रहा है। फूलों में सबसे ज्यादा खपत गेंदा के फूल की हो रही है। उसके बाद गुलाब के फूल का नंबर आता है। इन दिनों तो नेताओं के जनसभा में गुलाब की मांग ज्यादा है। यही नहीं लगन के मौसम में मंडप से लेकर स्टेज और द्वार, कार आदि सजाने के लिए भी फूल का इस्तेमाल हो रहा है। आए दिन दुकान के पास गाड़ी सजने के लिए खड़ी रहती है। कीमत में जबरदस्त उछाल से फूलों के कारोबारी काफी उत्साहित है। चुनाव आयोग की सख्ती से बैनर, पोस्टर और होर्डिंग वाले भले ही मायूस है। वह रह-रह कर आयोग को कोस रहे हैं। जहां वह पहले बेहतर धंधा करने के लिए चुनाव का इंतजार करते थे। वहीं आयोग के एक फैसले ने उनके सारे मंसूबे पर पानी फेर दिया। वहीं फूलों के कारोबारियों काफी उत्साहित है। उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में उनका कारोबार दिन दूना रात चौगुना पनप रहा है।
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कुछ दिन पहले फूलों की माला का रेट 15 से 20 रुपये था लेकिन इन दिनों 30 से 40 रुपये। गुलाब, डहेलिया, जरबेटा और ग्लेडियस के दामों में भी उछाल आया है। आर्किड से तैयार होने वाले बुकें की कीमत तो आसमान छू रहा है। 100 से 200 रुपये का बुकें इन दिनों मार्केट में 500 से 550 रुपये में बिक रहा है।
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कारोबारी त्रिलोकी और राजन ने बताया स्थानीय स्तर पर फूल की खेती नहीं होती है। गेंदा का फूल बनारस से मंगाया जाता है। जबकि आर्किड, गुलाब, डहेलिया और जरबेटा, लखनऊ, दिल्ली और कोलकाता से मंगाते है। आने, जाने समेत अन्य खर्च के चलते उनकी कीमतों में काफी उछाल है। ऐसे में अधिक कीमत पर माला बेचना पड़ रहा है।