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घाघरा नदी चिऊटीडाड़ गांव को लीलने को बेताब
Mau
Updated Thu, 12 Sep 2013 05:36 AM IST
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दोहरीघाट। जलस्तर घटने के बाद भी घाघरा नदी चिऊटीडाड़ गांव को लीलने को बेताब नजर आ रही है। कटान की रफ्तार तेज होेने से गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। घाघरा के उग्र रूप को देख लोग पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं नदी की उफनाती लहरें चिऊंटीडाड़ गांव से महज 17 मीटर की दूरी पर रह गई है। बता दें 24 घंटे में 50 बीघा उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव में रेडअलर्ट जारी किया है। साथ ही सभी को सजग हो कर रहने के लिए कहा गया है।
पिछले 24 घंटे में गांव के श्यामबली यादव, त्रिलोकी नायक, किशुन नायक, रामविलास नायक, झुन्नू यादव, सत्यनारायण नायक, धुरई, श्रवण, पूर्णमासी, नरेंद्र नायक, गिरजा, महेश, झिन्नू नायक, रामजनम, धरमू, हरिशंकर नायक आदि की 50 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। ग्रामीणों की मानें तो नदी गांव से डेढ़ किमी दूरी पर थी। कटान करते-करते नदी से गांव से दूरी 17 मीटर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के मामले में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों ने गांव में डेरा डाल रखा है।
वहीं राजस्व विभाग के किसी भी अधिकारी का मौके पर न पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। सिंचाई खंड आजमगढ़ के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि गांव को घाघरा की कटान से बचाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
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पिछले 24 घंटे में गांव के श्यामबली यादव, त्रिलोकी नायक, किशुन नायक, रामविलास नायक, झुन्नू यादव, सत्यनारायण नायक, धुरई, श्रवण, पूर्णमासी, नरेंद्र नायक, गिरजा, महेश, झिन्नू नायक, रामजनम, धरमू, हरिशंकर नायक आदि की 50 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। ग्रामीणों की मानें तो नदी गांव से डेढ़ किमी दूरी पर थी। कटान करते-करते नदी से गांव से दूरी 17 मीटर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के मामले में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों ने गांव में डेरा डाल रखा है।
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वहीं राजस्व विभाग के किसी भी अधिकारी का मौके पर न पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। सिंचाई खंड आजमगढ़ के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि गांव को घाघरा की कटान से बचाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
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