फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   केवल पांच गांवों के पुरवे ही ओडीएफ

केवल पांच गांवों के पुरवे ही ओडीएफ

Sat, 15 Dec 2018 11:32 PM IST
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:32 PM IST
विज्ञापन
केवल पांच गांवों के पुरवे ही ओडीएफ
ब्लाक में स्वच्छता अभियान औंधे मुंह है। ब्लाक के कुल 77 गांवों में से एक भी ग्राम पंचायत अब तक ओडीएफ नहीं हो सका है। पांच ग्राम पंचायतों के सिर्फ पांच पुरवों को ही ओडीएफ घोषित करके खानापूरी की गई है। अब गांवों के लोग खुले में शौच को जा रहे हैं। यूं तो ब्लाक के विभिन्न गांवों में 13363 परिवारों को शौचालय बनवाने का दावा किया गया है। लेकिन इनमें से भी आधे अधूरे हैं। स्वच्छाग्रहियों की सलाह को गांव के लोग मानते नहीं है, उल्टे उन्हें ही दौड़ा लेते हैं।
विज्ञापन

रतनपुरा ब्लाक में कुल 77 ग्राम पंचायतें हैं। दो अक्तूबर 2018 को पूरे जनपद के साथ ही ब्लाक के सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कराया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। ब्लाक के संभरुवा ग्राम पंचायत का मीरपुर पुरवा, खालिसपुर ग्राम पंचायत का गोबरिया पुरवा, पहदेवाजीत का गोपापुर पुरवा, इटैली ग्राम पंचायत का दलपतपुर पुरवा और अइलख ग्राम पंचायत के कुरेमा पुरवा ही अब तक ओडीएफ घोषित किए गए हैं। ब्लाक के सभी गांवों के 15 हजार 231 परिवारों को शौचालय बनवाने के लिए चिह्नित किया गया था। ब्लाक के सभी गांवों के लिए कुल 15 हजार 231 शौचालय निर्मित कराने का लक्ष्य था। लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष अब तक महज 13 363 शौचालयों के निर्माण का दावा सरकारी आंकड़ों में किया गया है। इनमें भी अभी1868 शौचालयों का निर्माण बाकी है। ये तो सरकारी आंकड़ें हैं। लेकिन धरातलीय स्थिति इससे विपरीत है। जिन शौचालयों को विभाग ने पूर्ण दर्शाकर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है, उनमें से भी अधिकांश आधे अधूरे हैं। किसी पर छत नहीं है तो किसी में सीट नहीं है। किसी में दरवाजे नहीं हैं तो किसी में सीट और टैंक को जोड़ने वाली पाइप गायब है। इसके अतिरिक्त इन शौचालयों में उपले, पुआल और अन्य बेकार पड़े घरेली सामान भ्ररे हुए हैं। जिनके घरों पर शौचालय बन भी गए हैं, उनका उपयोग परिवार के लोग नहीं कर रहे हैं। शौच के लिए गांवों के लोग खुले में जाना पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन

इनसेट
सोच में बदलाव है जरूरी
गांवों के लोग शौचालयों में न जाकर खुले में शौच के लिए जाते हैं। नसोपुर के अजय सिंह कहते हैं कि उन्हें यदि शौचालय में ही जाने को कह दिया जाए तो वे नहीं जा सकते हैं। वे तो नदी के किनारे खुले में ही जाना पसंद करते हैं। कसारा के लेखराज कहते हैं कि खुले में शौच जाने के कई नुकसान हैं फिर भी उन्हें खुले में ही शौच जाना पसंद है। राममूर्ति कहते हैं कि पुरानी सोच बदलनी चाहिए। अब समय के साथ उन पुरानी आदतों को बदलने की जरूरत है जिनसे समाज और स्वयं का स्वास्थ्य प्रभावित होता हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोट
पुरानी सोच के लोगों को अब अपने विचारों में परिवर्ततन करने का समय आ गया है। ऐसे लोगों को आगे आकर खुले में शौच जाने वालों को शौचालयों के प्रयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए।
एसपी सिंह, डीपीआरओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed