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युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से संम्मानित हुए जिले के पवन कुमार
Updated Sat, 27 Oct 2018 11:29 PM IST
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मऊ। जिले के काझा गांव निवासी और बीएचयू में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आसीन पवन दूबे को मुख्यमंत्री उप्र ने गुरुवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया। पवन दूबे को यह सम्मान स्टेम सेल में एक खोज करने पर दिया गया। पवन दूबे को सम्मानित किए जाने पर उनके पैतृक गांव के लोग काफी खुश है।
पवन कुमार दुबे पुत्र स्व.पद्माकर दुबे मूलरुप से मऊ जिले के काझा गांव के निवासी है। बीएचयू के सेंटर फॉर जेनिटिक डिसऑर्डर विभाग में पवन दुबे बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात हैं। स्टेम सेल में एक महत्वपूर्ण खोज करने पर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हे गुरुवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के रुप में पवन को एक लाख रुपया राशि के प्रशस्ति पत्र दिया गया। पवन कुमार दुबे की शुरुआती शिक्षा काझा स्थित बालक बालिका इंटर कॉलेज से हुई, जनता इंबत कॉलेज रानीपुर से 12 वीं पास करने के बाद वो आगे की शिक्षा के लिए यूपी कॉलेज वाराणसी में प्रवेश लिए। बीएससी बायो से करने के बाद वो पूर्वांचल विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी किए। इसके बाद रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से पीएचडी किए। इसके बाद वो अमेरिका के मैरीलैंड यूनिवर्सिटी से पोस्ट डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उनकी तैनाती बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर बीएचयू में हुई।
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पवन कुमार दुबे पुत्र स्व.पद्माकर दुबे मूलरुप से मऊ जिले के काझा गांव के निवासी है। बीएचयू के सेंटर फॉर जेनिटिक डिसऑर्डर विभाग में पवन दुबे बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात हैं। स्टेम सेल में एक महत्वपूर्ण खोज करने पर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हे गुरुवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के रुप में पवन को एक लाख रुपया राशि के प्रशस्ति पत्र दिया गया। पवन कुमार दुबे की शुरुआती शिक्षा काझा स्थित बालक बालिका इंटर कॉलेज से हुई, जनता इंबत कॉलेज रानीपुर से 12 वीं पास करने के बाद वो आगे की शिक्षा के लिए यूपी कॉलेज वाराणसी में प्रवेश लिए। बीएससी बायो से करने के बाद वो पूर्वांचल विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी किए। इसके बाद रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से पीएचडी किए। इसके बाद वो अमेरिका के मैरीलैंड यूनिवर्सिटी से पोस्ट डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उनकी तैनाती बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर बीएचयू में हुई।
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