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आरक्षण के विरोध में 900 लोगों ने की आपत्ति
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मऊ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए किए गए आरक्षण के विरोध में काफी लोगों ने मंगलवार को भी आपत्तियां दाखिल किया। जिला मुख्यालय से लेकर ब्लाकों तक नौ सौ लोगों ने आपत्तियां दाखिल किया।
बड़रावं ब्लाक के कपरियाडीह गांव के बीस लोगों ने डीपीआरओ कार्यालय में आपत्ति दाखिल किया।गांव के बाल किशुन यादव और राकेश कुमार वर्मा आदि आपत्तिकर्ताओं का तर्क है कि यह गांव 1995 में अनुसूचित जाति , साल 2000 में अनुसूचित महिला, 2005 में अनुसूचित महिला, 2010 में महिला और 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। आपत्ति में कहा गया है कि इस गांव में पिछड़े वर्ग की आबादी लगभग 65 प्रतिशत है ऐसी दशा में गांव को अनारक्षित किया जाना गाइडलाइन के सर्वथा विपरीत है। मांग की गई है कि इस गांव को पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। इसी प्रकार दुबारी लक्ष्मीपुर निवासी सूर्यभान चौहान सहित कई लोगों ने अपनी आपत्ति में तर्क दिया है कि गांव में पिछडा वर्ग की आबादी 80 प्रतिशत है जबकि इस गांव को कभी पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया। 1995 से अब तक इस गांव को चार बार अनारक्षित घोषित किया गया है जबकि केवल 2010 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था।मांग की गई है कि इस गांव को गाइड लाइन के अनुसार पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए।
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बड़रावं ब्लाक के कपरियाडीह गांव के बीस लोगों ने डीपीआरओ कार्यालय में आपत्ति दाखिल किया।गांव के बाल किशुन यादव और राकेश कुमार वर्मा आदि आपत्तिकर्ताओं का तर्क है कि यह गांव 1995 में अनुसूचित जाति , साल 2000 में अनुसूचित महिला, 2005 में अनुसूचित महिला, 2010 में महिला और 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। आपत्ति में कहा गया है कि इस गांव में पिछड़े वर्ग की आबादी लगभग 65 प्रतिशत है ऐसी दशा में गांव को अनारक्षित किया जाना गाइडलाइन के सर्वथा विपरीत है। मांग की गई है कि इस गांव को पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। इसी प्रकार दुबारी लक्ष्मीपुर निवासी सूर्यभान चौहान सहित कई लोगों ने अपनी आपत्ति में तर्क दिया है कि गांव में पिछडा वर्ग की आबादी 80 प्रतिशत है जबकि इस गांव को कभी पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया। 1995 से अब तक इस गांव को चार बार अनारक्षित घोषित किया गया है जबकि केवल 2010 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था।मांग की गई है कि इस गांव को गाइड लाइन के अनुसार पिछडा वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए।
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