{"_id":"581a35fa4f1c1bd635435aeb","slug":"78-firms-operate-in-the-district-on-a-pan","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में संचालित हंै एक पैन पर 78 फर्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में संचालित हंै एक पैन पर 78 फर्म
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नए वित्तीय वर्ष में लागू होने वाले जीएसटीएन की तैयारी के दौरान एक पैन पर कई फार्मों के संचालित होने का खुलासा गत दिनों हुआ। प्रमुख सचिव वाणिज्यकर के आदेश पर जब स्थानीय स्तर पर इन फार्मों की जांच हुई तो जिले में करीब 78 फर्म ऐसी मिली जिसका पंजीकरण एक पैन पर किया गया है।
लखनऊ से भेजी गई सूची के आधार पर वाणिज्य कर कार्यालय में जब संचालित फार्मों का रिकार्ड खंगाला गया तो पता चला कि अधिकांश फर्म वर्ष 2008 से पूर्व की रजिस्टर्ड हैं। वाणिज्यकर विभाग ने चिन्हित की गई फर्मों को नोटिस जारी किया है। सहायक आयुक्त वाणिज्य कर संदीप कुमार ने बताया कि नोटिस जारी करने के बाद भी फर्म के स्वामी अगर उपस्थित होकर पैन कार्ड उपलब्ध नहीं कराए तो उनकी फर्मों को निलंबित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक पैन पर कई फार्म संचालित होने से इनकम टैक्स की चोरी होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। जबकि एक पैन पर कई फार्म के संचालित होने से वाणिज्य कर विभाग को कोई नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि जितनी भी फार्म संचालित हो रही, विभाग उनके कार्यों का असिस्मेंटकर फर्म संचालक से कर वसूली कर रहा था। संदीप कुमार की मानें तो वर्ष 2008 में वैट लागू हुआ, जब से टीन नंबर पाने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य किया गया। उससे पहले टीन नंबर पाने के लिए पैन कार्ड की आवश्यकता नहीं होती थी। बोले टीन के बाद अब जीएसटीएन लागू होने वाला है अब जब इस कर को लागू करने की तैैयारी शुरू की जा रही है, जब इन दस्तावेजों को खंगाले जाने लगा। इस दौरान इस बात का खुलासा हुुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ से भेजी गई सूची के आधार पर वाणिज्य कर कार्यालय में जब संचालित फार्मों का रिकार्ड खंगाला गया तो पता चला कि अधिकांश फर्म वर्ष 2008 से पूर्व की रजिस्टर्ड हैं। वाणिज्यकर विभाग ने चिन्हित की गई फर्मों को नोटिस जारी किया है। सहायक आयुक्त वाणिज्य कर संदीप कुमार ने बताया कि नोटिस जारी करने के बाद भी फर्म के स्वामी अगर उपस्थित होकर पैन कार्ड उपलब्ध नहीं कराए तो उनकी फर्मों को निलंबित किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि एक पैन पर कई फार्म संचालित होने से इनकम टैक्स की चोरी होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। जबकि एक पैन पर कई फार्म के संचालित होने से वाणिज्य कर विभाग को कोई नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि जितनी भी फार्म संचालित हो रही, विभाग उनके कार्यों का असिस्मेंटकर फर्म संचालक से कर वसूली कर रहा था। संदीप कुमार की मानें तो वर्ष 2008 में वैट लागू हुआ, जब से टीन नंबर पाने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य किया गया। उससे पहले टीन नंबर पाने के लिए पैन कार्ड की आवश्यकता नहीं होती थी। बोले टीन के बाद अब जीएसटीएन लागू होने वाला है अब जब इस कर को लागू करने की तैैयारी शुरू की जा रही है, जब इन दस्तावेजों को खंगाले जाने लगा। इस दौरान इस बात का खुलासा हुुआ।
विज्ञापन