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गैर इरादतन हत्या के मामले में मां बेटे सहित तीन को आजीवन कारावास
Updated Mon, 17 Dec 2018 11:36 PM IST
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मां बेटे सअिपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन कुमारी आराधना रानी ने गैर इरादतन हत्या के मामले में नामजद मां बेटे सहित तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 25-25 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा हो जाने पर मृतका नाजिया के परिजनों को 50 प्रतिशत धनराशि बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कंधेरी कांशीराम आवास निवासी सिकंदर पुत्र मुमताज अहमद की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन है कि 25 सितंबर 2016 को वह अपनी पत्नी के साथ बहादुरगंज गया था। घर पर उसकी बेटी नाजिया थी। उसी दौरान उसके पड़ोस में रहने वाले मुहम्मद आजाद पुत्र रामू, गोविंदा पुत्र अनिरुद्ध और मरछिया पत्नी अनिरुद्ध ने आपसी विवाद को लेकर उसके घर में घुसकर उसकी बेटी नाजिया के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिए। इलाज के दौरान नाजिया की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप-पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी रामचंद्र चौहान ने कुल 14 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मुहम्मद आजाद, गोविंदा और मरछिया को घर में घुसकर गैर इरादतन हत्या करने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उपरोक्त सजा सुनाई।
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अभियोजन के अनुसार सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कंधेरी कांशीराम आवास निवासी सिकंदर पुत्र मुमताज अहमद की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन है कि 25 सितंबर 2016 को वह अपनी पत्नी के साथ बहादुरगंज गया था। घर पर उसकी बेटी नाजिया थी। उसी दौरान उसके पड़ोस में रहने वाले मुहम्मद आजाद पुत्र रामू, गोविंदा पुत्र अनिरुद्ध और मरछिया पत्नी अनिरुद्ध ने आपसी विवाद को लेकर उसके घर में घुसकर उसकी बेटी नाजिया के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिए। इलाज के दौरान नाजिया की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप-पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी रामचंद्र चौहान ने कुल 14 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मुहम्मद आजाद, गोविंदा और मरछिया को घर में घुसकर गैर इरादतन हत्या करने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उपरोक्त सजा सुनाई।
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