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पोखरी से अतिक्रमण हटाने को सौंपा ज्ञापन
Updated Fri, 25 May 2018 10:52 PM IST
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नगर पंचायत क्षेत्र के उसुरी और पिपरा मुहल्लों में मौजूद पोखरियों पर अतिक्रमण को हटाने तथा दोनों पोखरियों को साफ करने की मांग करते हुए मुहल्लेवासियों ने शुक्रवार को एसडीएम मधुबन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पोखरियों के अस्तित्व को पुन: वापस कराने की मांग की गई।
बता दे दोनों मुहल्लों में पानी का लेबल को बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद गांवों में मौजूद पोखरियों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा उस पर कोई अमल नहीं किया गया। इससे नाराज लोगों ने शुक्रवार को उप जिलाधिकारी निरंकार सिंह को ज्ञापन सौंपकर पोखरियों से अतिक्रमण हटवाने की मांग की। ग्रामीणों की माने तो वार्ड नंबर तीन और पांच में स्थित पोखरियो में गांव का गंदा पानी बहता है। लेकिन उसके चारों तरफ लोग घर बनाकर कब्जा करने के साथ उसमें शौचालय भी गिराने लगें जिसके कारण पोखरियों के अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। इसके अलावा गंदगी से पोखरी के आसपास रहने वालों का दुर्गंध से बुरा हाल है।हल्की सी हवा से भी घर दुर्गंध से भर जाता है।यही नही पोखरी में गंदगी के चलते हैंडपंप आदि का पानी भी प्रदूषित होने लगा है। जिससे आए दिन पानी के चलते लोगों को पेट लीवर आदि की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही है।पोखरियों के अतिक्रमण से उनका अस्तित्व खतरे में आ गया है।उनके पटने से वाटर लेबल का स्तर काफी नीचे चला गया है जिसकी वजह से पानी भी दुर्लभ होता जा रहा है।एक तरफ पानी की उपलब्धता और सतह बनाएं रखने के लिए सरकार करोड़ों रूपये लगाकर पोखरियां खोदवाने में लगी है जबकि उसके आसपास बसे लोग उसे पाटने में लगे है।यह हालत कमोबेश हर गांवों की पोखरियों में देखने को मिल जाएगा।वार्ड नम्बर पांच और तेरह के लोगों आंनद मल्ल,सतीश मल्ल,गोपाल कुमार,सोनू,राकेश मल्ल,लीलावती देवी आदि ने पोखरियो से अतिक्रमण हटवाने तथा उसकी सफाई कराने की मांग की है।
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बता दे दोनों मुहल्लों में पानी का लेबल को बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद गांवों में मौजूद पोखरियों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा उस पर कोई अमल नहीं किया गया। इससे नाराज लोगों ने शुक्रवार को उप जिलाधिकारी निरंकार सिंह को ज्ञापन सौंपकर पोखरियों से अतिक्रमण हटवाने की मांग की। ग्रामीणों की माने तो वार्ड नंबर तीन और पांच में स्थित पोखरियो में गांव का गंदा पानी बहता है। लेकिन उसके चारों तरफ लोग घर बनाकर कब्जा करने के साथ उसमें शौचालय भी गिराने लगें जिसके कारण पोखरियों के अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। इसके अलावा गंदगी से पोखरी के आसपास रहने वालों का दुर्गंध से बुरा हाल है।हल्की सी हवा से भी घर दुर्गंध से भर जाता है।यही नही पोखरी में गंदगी के चलते हैंडपंप आदि का पानी भी प्रदूषित होने लगा है। जिससे आए दिन पानी के चलते लोगों को पेट लीवर आदि की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही है।पोखरियों के अतिक्रमण से उनका अस्तित्व खतरे में आ गया है।उनके पटने से वाटर लेबल का स्तर काफी नीचे चला गया है जिसकी वजह से पानी भी दुर्लभ होता जा रहा है।एक तरफ पानी की उपलब्धता और सतह बनाएं रखने के लिए सरकार करोड़ों रूपये लगाकर पोखरियां खोदवाने में लगी है जबकि उसके आसपास बसे लोग उसे पाटने में लगे है।यह हालत कमोबेश हर गांवों की पोखरियों में देखने को मिल जाएगा।वार्ड नम्बर पांच और तेरह के लोगों आंनद मल्ल,सतीश मल्ल,गोपाल कुमार,सोनू,राकेश मल्ल,लीलावती देवी आदि ने पोखरियो से अतिक्रमण हटवाने तथा उसकी सफाई कराने की मांग की है।
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