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आठ हजार का सामान खरीदा 67 हजार में
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:03 AM IST
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zd
- फोटो : Getty Images
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नगर पंचायत के सात सभासदों ने चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकारी धन की बंदरबाट आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जो सामान आठ हजार रुपये में बाजार में मिल जाता है, उसकी खरीद 67 हजार 500 रुपये में की गई है। चेयरमैन का कहना है कि सभासद ही फर्जी बिल पास करने का दबाव बना रहे हैं और साजिशन उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं।
सभासद विजय कुमार, अभय कुमार, वेदाना, मनोज, कपूरचंद, फूलमती, अफसाना ने मंडलायुक्त शिकायती पत्र भेजकर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि नगर पंचायत ने वर्ष 2013-14 के लिए आनलाइन तीन लाख तीस हजार रुपये का टेंडर कराया था।
उसके बाद वेबसाइट बंद कर दी गई और नई साइट बना कर धन की बंदरबाट की गई।
सभासदों का आरोप है कि नगर पंचायत की साइट पर टेंडर, काम की भौगोलिक स्थिति, निर्देशिका, निविदा आदि का आप्शन है लेकिन वहां कुछ अपलोड नहीं किया गया है। दस सीटर मोबाइल शौचालय के लिए सवा 12 लाख हजार रुपये दिया गया जबकि इसकी कीमत महज सवा छह लाख रुपये है।
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13वें वित्त के धन से 12 कूड़ा गाड़ी के लिए आठ लाख 10 हजार 180 रुपये का टेंडर हुआ। इस तरह प्रति रिक्शा कूड़ा गाड़ी 67500 रुपये का हिसाब लगाया गया। आरोप है कि बाजार में कहीं से भी 8000 रुपये में एक रिक्शा कूड़ा गाड़ी खरीदी जा सकती है। आरोप लगाया गया है कि वार्ड नं. 11 में 12 शीट शौचालय के निर्माण का टेंडर 39 लाख में हुआ
जबकि वहीं वार्ड नं. 6 में 10 शीटर का शौचालय का निर्माण सात लाख 32 हजार 100 रूपये में हुआ है। इसी प्रकार हाईमास्ट, एलईडी लाइट व खम्भों की खरीदारी टेंडर के अनुरूप न होकर प्रस्ताव से ज्यादा खरीदारी कर नगर के बाहरी हिस्सों में लाइट व खम्भों को लगाया गया। लोकल लाइटों की खरीदारी ऊंचे दामों में की गयी। सभासदों का आरोप है कि सरकारी धन की लूटखसोट की गयी है। चेयरमैन पति ने अपने करीबी को बचाने के लिए वार्ड नंबर 11 में शौचालय का निर्माण नहीं होने दिया। प्रस्तावित जमीन नजूल की है उस पर उनके करीबी का अवैध कब्जा है।
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सभासद विजय कुमार, अभय कुमार, वेदाना, मनोज, कपूरचंद, फूलमती, अफसाना ने मंडलायुक्त शिकायती पत्र भेजकर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि नगर पंचायत ने वर्ष 2013-14 के लिए आनलाइन तीन लाख तीस हजार रुपये का टेंडर कराया था।
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उसके बाद वेबसाइट बंद कर दी गई और नई साइट बना कर धन की बंदरबाट की गई।
सभासदों का आरोप है कि नगर पंचायत की साइट पर टेंडर, काम की भौगोलिक स्थिति, निर्देशिका, निविदा आदि का आप्शन है लेकिन वहां कुछ अपलोड नहीं किया गया है। दस सीटर मोबाइल शौचालय के लिए सवा 12 लाख हजार रुपये दिया गया जबकि इसकी कीमत महज सवा छह लाख रुपये है।
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13वें वित्त के धन से 12 कूड़ा गाड़ी के लिए आठ लाख 10 हजार 180 रुपये का टेंडर हुआ। इस तरह प्रति रिक्शा कूड़ा गाड़ी 67500 रुपये का हिसाब लगाया गया। आरोप है कि बाजार में कहीं से भी 8000 रुपये में एक रिक्शा कूड़ा गाड़ी खरीदी जा सकती है। आरोप लगाया गया है कि वार्ड नं. 11 में 12 शीट शौचालय के निर्माण का टेंडर 39 लाख में हुआ
जबकि वहीं वार्ड नं. 6 में 10 शीटर का शौचालय का निर्माण सात लाख 32 हजार 100 रूपये में हुआ है। इसी प्रकार हाईमास्ट, एलईडी लाइट व खम्भों की खरीदारी टेंडर के अनुरूप न होकर प्रस्ताव से ज्यादा खरीदारी कर नगर के बाहरी हिस्सों में लाइट व खम्भों को लगाया गया। लोकल लाइटों की खरीदारी ऊंचे दामों में की गयी। सभासदों का आरोप है कि सरकारी धन की लूटखसोट की गयी है। चेयरमैन पति ने अपने करीबी को बचाने के लिए वार्ड नंबर 11 में शौचालय का निर्माण नहीं होने दिया। प्रस्तावित जमीन नजूल की है उस पर उनके करीबी का अवैध कब्जा है।