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लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुई धान की खरीद
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मऊ। किसानों से धन की खरीद इस बार लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो सकी। 71 हजार मीट्रिक टन की बजाय 55 हजार मीट्रिक टन की ही खरीद की जा सकी। ऐसा क्रय केंद्र प्रभारियों की लापरवाही माना जा रहा। प्रभारियों ने धान की क्वालिटी खराब बताकर किसानों को बैरंग लौटा दिया। इसके चलते खरीद कम हुई और किसानों ने अपनी फसल आढ़तियों को औने-पौने दाम में बेच दीं। सरकार की तरफ से किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान खरीद योजना शुरू की गई है। इसके लिए जिले में 57 धान क्रय केंद्र खोले गए थे। धान खरीद के लिए पांच एजेंसियों को नामित किया गया था। जिले को एक नवंबर से 28 फरवरी तक 71 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन निर्धारित समय सीमा तक सिर्फ 9699 किसानों से 55897.74 एमटी ही खरीद हो सकी। जबकि गत वर्ष लक्ष्य का 77.48 धान खरीद हुई थी। किसानों की मानें तो कई वर्षो से धान खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके चलते सरकारी योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए के चलते किसानों को अपनी फसल आढ़तियों को बेचना पड़ा। किसान नेता देवप्रकाश राय, राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, अजय सिंह, शिवप्रकाश यादव का कहना है कि क्रय केंद्र पर धान ले जाने पर खराब क्वालिटी बताकर धान खरीदने से इंकार कर दिया जाता है। फसल का उचित मूल्य न मिल पाने के चलते खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैए से मजबूरीवश फसल को आढ़तियों को बेचना पड़ा। विभाग की तरफ से जो धान खरीद की गई है उसमें भी अनियमितता बरती गई है। विभाग की तरफ से किसानों से खरीदे गए रिकार्ड की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शासनादेश के अनुरुप किसानों से धान खरीद की गई है। गत वर्ष की तुलना में धान खरीद अधिक हुई है।
दिनेश तिवारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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शासनादेश के अनुरुप किसानों से धान खरीद की गई है। गत वर्ष की तुलना में धान खरीद अधिक हुई है।
दिनेश तिवारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी