{"_id":"5b6c7b224f1c1b9b3e8b60ec","slug":"61533836066-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 अगस्त 1942 को एक साथ कई स्थानों पर हुए बवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 अगस्त 1942 को एक साथ कई स्थानों पर हुए बवाल
Updated Thu, 09 Aug 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजी हुकूमत बगावत को दबाने में जुट गई। इस दौरान वर्ष 1942 के आंदोलन में अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिए गांव-गांव में बैठकें आयोजित होने लगी। इस दौरान रणनीतियां बनाकर 15 अगस्त 1942 को जिले में एक साथ कई स्थानों पर हमले की योजना बनी। इस दौरान गिरफ्तार साथियों को छुड़ाने के लिए मधुबन थाने पर हमला करने की योजना बनी। लेकिन इसकी भनक अंग्रेजों को लग गई। फिर भी दीवानों के जनून अंग्रेजों की सारी तैयारी पर भारी पड़ा था। इस दौरान हुई फायरिंग में कई लोग शहीद हुए उनकी शहादत की याद में शहीद स्मारक तो बनाया गया, लेकिन आज वह बदहाल है।
मधुबन थाने पर कब्जे के लिए मऊ, आजमगढ़ देवरिया और गोरखपुर जनपदों से काफी संख्या में आजादी के दीवानों का हुजूम मधुबन पहुंच गया। थाने पर तिरंगा फहराने की मांग न मानने पर लोग ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के साथ भारत माता की जयकार करते हुए जबरन तिरंगा फराने के लिए थाने की ओर बढ़ने लगे। अंग्रेज कलेक्टर निबलेट उस समय थाने के अंदर मौजूद था। उसने थाने का गेट अंदर से बंद करा दिया। आजादी के रणबांकुरों के मनसूबों को देख थाने के अंदर से निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई जाने लगीं, थानेदार मुक्तेश्वर सिंह की गोली से सबसे पहले राम नक्षत्र पांडेय थाने के गेट पर ही शहीद हो गए। इसके बाद शाम चार बजे से छह बजे तक थाने से अंधाधुंध फायरिंग हुई। सरकारी तौर पर 149 राउंड गोली चलाने की पुष्टि की गई लेकिन प्रत्यक्ष दर्शियों का कहना था कि गोलियां इससे भी ज्यादा चलाई गई। इस फायरिंग में कुल तेरह लोग शहीद हो गए और 28 लोग घायल हो गए थे। फायरिंग बंद होने के बाद माता प्रसाद पांडेय थानेदार के घोड़े पर चढकर तिरंगा फहराये। उन्होंने घोषणा किया कि मधुबन थाने पर कब्जा हो गया है। उधर इसी दिन कल्यानपुर में दलसिंगार पांडेय के नेतृत्व में रेल लाइन उखाड़ दी गई। साथ ही रामपुर पुलिस चौकी जला दी गई। रामपुर डाकखाने पर भी तिरंगा फहराया। मनीआर्डर के आए रुपयों को जनता तक पहुंचाने की हिदायत दी गई।
इनसेट
कलेक्टर निबलेट 30 घंटे तक थाने में रहै कैद
मऊ। क्रांतिवीरों का जोश देख कलेक्टर डर गया था। क्योंकि आजादी के दीवानों ने कुंडा कुचाई के पास और मदीना के पास घोसी की ओर जाने वाली सड़क काटकर रास्ता घेर रखा था। 16 अगस्त की दोपहर के बाद एक रईस का हाथी मंगवाकर उससे निबलेट आजमगढ़ के लिए रवाना हुआ। उसके आगे पीछ़े पुलिस के जवान उसे घेर कर चल रहे थे।
विज्ञापन
इनसेट
गोलीकांड में शहीदों के नाम पते
1. रामपति तिनहरी
2. राम नक्षत्र पांडेय - कंधरापुर
3. सोम्मर राम गड़ेरी - मर्यादपुर
4. कुमार माझी - मर्यादपुर
5. हनीफ दर्जी 5 गुरुम्हा
6. शिवधन - पहाड़ीपुर
7. रघुनाथ - भवनी सराय
8. राजदेव कांदू - रामपुर
9. भागवत सिंह- कुचाई
10. लक्षनपति कोइरी - नेवादा
11. बनवारी यादव - कटघरा
12. मुन्नीकुंवर - तिघरा
13. बधू लोनिया- मछिला
इनसेट
उपेक्षित है शहीदों का स्मारक
मऊ।शहीदों की याद में कटघरा शंकर मोड़ पर शहीद स्मारक बना हुआ है। लेकिन यह काफी बदहाल स्थिति में है। इस पर अतिक्रमण है। घोर गंदगी का आलम है। जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शहीद स्मारक की सुधि नहीं लेते हैं। क्षेत्रवासियों को यह उपेक्षा काफी अखरती है।
विज्ञापन
मधुबन थाने पर कब्जे के लिए मऊ, आजमगढ़ देवरिया और गोरखपुर जनपदों से काफी संख्या में आजादी के दीवानों का हुजूम मधुबन पहुंच गया। थाने पर तिरंगा फहराने की मांग न मानने पर लोग ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के साथ भारत माता की जयकार करते हुए जबरन तिरंगा फराने के लिए थाने की ओर बढ़ने लगे। अंग्रेज कलेक्टर निबलेट उस समय थाने के अंदर मौजूद था। उसने थाने का गेट अंदर से बंद करा दिया। आजादी के रणबांकुरों के मनसूबों को देख थाने के अंदर से निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई जाने लगीं, थानेदार मुक्तेश्वर सिंह की गोली से सबसे पहले राम नक्षत्र पांडेय थाने के गेट पर ही शहीद हो गए। इसके बाद शाम चार बजे से छह बजे तक थाने से अंधाधुंध फायरिंग हुई। सरकारी तौर पर 149 राउंड गोली चलाने की पुष्टि की गई लेकिन प्रत्यक्ष दर्शियों का कहना था कि गोलियां इससे भी ज्यादा चलाई गई। इस फायरिंग में कुल तेरह लोग शहीद हो गए और 28 लोग घायल हो गए थे। फायरिंग बंद होने के बाद माता प्रसाद पांडेय थानेदार के घोड़े पर चढकर तिरंगा फहराये। उन्होंने घोषणा किया कि मधुबन थाने पर कब्जा हो गया है। उधर इसी दिन कल्यानपुर में दलसिंगार पांडेय के नेतृत्व में रेल लाइन उखाड़ दी गई। साथ ही रामपुर पुलिस चौकी जला दी गई। रामपुर डाकखाने पर भी तिरंगा फहराया। मनीआर्डर के आए रुपयों को जनता तक पहुंचाने की हिदायत दी गई।
विज्ञापन
इनसेट
कलेक्टर निबलेट 30 घंटे तक थाने में रहै कैद
मऊ। क्रांतिवीरों का जोश देख कलेक्टर डर गया था। क्योंकि आजादी के दीवानों ने कुंडा कुचाई के पास और मदीना के पास घोसी की ओर जाने वाली सड़क काटकर रास्ता घेर रखा था। 16 अगस्त की दोपहर के बाद एक रईस का हाथी मंगवाकर उससे निबलेट आजमगढ़ के लिए रवाना हुआ। उसके आगे पीछ़े पुलिस के जवान उसे घेर कर चल रहे थे।
विज्ञापन
इनसेट
गोलीकांड में शहीदों के नाम पते
1. रामपति तिनहरी
2. राम नक्षत्र पांडेय - कंधरापुर
3. सोम्मर राम गड़ेरी - मर्यादपुर
4. कुमार माझी - मर्यादपुर
5. हनीफ दर्जी 5 गुरुम्हा
6. शिवधन - पहाड़ीपुर
7. रघुनाथ - भवनी सराय
8. राजदेव कांदू - रामपुर
9. भागवत सिंह- कुचाई
10. लक्षनपति कोइरी - नेवादा
11. बनवारी यादव - कटघरा
12. मुन्नीकुंवर - तिघरा
13. बधू लोनिया- मछिला
इनसेट
उपेक्षित है शहीदों का स्मारक
मऊ।शहीदों की याद में कटघरा शंकर मोड़ पर शहीद स्मारक बना हुआ है। लेकिन यह काफी बदहाल स्थिति में है। इस पर अतिक्रमण है। घोर गंदगी का आलम है। जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शहीद स्मारक की सुधि नहीं लेते हैं। क्षेत्रवासियों को यह उपेक्षा काफी अखरती है।