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पेयजल की समस्या से कौन दिलाएगा निजात
Updated Sat, 18 Nov 2017 11:46 PM IST
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मऊ। नगरपालिका क्षेत्र के आधे क्षेत्र से भी अधिक क्षेत्र में अभी पेयजल की व्यवस्था नदारद है। यहां हर पांच साल पर चुनाव होते हैं।जनप्रतिनिधि बनने के बाद पेयजल की समस्या के समाधान पर काम भी होता है लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी नगरपालिका क्षेत्र में पीने के पानी की पूरी व्यवस्था नहीं हो पाई है। कुछ क्षेत्र तो आज भी हैंडपंप का ही पानी पीते हैं। एक बार चुनाव फिर से सिर पर है। प्रत्याशी लोगों से तरह-तरह के वादे भी कर रहे हैं। सभी प्रत्याशियों का भी मानना है कि पूरे नगर को आज भी शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं है। वह अपने-अपने ढंग से इस समस्या का समाधान करने का सपना संजोए हुए हैं।
मऊ नगरपालिका में पेयजल एक बड़ा मुद्दा है। यहां शहरी जीवन जीने वालों के समक्ष सबसे बड़ा संकट शुद्ध पीने के पानी की है। पिछले कई चुनावों में यह मुद्दा हर चुनाव में उठता भी है लेकिन अभी भी किसी भी वार्ड में पूर्ण रूप से यह नहीं कहा जा सकता है कि पेयजल की व्यवस्था पूरी हो गई हो या सभी घरों में पाइप लाइन की व्यवस्था हो पाई है। जिन घरों में पाइप लाइन की व्यवस्था है भी वहां भी कहीं-कहीं आए दिन पाइप में लीकेज आदि की समस्या हो जाने से प्रदूषित पानी आने लगता है। इससे लोग आए दिन बीमार पड़ते हैं। वैसे तो नगरपालिका क्षेत्र की कुल आबादी 3 लाख 14 हजार के लिए पेयजल की आपूर्ति को 83 नलकूप विभिन्न क्षमता के लगे हुए हैं। जिनसे पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इनमें 647 हार्सपावर के पंप लगे हुए हैं। यह नलकूप भेली बाजार, औरंगाबाद, डोमनपुरा चुंगी, संगत घाट, माता पोखरा, शाही कटरा पुराना, भरहुका पूरा, काजीटोला, पुरा रअग्रवाल, क्यारीटोला, सब्जी मंडी, पठानटोला, पहाड़पुरा, साबरी मस्जिद, स्वदेशी काटन मिल, रघुनाथपुरा, बुनकर कालोनी आदि स्थानों पर गले हैं और यहीं से पेयजल की आपूर्ति विभिन्न ओवरहेड टैंकों के माध्यम से होती है। बावजूद इसके अभी नगर के पूरे 42 वार्डों में न तो पेयजल के लिए पाइप लाइन की व्यवस्था है और न ही सभी घरों में सप्लाई के पानी की ही व्यवस्था है। भदेसरा, परदहां, बकवल, गालीबपुर, ख्वाजाजहांपुर आदि क्षेत्र आज भी पेयजल के लिए गांव जैसा जीवन व्यतीत करते हैं।
क्या कहते हैं प्रमुख प्रत्याशी
नगर में पेयजल की हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन सालों में कई बार लोग प्रदूषित पानी पीने से बीमार पड़े और कई लोगों की मौत भी हो गई। नगर में पेयजल एक गंभीर संकट है। वह इसकी पूरी मुकम्मल व्यवस्था करेंगे।--संजीव जायसवाल भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
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पिछले पांच साल में उन्होंने जितना पेयजल की व्यवस्था की उतना अब तक के नगरपालिका कार्यकाल में किसी ने नहीं की। अब तक के कार्यकाल में नगर में 667 हार्सपावर के नलकूप लगे हैं, जिनमें अकेले हमारे कार्यकाल में 445 हार्सपावर के हैं। आगे इस समस्या पर पूरा ध्यान केंद्रित होगा। --अरशद जमाल- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
पिछले पांच सालों में पेयजल की समस्या पर कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने अपने कार्यकाल में करोड़ों रुपया पेयजल की व्यवस्था पर खर्च कर समस्या को कुछ कम करने का प्रयास किया। आगे पूरी पेयजल की पूरी व्यवस्था पर जोर रहेगा।---तैयब पालकी--बहुजन समाज पार्टी से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
नगरपालिका में पेयजल की समस्या काफी विकराल है। आए दिन लोग प्रदूषित पानी से बीमार पड़ रहे हैं और मर रहे हैं। यह नगरपालिका के अब तक के कार्यकाल पूरा करने वालों के मुंह पर तमाचा है। --अबु बकर अंसारी कांग्रेस से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी।
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मऊ नगरपालिका में पेयजल एक बड़ा मुद्दा है। यहां शहरी जीवन जीने वालों के समक्ष सबसे बड़ा संकट शुद्ध पीने के पानी की है। पिछले कई चुनावों में यह मुद्दा हर चुनाव में उठता भी है लेकिन अभी भी किसी भी वार्ड में पूर्ण रूप से यह नहीं कहा जा सकता है कि पेयजल की व्यवस्था पूरी हो गई हो या सभी घरों में पाइप लाइन की व्यवस्था हो पाई है। जिन घरों में पाइप लाइन की व्यवस्था है भी वहां भी कहीं-कहीं आए दिन पाइप में लीकेज आदि की समस्या हो जाने से प्रदूषित पानी आने लगता है। इससे लोग आए दिन बीमार पड़ते हैं। वैसे तो नगरपालिका क्षेत्र की कुल आबादी 3 लाख 14 हजार के लिए पेयजल की आपूर्ति को 83 नलकूप विभिन्न क्षमता के लगे हुए हैं। जिनसे पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इनमें 647 हार्सपावर के पंप लगे हुए हैं। यह नलकूप भेली बाजार, औरंगाबाद, डोमनपुरा चुंगी, संगत घाट, माता पोखरा, शाही कटरा पुराना, भरहुका पूरा, काजीटोला, पुरा रअग्रवाल, क्यारीटोला, सब्जी मंडी, पठानटोला, पहाड़पुरा, साबरी मस्जिद, स्वदेशी काटन मिल, रघुनाथपुरा, बुनकर कालोनी आदि स्थानों पर गले हैं और यहीं से पेयजल की आपूर्ति विभिन्न ओवरहेड टैंकों के माध्यम से होती है। बावजूद इसके अभी नगर के पूरे 42 वार्डों में न तो पेयजल के लिए पाइप लाइन की व्यवस्था है और न ही सभी घरों में सप्लाई के पानी की ही व्यवस्था है। भदेसरा, परदहां, बकवल, गालीबपुर, ख्वाजाजहांपुर आदि क्षेत्र आज भी पेयजल के लिए गांव जैसा जीवन व्यतीत करते हैं।
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क्या कहते हैं प्रमुख प्रत्याशी
नगर में पेयजल की हकीकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन सालों में कई बार लोग प्रदूषित पानी पीने से बीमार पड़े और कई लोगों की मौत भी हो गई। नगर में पेयजल एक गंभीर संकट है। वह इसकी पूरी मुकम्मल व्यवस्था करेंगे।--संजीव जायसवाल भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
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पिछले पांच साल में उन्होंने जितना पेयजल की व्यवस्था की उतना अब तक के नगरपालिका कार्यकाल में किसी ने नहीं की। अब तक के कार्यकाल में नगर में 667 हार्सपावर के नलकूप लगे हैं, जिनमें अकेले हमारे कार्यकाल में 445 हार्सपावर के हैं। आगे इस समस्या पर पूरा ध्यान केंद्रित होगा। --अरशद जमाल- समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
पिछले पांच सालों में पेयजल की समस्या पर कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने अपने कार्यकाल में करोड़ों रुपया पेयजल की व्यवस्था पर खर्च कर समस्या को कुछ कम करने का प्रयास किया। आगे पूरी पेयजल की पूरी व्यवस्था पर जोर रहेगा।---तैयब पालकी--बहुजन समाज पार्टी से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
नगरपालिका में पेयजल की समस्या काफी विकराल है। आए दिन लोग प्रदूषित पानी से बीमार पड़ रहे हैं और मर रहे हैं। यह नगरपालिका के अब तक के कार्यकाल पूरा करने वालों के मुंह पर तमाचा है। --अबु बकर अंसारी कांग्रेस से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी।