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आरएसएस ने शस्त्र पूजन कर मनाया विजय दशमी का उत्सव
Updated Tue, 03 Oct 2017 12:47 AM IST
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मऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से आयोजित विजय दशमी उत्सव के अवसर पर शस्त्र पूजन का कार्यक्रम प्रांत प्रचारक मुकेश जी के हाथों सोमवार को जीवनराम छात्रावास के मैदान में हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि माननीय मुकेश ने कहा कि आज का दिन महात्मा गाँधी एवं लालबहादुर शास्त्री का जन्म दिवस है। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने गाँधी जी के सत्याग्रह को राष्ट्रीय कार्य मानते हुए उसमें भागीदारी की और जेल गए। डॉ0 हेडगेवार के सामने एक यक्ष प्रश्न उपस्थित था कि गौरव सम्पन्न भारत गुलाम कैसे हुआ। भारत विश्व गुरु रहा है। हमारी संस्कृति सर्वेभवन्तु सुखिन: की रही है। जिसको हमारे ऋषियों, मुनियों ने विश्वभर में घूम-घूम कर प्रचारित किया। इसरायल के प्रसिद्ध चिंतक कहते है कि पूरी दुनिया में बिखरे हुए उनके समाज को भारत शरणार्थी के रूप में नहीं, अपितु अपने बन्धु के रूप में स्वीकार किया। लोग अपनी संकुचित मानसिकता में बँधने लगे। फलस्वरूप काफी कम संख्या में आकर विदेशियों ने भारत को गुलाम बना लिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में की और लक्ष्य रखा राष्ट्रीय चरित्र के व्यक्तित्व का निर्माण करना। माननीय मुकेश जी ने बताया कि प्रभु श्रीराम जी ने लंका विजय के बाद स्वदेशी का संदेश दिया और विभिषण के बार बार के निवेदन को ढअस्वीकार करते हुए कहा कि ऽजननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरियसि।ऽ लंका जीतकर भी प्रभु श्रीराम ने लंका राज्य न स्वीकारा। विभीषण को राजा बनाकर अपने राज्य वापस आकर स्वदेशी की भावना का संदेश विश्व को दिया।
उन्होंने चीन का जिक्र करते हुए कहा कि आज समय की माँग है कि हम अपने घर से चीनी वस्तुओं के प्रयोग को बन्द करने का संकल्प लें। इस दौरान भगवाध्वज के ध्वजारोहण एवं भारतमाता, डाक्टर हेडगेवार एवं श्रीगुरु के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम में वेद विद्वानों द्वारा वेद मंत्रों से शस्त्रों का विधिवत पूजन किया गया।कार्यक्रम में कैलाश जी, लक्ष्मण जी, जिला प्रचारक तारकेश्वर जी, रामविलास जी, अजय राय, सुनील, विनोद, सप्तऋर्षि, विजय, संजीव, गणेश, अरविन्द सिंह, आनन्द, गुलाब जी, आदि के साथ सैकड़ों गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने विजय दशमी उत्सव में हिस्सा लिया।
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वीरेंद्र चौहान
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सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि माननीय मुकेश ने कहा कि आज का दिन महात्मा गाँधी एवं लालबहादुर शास्त्री का जन्म दिवस है। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने गाँधी जी के सत्याग्रह को राष्ट्रीय कार्य मानते हुए उसमें भागीदारी की और जेल गए। डॉ0 हेडगेवार के सामने एक यक्ष प्रश्न उपस्थित था कि गौरव सम्पन्न भारत गुलाम कैसे हुआ। भारत विश्व गुरु रहा है। हमारी संस्कृति सर्वेभवन्तु सुखिन: की रही है। जिसको हमारे ऋषियों, मुनियों ने विश्वभर में घूम-घूम कर प्रचारित किया। इसरायल के प्रसिद्ध चिंतक कहते है कि पूरी दुनिया में बिखरे हुए उनके समाज को भारत शरणार्थी के रूप में नहीं, अपितु अपने बन्धु के रूप में स्वीकार किया। लोग अपनी संकुचित मानसिकता में बँधने लगे। फलस्वरूप काफी कम संख्या में आकर विदेशियों ने भारत को गुलाम बना लिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में की और लक्ष्य रखा राष्ट्रीय चरित्र के व्यक्तित्व का निर्माण करना। माननीय मुकेश जी ने बताया कि प्रभु श्रीराम जी ने लंका विजय के बाद स्वदेशी का संदेश दिया और विभिषण के बार बार के निवेदन को ढअस्वीकार करते हुए कहा कि ऽजननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरियसि।ऽ लंका जीतकर भी प्रभु श्रीराम ने लंका राज्य न स्वीकारा। विभीषण को राजा बनाकर अपने राज्य वापस आकर स्वदेशी की भावना का संदेश विश्व को दिया।
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उन्होंने चीन का जिक्र करते हुए कहा कि आज समय की माँग है कि हम अपने घर से चीनी वस्तुओं के प्रयोग को बन्द करने का संकल्प लें। इस दौरान भगवाध्वज के ध्वजारोहण एवं भारतमाता, डाक्टर हेडगेवार एवं श्रीगुरु के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम में वेद विद्वानों द्वारा वेद मंत्रों से शस्त्रों का विधिवत पूजन किया गया।कार्यक्रम में कैलाश जी, लक्ष्मण जी, जिला प्रचारक तारकेश्वर जी, रामविलास जी, अजय राय, सुनील, विनोद, सप्तऋर्षि, विजय, संजीव, गणेश, अरविन्द सिंह, आनन्द, गुलाब जी, आदि के साथ सैकड़ों गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने विजय दशमी उत्सव में हिस्सा लिया।
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