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कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए मिला प्रशिक्षण
Updated Fri, 07 Dec 2018 11:11 PM IST
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मऊ। सीएमओ कार्यालय के सभागार में शुक्रवार को जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में यूनीसेफ व गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से आए प्रशिक्षकों द्वारा अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी में भर्ती कराने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी केंद्र के चिकित्साधिकारी, बीसीपीएम, सीडीपीओ तथा आरबीएसके टीम के सदस्य मौजूद रहे।
शुक्रवार को सभागार में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में यूनीसेफ की राज्यस्तरीय प्रशिक्षण डॉ. रीमा द्वारा एमयूएसी टेप के माध्यम से अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में ट्रेनर ने पहचान की विधि की जानकारी देने के साथ एमयूएसी टेप के माध्यम से छह माह से लेकर पांच वर्ष 29 दिन के बच्चों को स्क्रीनिंग कुपोषण की पहचान करना बताया। प्रशिक्षक की भूमिका में मौजूद प्रवीण दुबे, नाजमीन खान और पवन मिश्रा द्वारा प्रशिक्षण के क्रम में बताया कि 11.5 सीएम के बाजू का घेरा होने वाले बच्चे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। साथ ही आम लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के प्रति जागरूक करने के साथ किशोरी और गर्भवती को इसकी जानकारी जरूरी दें। डा.रीमा ने हीमोग्लोबिन, शूगर, बी एम आई के साथ बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध दिया जाना बहुत ही उपयोगी है।कहा कि बच्चों को जन्म से छह माह तक पर्याप्त मात्रा में मां का दूध मिलने से बच्चों का सर्वांगीण विकास तेजी से होती है। बैठक में सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह, अपर सीएमओ डॉ. एम लाल, आरबीएसके मैनेजर अरविंद्र वर्मा, डॉ. एमपी सिंह, डीपीएम रविंद्र कुमार, सरोज राना, दुर्गाप्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को सभागार में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में यूनीसेफ की राज्यस्तरीय प्रशिक्षण डॉ. रीमा द्वारा एमयूएसी टेप के माध्यम से अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में ट्रेनर ने पहचान की विधि की जानकारी देने के साथ एमयूएसी टेप के माध्यम से छह माह से लेकर पांच वर्ष 29 दिन के बच्चों को स्क्रीनिंग कुपोषण की पहचान करना बताया। प्रशिक्षक की भूमिका में मौजूद प्रवीण दुबे, नाजमीन खान और पवन मिश्रा द्वारा प्रशिक्षण के क्रम में बताया कि 11.5 सीएम के बाजू का घेरा होने वाले बच्चे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। साथ ही आम लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के प्रति जागरूक करने के साथ किशोरी और गर्भवती को इसकी जानकारी जरूरी दें। डा.रीमा ने हीमोग्लोबिन, शूगर, बी एम आई के साथ बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध दिया जाना बहुत ही उपयोगी है।कहा कि बच्चों को जन्म से छह माह तक पर्याप्त मात्रा में मां का दूध मिलने से बच्चों का सर्वांगीण विकास तेजी से होती है। बैठक में सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह, अपर सीएमओ डॉ. एम लाल, आरबीएसके मैनेजर अरविंद्र वर्मा, डॉ. एमपी सिंह, डीपीएम रविंद्र कुमार, सरोज राना, दुर्गाप्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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