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बदहाल है खुरहट पीएचसी
Updated Sat, 29 Sep 2018 01:25 AM IST
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ब्लाक के खुरहट ग्राम पंचायत स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली शासन की योजना की पोल खोलने के लिए काफी है। यहां सब कुछ बदहाल है। भवन खस्ता हाल हो चुका है। खिड़की और दरवाजे तक नहीं बचे हैं। यहां तैनात डाक्टर सप्ताह में एक दो दिन आ कर औपचारिकता निभाते हैं। इससे ग्रामीण खासे परेशान हैं।
बता दें कि खुरहट में धर्मसीपुर, महासो,हाजीपुर, भौरेपुर, अमारी, कसारी, अमरहत, चक्रदेवा,बडार सहित आस पास के 15 गांवों में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए 1985 में शासन द्वारा चार शैया का पीएचसी केंद्र की स्थापना हुई थी। लेकिन इसके बाद एक बार भी अस्पताल का मरम्मत कार्य न होने के चलते अस्पताल जर्जर हालात में पहुंच चुका है। हालात यह है कि वर्तमान में अस्पताल के सभी कक्षों के साथ ओटी भी जर्जर हालात में है। जबकि यह अस्पताल ऐसे स्थान पर बना है जहा से मरीजों के लिए तहसील मुख्यालय तक पहुंच पाना मुश्किल कार्य है। बीमार होने पर उपचार लेने के लिए रानीपुर सीएचसी ही आना पड़ता है। देखभाल के अभाव में परिसर में घास उग आई है। देखभाल न होने के कारण अस्पताल में लगे दरवाजे एवं खिड़कियां तक उखड़ गए हैं। शौचालय एवं वार्ड सब कुछ बेहाल हैं। स्टाफ के रहने के लिए बने आवासीय ब्लाक की भी दशा खराब है। इस संबंध में धर्मसीपुर निवासी रवि गुप्ता का कहना है कि सुविधाए बदहाल होने के चलते लोगों को मजबूरी में झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। इसका खामियाजा कभी-कभी लोगों पर भारी पड़ता है। सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही यह अस्पताल संचालित है। कागजों में ही सारे कार्य कर लिये जाते हैं। वहीं धर्मसीपुर निवासी पिंटू सैनी का कहना है कि अस्पताल में तैनात डाक्टर भी कभी-कभी आते हैं। फार्मासिस्ट भी यहा नहीं रहते। मरीजों को हालत बिगड़ने पर प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा ही एक मात्र विकल्प है।
वहीं उमेश, संजय आदि ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। कोई देखभाल करने वाला नहीं है। यदि डाक्टर व पूरी टीम नियमित अस्पताल में मौजूद रहे तो क्षेत्रीय जनता को बहुत लाभ मिल सकेगा।
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इस वाबत रानीपुर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी का कहना है अस्पताल के जजर्र भवन के बाबत विभागीय उच्चधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
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बता दें कि खुरहट में धर्मसीपुर, महासो,हाजीपुर, भौरेपुर, अमारी, कसारी, अमरहत, चक्रदेवा,बडार सहित आस पास के 15 गांवों में चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए 1985 में शासन द्वारा चार शैया का पीएचसी केंद्र की स्थापना हुई थी। लेकिन इसके बाद एक बार भी अस्पताल का मरम्मत कार्य न होने के चलते अस्पताल जर्जर हालात में पहुंच चुका है। हालात यह है कि वर्तमान में अस्पताल के सभी कक्षों के साथ ओटी भी जर्जर हालात में है। जबकि यह अस्पताल ऐसे स्थान पर बना है जहा से मरीजों के लिए तहसील मुख्यालय तक पहुंच पाना मुश्किल कार्य है। बीमार होने पर उपचार लेने के लिए रानीपुर सीएचसी ही आना पड़ता है। देखभाल के अभाव में परिसर में घास उग आई है। देखभाल न होने के कारण अस्पताल में लगे दरवाजे एवं खिड़कियां तक उखड़ गए हैं। शौचालय एवं वार्ड सब कुछ बेहाल हैं। स्टाफ के रहने के लिए बने आवासीय ब्लाक की भी दशा खराब है। इस संबंध में धर्मसीपुर निवासी रवि गुप्ता का कहना है कि सुविधाए बदहाल होने के चलते लोगों को मजबूरी में झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। इसका खामियाजा कभी-कभी लोगों पर भारी पड़ता है। सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही यह अस्पताल संचालित है। कागजों में ही सारे कार्य कर लिये जाते हैं। वहीं धर्मसीपुर निवासी पिंटू सैनी का कहना है कि अस्पताल में तैनात डाक्टर भी कभी-कभी आते हैं। फार्मासिस्ट भी यहा नहीं रहते। मरीजों को हालत बिगड़ने पर प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा ही एक मात्र विकल्प है।
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वहीं उमेश, संजय आदि ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। कोई देखभाल करने वाला नहीं है। यदि डाक्टर व पूरी टीम नियमित अस्पताल में मौजूद रहे तो क्षेत्रीय जनता को बहुत लाभ मिल सकेगा।
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इस वाबत रानीपुर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी का कहना है अस्पताल के जजर्र भवन के बाबत विभागीय उच्चधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।