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शकुंतला के उपदेश् को सीखने पर जोर
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मऊ। परदहां ब्लाक क्षेत्र के बगलीपिजड़ा स्थित रामबचन सिंह राजकीय महिला महाविद्यालय में स्काइप के माध्यम से राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण मोहन पांडेय ने व्याख्यान दिया।
महाविद्यालय में शिक्षण पद्धतियों में नवाचार के अंतर्गत ऑनलाइन कक्षा के तहत व्याख्यान देते हुए कहा कि अभिज्ञान शाकुंतलम में निहित है भारतीय संस्कृति का सार। कालिदास भारतीयता के पोषक महाकवि हैं और उन्होंने अपने अभिज्ञान शाकुंतलम में भारतीय संस्कृति की महत्ता को विशेष रूप से रेखांकित किया है। भारतीय संस्कृति कितनी उदात्त है, इसकी पहचान अगर हमें करनी है तो अभिज्ञान शाकुंतलम का अध्ययन करना होगा। वर्तमान समय में परिवार में आई विसंगतियों के समाधान के लिए अभिज्ञान शाकुंतलम बहुत अच्छा साधन हो सकता है। महाकवि कालिदास के द्वारा कण्व के मुख से शकुंतला को दिया गया उपदेश एक नारी को जरूर सीखना चाहिए।
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महाविद्यालय में शिक्षण पद्धतियों में नवाचार के अंतर्गत ऑनलाइन कक्षा के तहत व्याख्यान देते हुए कहा कि अभिज्ञान शाकुंतलम में निहित है भारतीय संस्कृति का सार। कालिदास भारतीयता के पोषक महाकवि हैं और उन्होंने अपने अभिज्ञान शाकुंतलम में भारतीय संस्कृति की महत्ता को विशेष रूप से रेखांकित किया है। भारतीय संस्कृति कितनी उदात्त है, इसकी पहचान अगर हमें करनी है तो अभिज्ञान शाकुंतलम का अध्ययन करना होगा। वर्तमान समय में परिवार में आई विसंगतियों के समाधान के लिए अभिज्ञान शाकुंतलम बहुत अच्छा साधन हो सकता है। महाकवि कालिदास के द्वारा कण्व के मुख से शकुंतला को दिया गया उपदेश एक नारी को जरूर सीखना चाहिए।
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