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अजगर के गला कसने से मदारी की आवाज चली गई

Fri, 23 Mar 2018 11:55 PM IST
Updated Fri, 23 Mar 2018 11:55 PM IST
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अजगर के गला कसने से मदारी की आवाज चली गई
घोसी। अजगर द्वारा गला कसने से गंभीर रूप से बीमार सपेरे की याददाश्त चली गई है। उससे ठीक-ठीक बोला भी नहीं जा पा रहा। इधर कई दिनों से लापता पति की तलाश करती उसकी पत्नी शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंची। जहां उसकी हालत देख बीवी रोने-बिलखने लगी। डाक्टरों द्वारा बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर करने के बाद भी वह सपेरे को लेकर घर चली गई। उसका कहना था कि उसके पास इतने पैसे ही नहीं कि वह बनारस ले जाकर पति का इलाज करा सके।
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मालूम हो कि घोसी ब्लाक के हासापुर पथरीगांव में फ़क़ीर जाति के लोग मुख्यरूप से पहले भालू, बंदर का खेल दिखाकर आजीविका कमाते थे। भालू के खेल पर प्रतिबंध के बाद ये लोग सांप और मदारी का खेल दिखाकर परिवार का पेट पालते हैं। इसी गांव का निवासी अरमान (28) पुत्र इजहार बुधवार को मुहम्मदाबाद के अतरारी गांव में अजगर का खेल दिखा रहा था। इसी दौरान अजगर ने उसके गले को कस लिया, जिससे वह अचेत हो गया था। स्थानीय लोगों ने आननफानन में उसे 108 नंबर एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। उसके घरवालों को देर रात हादसे का पता चला। शुक्रवार को उसकी बीवी शकीला उसका पता लगाते हुए जिला अस्पताल पहुंची और अरमान की पहचान की। इस दौरान डाक्टरों ने उसे बताया कि अजगर ने उसका गला कस लिया था, जिससे उसकी याददाश्त चली गई है और बोलने में भी दिक्कत आ रही है। उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर न्यूरो विभाग रेफर किया गया है। वहां इलाज करवाए तो शायद लाभ हो। लेकिन गरीबी के चलते शकीला ने पति को वाराणसी ले जाने और वहां इलाज कराने में असमर्थता जताई। कोई रास्ता नहीं देखकर लाचार पत्नी सपेरे को लेकर घर चली आई।
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शकीला के अनुसार अरमान के पिता इजहार विकलांग हैं। उसके तीनों भाई अलग रहते हैं। उसके तीन बच्चे हैं। बड़ा पुत्र इंसाफ अली (7) , इंताब अली (5) तथा पुत्री यास्मीन (डेढ़ वर्ष) के भरणपोषण के लिए वह मजदूरी करती है। फिर भी वह कर्ज में डूबी है। उसका बीपीएल कार्ड है, जिससे 20 किलो अनाज मिलता है। ऐसे में पति के इलाज के लिए उसे मदद की दरकार है। फिलहाल ग्राम प्रधान अथवा किसी अन्य जगह से उसे किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिली है। उसने बताया कि उसका पति किसी को पहचान नहीं पा रहा है। मुंह से आवाज भी साफ नहीं निकल रही है।
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