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ब्लाक में मात्र दो मजदूरों को मिला 100 दिन तक काम
Updated Tue, 06 Mar 2018 11:32 PM IST
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मधुबन। मनरेगा के तहत मजदूरों को 100 दिन का काम देने का दावा तार-तार हो रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार 32 ग्राम सभाओं में कुल 239 लोगों को ही 100 दिन तक काम मिल पाया है। ब्लाक की 29 ग्रामसभाओं में मनरेगा के नियमों की अनदेखी करते हुए मजदूरों को 100 से अधिक दिनों का काम दिया गया है। जबकि अधिकांश मजदूरों को कार्य मिला ही नहीं। यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे में लोगों का गांव छोड़कर शहर की तरफ पलायन मजबूरी बन गई है। विकास खंड फतेहपुर मंडाव में कुल 82 ग्रामसभा थी, लेकिन नगर पंचायत मधुबन का सृजन होने के बाद दो गांवों सुल्तानपुर बारह गांवा और ग्रामसभा ककराडीह का अस्तित्व खत्म हो गया। इसके बाद बची 80 ग्रामसभाओ में कुल 33 हजार 639 जॉब कार्ड धारक मनरेगा मजदूर हैं। इसमें मात्र एक तिहाई यानी 10 हजार 311 जॉब कार्ड मजदूर ही सक्रिय बताए जाते हैं। इसमें से कुछ नेमडाड़, हसनपुर, ढंढ़वल पटरांव, बेला गदायनपट्टी, ढिलई फिरोजपुर सहित कुल सात ऐसी ग्रामसभाएं है जिनमे मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति एक हजार भी नहीं पहुंची है। जबकि ग्रामसभा सुवाह, रमऊपुर, लधुवाई, काठतरांव, कमलसागर, गंगऊपुर, रामपुर और धर्मपुर विशुनपुर गांवों में मजदूरों को10 से लेकर 36 लोगों को 100 दिनों का काम मिला है। इसमें ग्रामसभा लधुवाई में 36 मजदूरों को 100 दिन का कार्य देकर विकास खंड में प्रथम और ग्रामप्रधान रामपुर 27 मजदूरों को 100 दिन का कार्य देकर दूसरे नंबर पर है। विकास खंड के कुल 80 गांवों में केवल 11 ऐसे गांवों के 10 हजार या इससे अधिक लोगों को मानव कार्य दिवस कार्य करने को मिला है। जबकि 37 गांवों मे पांच हजार या इससे अधिक कार्य मिला है। शेष सात गांवों को छोड़कर अन्य गांवों में सृजित मानव दिवस एक हजार से लेकर पांच हजार तक है। जबकि सात गांवों में एक हजार से भी कम है। उप श्रमायुक्त मनरेगा तेजभान सिंह ने बताया कि जिस गांव में मनरेगा के तहत काम कम कराए गए हैं उन गांवों के कार्यों की समीक्षा की जाएगी और काम कम पाए जाने पर ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी से जवाब तलब किया जाएगा। जिन गांवों में 100 दिन से अधिक काम कराया जाना पाया जाएगा, उनसे भी जवाब तलब किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी और ग्राम प्रधान के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
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